दिल्ली में कटी बिजली तो उपभोक्ताओं को प्रति घंटे मिलेंगे 50 रुपए, ये हैं नियम
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दिल्ली वालों को अघोषित बिजली की कटौती पर हर्जाना मिलेगा। पहले दो घंटे की कटौती पर प्रति उपभोक्ता 50 रुपये प्रति घंटे और इससे अधिक की कटौती होने पर 100 रुपये प्रति घंटे के हिसाब से हर्जाना मिलेगा।
यह हर्जाना उपभोक्ताओं के बिजली बिल में बिजली कंपनियों को एडजस्ट (समायोजन) करना होगा। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने बिजली विभाग के उस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है, जिसके अंतर्गत बिना किसी पूर्व सूचना के बिजली कटौती होने पर निजी बिजली कंपनियों को हर्जाना देना होगा।
इस नीति को अंतिम मंजूरी के लिए दिल्ली सरकार ने उपराज्यपाल अनिल बैजल को भेज दिया है। सरकार का मानना है कि इस निर्णय से बिजली कंपनियां उपभोक्ताओं के प्रति जवाबदेह होंगी।
दिल्ली सरकार ने स्पष्ट तौर पर कहा है कि बिजली का निजीकरण पंद्रह साल पहले इसलिए किया गया था कि उपभोक्ताओं को 24 घंटे बिजली मिले। उपभोक्ता बिजली कंपनियों को भुगतान करते हैं और यह उनका अधिकार है।
सरकार का मानना है कि उपभोक्ताओं के हित में लिए गए इस फैसले को उपराज्यपाल अपनी सहमति दे देंगे, जिससे ये फैसला देश के अन्य राज्यों के लिए एक मॉडल साबित होगा। अन्य राज्य भी इस तरह की नीति लागू कर सकेंगे।
मुख्य बातें
. बिना किसी पूर्व सूचना के बिजली कटौती होने की स्थिति में बिजली कंपनियों को एक घंटे के अंदर बिजली की आपूर्ति सुनिश्चित करनी होगी।
. एक दिन में केवल शुरुआती पहले घंटे की ऐसी कटौती की स्थिति बिजली कंपनियों को हर्जाने की छूट होगी।
. उपभोक्ता को बिजली कटौती का सामना करना पड़ता है तो उसे बिजली कटौती की शिकायत एसएमएस, ई.मेल, फोन, एप और वेबसाइट के जरिए देनी होगी। उपभोक्ता अपना नाम, कंज्यूमर एकाउंट, सीए नंबर, मोबाइल नंबर देंगे। बिजली कंपनियां को शिकायत स्वीकार करनी होगी और उपभोक्ताओं को शिकायत सुलझाने के दिन और समय की सूचना देनी होगी।
. एक निश्चित समय अवधि में उपभोक्ता के सीए नंबर में हर्जाना अपने आप पहुंच जाएगा, इसकी सूचना भी उपभोक्ता को दी जाएगी।
. किसी उपभोक्ता को अपने आप बिजली कंपनी से हर्जाना नहीं मिलता है तो वह डीईआरसी, सीजीआरएफ के पास अपनी शिकायत कर सकता है। ऐसी शिकायत सही पाए जाने पर बिजली कंपनी को संबंधित उपभोक्ता को 5000 रुपये या हर्जाने की पांच गुना राशि जो भी अधिक हो देनी होगी।
. अगर बिजली कटौती से उपभोक्ताओं का एक समूह प्रभावित होता है तो बिजली कंपनियों को ऐसे प्रभावित लोगों का अपने दस्तावेजों से पता लगाना होगा और ऐसे हर उपभोक्ता के सीए नंबर में निश्चित समय अवधि के भीतर हर्जाना देना होगा।