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झुग्गियों की जिंदगी को बेहतर बनाएगी दिल्ली सरकार की ये पहल

Tue, 26 Jul 2016 03:09 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला
टीम डिजिटल/अमर उजाला Updated Tue, 26 Jul 2016 03:09 PM IST
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Delhi Government this plan Will Improve slums life,
क्रेच सेंटर - फोटो : टाइम्स ऑफ इंड‌िया

कुछ महीने पहले तक आशा ने कभी काम करने के बारे में नहीं सोचा था। लेकिन दो महिने पहले भजनपुरा के एक आंगनवाड़ी में छोटे बच्चों की देखभाल के लिए क्रेच खुल जाने से ‌आशा का 2 साल का बेटा निहाल आराम से वहां के लोगों की देखरेख के बीच रहता है। वहीं आशा अब इलाके के ही एक स्कूल में पढ़ाती है।

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ये क्रेच उन पंद्रह में से एक है जो उत्तरपूर्वी दिल्ली में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में पिछले दो महीने में खुले हैं। इनका उद्देश्य झुग्गियों और रिसेटलमेंट कॉलोनियों में रहने वाली कामकाजी महिलाओं के बच्चों की देखभाल करना है। दक्षिणी दिल्ली में ऐसे आठ क्रेच हैं।
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आशा जैसी ही नजमा प्रवीण भी अपनी 21 माह की बेटी जेहनाब को ऐसे ही एक क्रेच में छोड़कर काम करने जाती है। नजमा अपनी बेटी को सुबह 9 बजे यहां छोड़ती है और दोपहर में 2 बजे क्रेच से ले जाती है।
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इससे उसकी ना केवल काम करने में दिक्कतें कम हो गई हैं, बल्कि जेहनाब अन्य बच्चों के साथ रहकर बहुत कुछ सीख चुकी है। नजमा का कहना है कि उसे सबसे बड़ी संतुष्टी इस बात कि है कि जब वो काम पर रहती है तब उसकी बेटी जेहनाब सुरक्षित है।

दिल्ली के स्लम्स में ऐसे 300 और क्रेच खोलने की योजना

Delhi Government this plan Will Improve slums life,
आंगनवाड़ी - फोटो : Demo Pic

कई मां-बाप जो अपने बच्चों को इस तरह के क्रेच में छोड़कर जाते हैं वो दिहाड़ी मजदूर, घरेलू और कारखाने के कर्मचारी होते हैं। हालांकि अभी ये जगह उतनी एडवांस नहीं है पर वहां के स्टाफ बेहतर सेवा देने की हर मुमकिन कोशिश कर रहें हैं।

बच्चों के खिलौने भी काफी कम हैं, पर इन्हें बढ़ाने के लिए योजना बनाई जा रही है। इसके साथ ही यहां बच्चा छोड़कर काम पर जाने वाले माता-पिता चाहते हैं कि उनके बच्चों को पौष्टिक भोजन भी मिले खासतौर से तीन साल से कम उम्र वाले बच्चों को। 

राज्य सरकार पुर्नोत्थान बाल संरक्षण योजना के तहत केंद्र के साथ मिलकर दिल्ली के स्लम्स में ऐसे 300 और क्रेच खोलने की योजना बना रही है। लेकिन कुछ बाधाओं के चलते इस योजना को शुरु होने में देरी होती रही है।

लोगों को उनकी बच्चा संभालने की काबिलियत पर रखेंगे ना कि उनकी शैक्षिक योग्यता पर।

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स्लम्स एरिया - फोटो : Demo pic

आखिरकार यह योजना इस साल मई में शुरु हुई और ‌जिसका टारगेट 30 क्रेचों को खोलने का था। अंग्रेजी अखबार टाइम्स ऑफ ‌इंडिया से बातचीत के दौरान महिला एंव बाल विकास विभाग के सचिव अश्विनी कुमार ने बताया कि वो गुणवत्ता सुधारने पर अपना पूरा ध्यान दे रहे थे।

उन्होंने ये भी कहा कि, ऐसी बहुत चुनौतियां हैं जिससे हमें निपटने की जरूरत है। जैसे कि बहुत सारे ऐसे लोग थे जो आंगनबाड़ी कार्यकर्ता बनने की वेटिंग लिस्ट में थे और हमें लगा कि वो क्रेचों में भी काम कर लेंगे।

लेकिन उनमें से बहुत से लोगों के पास वो क्षमता नहीं थी जो बच्चों को संभालने के लिए चाहिए जैसे धैर्य, भावनात्मकता और बच्चों को संभालने की अलग तरह की ट्रेनिंग। इसलिए अब हम लोगों को उनकी बच्चा संभालने की काबिलियत पर रखेंगे ना कि उनकी शैक्षिक योग्यता पर।

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