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केजरीवाल सरकार ने निजी अस्पतालों की गलतियों को ध्यान में रख जारी की ऐसी गाइडलाइन
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Mon, 08 Jan 2018 10:26 AM IST
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नवजात शिशु को मृत घोषित किए जाने के बाद मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की सरकार अब निजी अस्पतालों के लिए 10 चेतावनी जल्द देने वाली है। इसके लिए स्वास्थ्य महकमे ने गाइडलाइन तैयार कर ली है।
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अगले एक सप्ताह के भीतर स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन इसकी घोषणा कर सकते हैं। पिछले महीने घटना के बाद सरकार ने बनाई 9 डॉक्टरों की कमेटी ने इन 10 बिंदुओं के तहत निजी अस्पतालों में मरीजों का उपचार करने की सलाह दी है।
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इस पर स्वास्थ्य विभाग ने भी सहमति जताई है। सूत्रों का कहना है कि इन नियमों के बाद काफी हद तक चिकित्सीय लापरवाही मामलों में कमी आ सकती है। वहीं, आएदिन हो रहे विवादों में भी कमी आएगी।
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डॉक्टर होगा इन बातों का जवाबदेह
सत्येंद्र जैन
बता दें कि पिछले कुछ समय से दिल्ली के निजी अस्पतालों की शिकायतों का अंबार लगने लगा है। कभी चिकित्सीय लापरवाही तो कभी ज्यादा बिल। कई बार बिल जमा करने के बाद ही शव पीड़ित परिजनों को सौंपने के मामले सामने आए हैं।
इनसब के बीच शालीमार बाग स्थित मैक्स अस्पताल ने सरकार को सख्त आदेश लेने के लिए मजबूर भी कर दिया। अब इन्हीं पर रोक लगाने के लिए सरकार ने ये तैयारी की है।
सरकार की कमेटी के सदस्य डॉ. केके अग्रवाल ने बताया कि गाइडलाइन में अस्पतालों को मरीज के दाखिले के समय इलाज के खर्च और उसकी संभावना बतानी होगी। इसके अलावा अगर कोई इलाज में गंभीर परिणाम आने की संभावना होती है तो जानाकरी भी मरीज को देनी होगी।
मरीज को किसी विशेष जांच की सलाह देने से पहले डॉक्टर को इसकी वजह बतानी होगी। अगर डॉक्टर अपने फीस से किसी पेशेवर को कोई हिस्सा या कमिशन देता है, तो उसे इसकी जानाकरी भी मरीज को देना होगा। इसके अलावा ओपीडी फीस और नॉन इसेंसीयल कंज्यूमेबलों की प्राइस कैपींग भी की जा सकती है।
इनसब के बीच शालीमार बाग स्थित मैक्स अस्पताल ने सरकार को सख्त आदेश लेने के लिए मजबूर भी कर दिया। अब इन्हीं पर रोक लगाने के लिए सरकार ने ये तैयारी की है।
सरकार की कमेटी के सदस्य डॉ. केके अग्रवाल ने बताया कि गाइडलाइन में अस्पतालों को मरीज के दाखिले के समय इलाज के खर्च और उसकी संभावना बतानी होगी। इसके अलावा अगर कोई इलाज में गंभीर परिणाम आने की संभावना होती है तो जानाकरी भी मरीज को देनी होगी।
मरीज को किसी विशेष जांच की सलाह देने से पहले डॉक्टर को इसकी वजह बतानी होगी। अगर डॉक्टर अपने फीस से किसी पेशेवर को कोई हिस्सा या कमिशन देता है, तो उसे इसकी जानाकरी भी मरीज को देना होगा। इसके अलावा ओपीडी फीस और नॉन इसेंसीयल कंज्यूमेबलों की प्राइस कैपींग भी की जा सकती है।