{"_id":"5e7e91408ebc3e77434650c4","slug":"delhi-government-will-fight-corona-on-the-model-of-china","type":"story","status":"publish","title_hn":"#LadengeCoronaSe: चीन के मॉडल पर कोरोना से जंग लड़ेगी दिल्ली सरकार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
#LadengeCoronaSe: चीन के मॉडल पर कोरोना से जंग लड़ेगी दिल्ली सरकार
Sat, 28 Mar 2020 05:20 AM IST
दुष्यंत शर्मा
परीक्षित निर्भय, नई दिल्ली
परीक्षित निर्भय, नई दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Sat, 28 Mar 2020 05:20 AM IST
विज्ञापन
सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
केजरीवाल सरकार चीन मॉडल पर कोरोना वायरस से जंग लड़ने की तैयारी कर रही है। चीन में कोरोना वायरस के महामारी बनने के बाद वहां के दर्जन भर से ज्यादा वैज्ञानिकों ने रिसर्च किया था, जिसे न्यू इंग्लैंड जर्नल में प्रकाशित भी किया गया है। अध्ययन में यह साबित हुआ है कि कोरोना की चपेट में आने वाले मरीजों में से केवल 14 फीसदी को ही अस्पतालों में भर्ती करने की जरूरत पड़ती है।
विज्ञापन
इनमें से 5 फीसदी को आईसीयू और 2.3 फीसदी मरीजों को वेंटिलेटर देना पड़ता है। अध्ययन में उल्लेख किया गया है कि प्रति एक हजार संक्रमित में से 14 की मौत हो रही है। इसी रिसर्च के आधार पर दिल्ली सरकार ने कोरोना वायरस से निपटने के लिए त्रिस्तरीय योजना तैयार की है।
विज्ञापन
योजना बनाने वाली कमेटी के अध्यक्ष डॉ. एसके सरीन का कहना है कि चीन के वैज्ञानिकों की रिसर्च को आधार मानते हुए कोरोना मैनेजमेंट की योजना बनाई है। इसे तीन चरणों में बांटा गया है। हालांकि अब तक स्थिति सरकार के नियंत्रण में है लेकिन अगर भविष्य में प्रतिदिन 100 संक्रमित मरीज मिलते हैं तो पहले चरण के तहत सरकार काम करेगी। अगर 500 मरीज प्रतिदिन आते हैं तो दूसरा और एक हजार मरीज मिलते हैं तो तीसरा चरण लागू होगा।
विज्ञापन
वर्तमान स्थिति को देखें तो दिल्ली में शुक्रवार शाम तक 40 संक्रमित मरीज ही सामने आए हैं। इस आधार पर पहले चरण से भी काफी दूर है। बावजूद इसके सरकार ने पहले चरण की तैयारी शुरू कर दी है। लोकनायक अस्पताल और ताहिरपुर स्थित राजीव गांधी सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल को फोकस किया गया है। डॉ. सरीन ने बताया कि अगर पहले चरण को ही मानकर चले तो भी 100 में से प्रतिदिन 14 मरीजों को ही भर्ती करने की जरूरत पड़ने का अनुमान है। जबकि 5 को आईसीयू और दो से तीन के लिए वेंटिलेटर की जरूरत पड़ सकती है।
हर अस्पताल को रहना पड़ेगा तैयार
कमेटी की सिफारिशों के अनुसार भले ही दिल्ली में कोरोना वायरस का सामुदायिक स्तर पर फैलाव अब तक नजर नहीं आया हो, लेकिन भविष्य को लेकर सतर्कता बेहद जरूरी है। इसलिए दिल्ली के हर अस्पताल को अलर्ट पर रहना होगा फिर चाहे वह सरकारी हो या फिर प्राइवेट। 100 बिस्तरों से ज्यादा क्षमता वाले प्राइवेट अस्पतालों को कम से कम 15 से 20 बिस्तर आरक्षित रखना चाहिए।