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Delhi Government: बजट से पहले सरकार की सख्ती, वित्त वर्ष के अंत में खर्च की जल्दबाजी पर विभागों को नोटिस

Thu, 19 Mar 2026 01:30 AM IST
दुष्यंत शर्मा आदित्य पाण्डेय, अमर उजाला, नई दिल्ली
आदित्य पाण्डेय, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Thu, 19 Mar 2026 01:30 AM IST
सार

सभी विभागों को निर्देश दिया कि खर्च से जुड़े प्रस्ताव 23 मार्च तक वित्त विभाग को भेजे जाएं। इसके बाद आने वाले प्रस्तावों पर इस वित्त वर्ष में विचार नहीं किया जाएगा।

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Delhi Government strict before budget, notice to departments on hasty expenditure at the end of financial year
Delhi Secretariat - फोटो : X @TheRealDharm

विस्तार

दिल्ली सरकार ने वित्त वर्ष के अंतिम महीने में होने वाले खर्च की जल्दबाजी पर सख्त रुख अपनाया है। सभी विभागों को निर्देश दिया कि खर्च से जुड़े प्रस्ताव 23 मार्च तक वित्त विभाग को भेजे जाएं। इसके बाद आने वाले प्रस्तावों पर इस वित्त वर्ष में विचार नहीं किया जाएगा।

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दिल्ली सरकार के वित्त विभाग (पॉलिसी डिवीजन) ने इस संबंध में सभी अतिरिक्त मुख्य सचिवों, प्रमुख सचिवों, सचिवों और विभागाध्यक्षों को निर्देश दिए हैं। इसमें कहा कि वित्त वर्ष के आखिरी महीने में खर्च का अचानक बढ़ जाना वित्तीय अनुशासन के खिलाफ माना जाता है। इससे बचना जरूरी है। वित्त विभाग ने स्पष्ट किया है कि जनरल फाइनेंशियल रूल्स (जीएफआर) 2017 के नियम 62(3) के मुताबिक वित्त वर्ष के अंतिम महीने में खर्च की जल्दबाजी को वित्तीय अनुशासन का उल्लंघन माना जाता है। इसलिए सभी विभागों को पूरे साल खर्च की योजना बनाकर लगातार उसे समान रूप से लागू करना होता है।
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नोटिस में सख्त लहजे में कहा गया है कि अधिकतर कई विभाग वित्त वर्ष के बिल्कुल आखिरी दिनों में खर्च से जुड़े प्रस्ताव भेजते हैं। ऐसे मामलों में प्रस्तावों की ठीक से जांच के लिए पर्याप्त समय नहीं मिल पाता। साथ ही विभागों और एजेंसियों को धनराशि का सही तरीके से उपयोग करने के लिए पर्याप्त समय नहीं मिल पाता। इस वजह से कई बार विभागों को स्वीकृत खर्च की दोबारा वैधता (रिवैलिडेशन) लेनी पड़ती है। कई बात तो स्थानीय निकाय और अनुदान प्राप्त संस्थाएं बची हुई राशि को अगले वित्त वर्ष में खर्च करने की अनुमति मांगती हैं।
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वित्त विभाग की स्वीकृति मिलने की उम्मीद कम
वित्त विभाग ने कहा कि ऐसी स्थिति से बचने के लिए सभी विभागों को अपने खर्च से जुड़े प्रस्ताव समय पर भेजने चाहिए। इसी को ध्यान में रखते हुए वित्त विभाग ने निर्देश दिया है कि जिन प्रस्तावों के लिए वित्त विभाग की स्वीकृति जरूरी है, उन्हें 23 मार्च तक भेजना अनिवार्य होगा। विभाग ने यह भी साफ किया है कि तय समय सीमा के बाद आने वाले प्रस्तावों पर इस वित्त वर्ष में विचार नहीं किया जाएगा और उन्हें अगले वित्त वर्ष में ही देखा जाएगा।


सभी विभागों को जारी हो रहे निर्देश
वित्त विभाग ने सभी विभागों से कहा कि इन निर्देशों की जानकारी अपने-अपने विभागों और संबंधित एजेंसियों तक तुरंत पहुंचाई जाए, ताकि वित्तीय अनुशासन बनाए रखा जा सके। सरकार का मानना है कि समय पर प्रस्ताव भेजने और पूरे वर्ष खर्च को संतुलित रखने से न केवल वित्तीय अनुशासन मजबूत होगा, बल्कि सरकारी योजनाओं और परियोजनाओं को बेहतर तरीके से लागू किया जा सकेगा।

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