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सचिवालय: केंद्र सरकार के बाद अब दिल्ली सरकार का भी बदलेगा पता, 30 मंजिला ट्विन टावर में हेलीपैड समेत होंगी कई स्मार्ट सुविधाएं
Fri, 11 Feb 2022 10:26 AM IST
पूजा त्रिपाठी
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: पूजा त्रिपाठी
Updated Fri, 11 Feb 2022 10:26 AM IST
सार
आईटीओ क्षेत्र में बनाई जाने वाली इमारतें हरित इमारतें होगी और सौर ऊर्जा, सब-स्टेशन, सीसीटीवी, वाईफाई और लैन (लोकल एरिया नेटवर्क) सुविधा से लैस होंगे।
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पुराना दिल्ली सचिवालय
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
केंद्र सरकार के बाद अब दिल्ली सरकार ने भी अब अपना पता बदलने का निर्णय लिया है। दरअसल केजरीवाल सरकार अपना नया सचिवालय बना रही है जो ट्विन टावर के नाम से जाना जाएगा। दिल्ली सरकार का नया सचिवालय कई मामलों में बहुत खास होगा। यही नहीं, इसकी छत पर हेलीकॉप्टर भी उतर सकेगा। आगे पढ़िए इस सचिवालय की खासियतें और सरकार का प्लान....
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आईटीओ इलाके में बनने वाला सचिवालय दो बहुमंजिला और पर्यावरण के अनुकूल इमारत होगा। करीब 30 मंजिली इन इमारतों में मुख्यमंत्री एवं समस्त मंत्रियों और अधिकारियों के कार्यालय होंगे। इन्हें बनाने पर करीब दो हजार करोड़ रुपये खर्च का अनुमान है।
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दोनों इमारतों का निर्माण लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) की देखरेख में होगा। इस परियोजना के लिए सलाहकार नियुक्त करने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। इसके बाद ये इमारतें बनाने की कार्यवाही शुरू होगी। परियोजना के तहत आईटीओ के पास तीन भूखंडों पर इमारतें बनाई जाएंगी। एक इमारत विकास भवन-एक के भूखंड पर बनाने की योजना है।
बताया जा रहा है कि दोनों इमारतें बनाने की परियोजना को दो चरणों में पांच साल में पूरा किया जाएगा। पहले चरण में विकास भवन-एक प्लॉट पर इमारत का निर्माण किया जाएगा। वहीं दूसरे चरण में पीडब्ल्यूडी मुख्यालय और जीएसटी बिल्डिंग के भूखंड पर इमारत बनाई जाएगी। ये इमारतें करीब 30-30 मंजिल की होंगी। इनकी संरचना और डिजाइन आधुनिक होगी।
आईटीओ क्षेत्र में बनाई जाने वाली इमारतें हरित इमारतें होगी और सौर ऊर्जा, सब-स्टेशन, सीसीटीवी, वाईफाई और लैन (लोकल एरिया नेटवर्क) सुविधा से लैस होंगे। इनमें स्मार्ट हेलीपैड पार्किंग सिस्टम, व्यायामशाला, कैफेटेरिया, छोटे सुपर मार्केट, फूड कोर्ट, लाइब्रेरी, एस्केलेटर, विकलांगों के अनुकूल लिफ्ट जैसी सुविधाएं भी होंगी। इन इमारतों में सम्मेलनों, संगोष्ठियों आदि के लिए आधुनिक कनेक्टिविटी के साथ सम्मेलन कक्ष और सभागार भी होंगे।
वहीं, मुख्यमंत्री एवं मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों के कार्यालय इंदिरा गांधी इंडोर स्टेडियम के पास दिल्ली सचिवालय में हैं। दिल्ली सचिवालय को प्लेयर्स बिल्डिंग के रूप में भी जाना जाता है। यह बिल्डिंग वर्ष 1982 के एशियाई खेलों के लिए एक होटल के रूप में बनाई गई थी।
ऐसे होगा भूमि का इंतजाम
दूसरी इमारत पीडब्ल्यूडी मुख्यालय और जीएसटी बिल्डिंग के भूखंडों पर बनाई जाएगी। इन तीनों स्थानों पर बनी इमारतों को गिराकर पर्यावरण के अनुकूल इमारतें बनाई जाएंगी। इन तीनों स्थानों पर करीब 50 हजार वर्गमीटर भूमि है।बताया जा रहा है कि दोनों इमारतें बनाने की परियोजना को दो चरणों में पांच साल में पूरा किया जाएगा। पहले चरण में विकास भवन-एक प्लॉट पर इमारत का निर्माण किया जाएगा। वहीं दूसरे चरण में पीडब्ल्यूडी मुख्यालय और जीएसटी बिल्डिंग के भूखंड पर इमारत बनाई जाएगी। ये इमारतें करीब 30-30 मंजिल की होंगी। इनकी संरचना और डिजाइन आधुनिक होगी।
दोनों हरित इमारतें होंगी, रहेंगी ये खास सुविधाएं
नए कार्यालय परिसर के लिए विस्तृत डिजाइन तैयार करने के लिए सलाहकार की नियुक्ति करेगी। मास्टर प्लान के अनुसार फ्लोर एरिया रेशियो (एफएआर) के अधिकतम उपयोग पर भी काम करेगा।आईटीओ क्षेत्र में बनाई जाने वाली इमारतें हरित इमारतें होगी और सौर ऊर्जा, सब-स्टेशन, सीसीटीवी, वाईफाई और लैन (लोकल एरिया नेटवर्क) सुविधा से लैस होंगे। इनमें स्मार्ट हेलीपैड पार्किंग सिस्टम, व्यायामशाला, कैफेटेरिया, छोटे सुपर मार्केट, फूड कोर्ट, लाइब्रेरी, एस्केलेटर, विकलांगों के अनुकूल लिफ्ट जैसी सुविधाएं भी होंगी। इन इमारतों में सम्मेलनों, संगोष्ठियों आदि के लिए आधुनिक कनेक्टिविटी के साथ सम्मेलन कक्ष और सभागार भी होंगे।
डिप्टी सीएम ने किया था मुआयना
उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने पीडब्ल्यूडी के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ कुछ माह पहले विकास भवन-एक के भूखंड का मुआयना किया था। विकास भवन-एक में खाद्य और आपूर्ति और उत्पाद शुल्क के कार्यालय हैं। इस इमारत में छह-सात मंजिलें हैं।वहीं, मुख्यमंत्री एवं मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों के कार्यालय इंदिरा गांधी इंडोर स्टेडियम के पास दिल्ली सचिवालय में हैं। दिल्ली सचिवालय को प्लेयर्स बिल्डिंग के रूप में भी जाना जाता है। यह बिल्डिंग वर्ष 1982 के एशियाई खेलों के लिए एक होटल के रूप में बनाई गई थी।