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Delhi: पेरिफेरल एक्सप्रेसवे का बकाया चुकाएगी दिल्ली सरकार, 3700 करोड़ रुपये के भुगतान को मंजूरी

Sat, 21 Mar 2026 06:44 PM IST
Vijay Singh Pundir अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: Vijay Singh Pundir Updated Sat, 21 Mar 2026 06:44 PM IST
सार

दिल्ली सरकार ने पूर्वी पेरिफेरल एक्सप्रेसवे और पश्चिमी पेरिफेरल एक्सप्रेसवे की भूमि अधिग्रहण लागत में अपनी हिस्सेदारी का बकाया भुगतान करने का निर्णय ले लिया है। ये राशि करीब 3700 करोड़ रुपये है, जो पिछले कई वर्षों से लंबित थी।

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Delhi government will clear the outstanding dues for the Peripheral Expressway
सीएम रेखा गुप्ता (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

दिल्ली सरकार ने पूर्वी और पश्चिमी पेरिफेरल एक्सप्रेसवे की भूमि लागत में अपनी बकाया हिस्सेदारी चुकाने का बड़ा फैसला लिया है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बताया कि करीब 3700 करोड़ रुपये के भुगतान को मंजूरी दे दी गई है, जिससे लंबे समय से अटका मामला अब सुलझेगा।

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शनिवार को मुख्यमंत्री ने इसकी जानकारी दी। दिल्ली सरकार ने पूर्वी पेरिफेरल एक्सप्रेसवे और पश्चिमी पेरिफेरल एक्सप्रेसवे की भूमि अधिग्रहण लागत में अपनी हिस्सेदारी का बकाया भुगतान करने का निर्णय ले लिया है। ये राशि करीब 3700 करोड़ रुपये है, जो पिछले कई वर्षों से लंबित थी। मुख्यमंत्री के मुताबिक, कैबिनेट ने लोक निर्माण विभाग के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है और अब भुगतान चरणबद्ध तरीके से किया जाएगा। वित्तीय वर्ष 2025-26 के संशोधित बजट से 500 करोड़ रुपये की पहली किस्त केंद्र सरकार और भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण को जारी की जाएगी। शेष 3203.33 करोड़ रुपये भविष्य के बजट प्रावधानों के तहत किस्तों में दिए जाएंगे।
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पिछली सरकार ने रोके रखा अंतरराज्यीय विकास
सीएम ने कहा कि ये निर्णय सिर्फ एक वित्तीय औपचारिकता नहीं, बल्कि दिल्ली के विकास से जुड़ा बड़ा फैसला है। इससे अंतर-राज्यीय वित्तीय मुद्दों का समाधान होगा और केंद्र सरकार के साथ तालमेल बेहतर होगा, जिससे आगे की बुनियादी परियोजनाओं को गति मिलेगी। मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि पिछली सरकार ने इस परियोजना को लेकर गंभीरता नहीं दिखाई और राजनीतिक कारणों से भुगतान को जानबूझकर रोके रखा। इसका नुकसान दिल्ली के विकास और यातायात व्यवस्था को हुआ। अब इस फैसले से यह सुनिश्चित होगा कि भविष्य में कोई भी परियोजना पैसे या आपसी विवादों के कारण अटके नहीं। सीएम ने कहा, पेरिफेरल एक्सप्रेसवे का मकसद दिल्ली को भारी वाहनों के दबाव से राहत देना है। ये एक्सप्रेसवे 2018 से चालू हैं और दिल्ली के चारों ओर एक तरह का ट्रैफिक घेरा बनाते हैं। इससे वे ट्रक और कमर्शियल वाहन, जिन्हें केवल दिल्ली से होकर गुजरना होता है, शहर में प्रवेश किए बिना ही बाहर से निकल जाते हैं।

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दिल्ली के चारों ओर स्मार्ट रिंग रोड बनाता है पेरीफेरल
इन एक्सप्रेसवे की लंबाई करीब 135-135 किलोमीटर है और ये छह-लेन के आधुनिक मार्ग हैं। पूर्वी पेरिफेरल एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद, गौतम बुद्ध नगर और बागपत को जोड़ता है, जबकि पश्चिमी पेरिफेरल एक्सप्रेसवे हरियाणा के कुंडली, मानेसर और पलवल को कनेक्ट करता है। दोनों मिलकर दिल्ली के चारों ओर एक स्मार्ट रिंग रोड का काम करते हैं। इसका सीधा फायदा ये हुआ है कि दिल्ली की सड़कों, खासकर रिंग रोड, बाहरी रिंग रोड और एनएच-44 व एनएच-48 जैसे प्रमुख मार्गों पर ट्रैफिक का दबाव कम हुआ है। जाम घटने से यात्रियों का समय और ईंधन दोनों की बचत हो रही है। सबसे बड़ा असर प्रदूषण पर पड़ा है। भारी डीजल वाहनों की संख्या कम होने से दिल्ली की हवा को साफ रखने में मदद मिली है। इसके अलावा इन एक्सप्रेसवे को ग्रीन और स्मार्ट तरीके से विकसित किया गया है, जहां सौर ऊर्जा और ड्रिप इरिगेशन जैसी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया है।

दिल्ली के भले के लिए भुगतान जरूरी-सीएम
मुख्यमंत्री ने कहा कि इस भुगतान से दिल्ली स्मार्ट और प्रदूषण मुक्त शहर बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ेगी। सरकार का लक्ष्य है कि केंद्र के साथ मिलकर विकास की रफ्तार बढ़ाई जाए और दिल्लीवासियों को बेहतर यातायात और साफ वातावरण मिल सके।

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