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दिल्ली सरकार के फॉर्मूले को दोबारा लागू करने और खर्चे पर एनजीटी ने उठाए सवाल

Thu, 12 May 2016 12:49 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Thu, 12 May 2016 12:49 AM IST
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Delhi government money spent on formula and raised the question NGT
एनजीटी

राजधानी में वायु प्रदूषण की रोकथाम के लिए दोबारा लागू की गई सम-विषम योजना पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने सवाल उठाए हैं। एनजीटी ने बुधवार को सुनवाई के दौरान तल्ख टिप्पणी में कहा कि दिल्ली सरकार ने जितना पैसा सम-विषम योजना के लिए खर्च किया यदि वायु प्रदूषण के अन्य स्रोतों पर खर्च किया होता तो शायद प्रदूषण पर रोकथाम की जा सकती है। 

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एनजीटी की यह टिप्पणी दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से पेश की गई रिपोर्ट के बाद आई। जस्टिस स्वतंत्र कुमार की अध्यक्षता वाली बेंच लगातार इस मामले की सुनवाई कर रही है। सुनवाई के दौरान दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (डीपीसीसी) के अधिकारी ने रिपोर्ट पेश की।
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रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली में सम-विषम योजना के पहले हफ्ते में प्रदूषण स्तर में कमी दर्ज की गई। वहीं दूसरे हफ्ते में बाहर से आने वाली तेज हवा और आसपास के राज्यों में जलाए गए फसल अवशेषों के कारण दिल्ली में प्रदूषण स्तर मेंबढ़ोतरी दर्ज की गई।

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‘सम-विषम के दौरान बढ़ा प्रदूषण’

Delhi government money spent on formula and raised the question NGT
सम-व‌िषम - फोटो : ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली

सुनवाई के दौरान डीपीसीसी ने कहा कि वह प्रदूषण संबंधित रिपोर्ट दो दिनों में ट्रिब्यूनल में जमा करेगी। वहीं बेंच ने सरकार से कई सवाल पूछे हैं। मसलन सम-विषम से पहले प्रदूषण स्तर क्या था और सम-विषम के दौरान और सम-विषम के बाद प्रदूषण स्तर में क्या फर्क पड़ा है। 10 साल और 15 साल पुराने वाहनों को सड़कों से हटाने के लिए क्या कदम उठाए हैं? वहीं वाहन से होने वाले प्रदूषण और अन्य स्रोतों से होने वाले प्रदूषण पर आपकी क्या राय है?

डीपीसीसी ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि उसने 6 अप्रैल से लेकर 6 मई तक दिल्ली के छह इलाकों में प्रदूषण स्तर दर्ज किया गया। इनमें आवासीय इलाकों में आरके पुरम, मंदिर मार्ग, पंजाबी बाग व व्यस्ततम इलाकों में सिविल लाइन, आइजीआई एयरपोर्ट, आनंद विहार को शामिल किया गया था। प्रदूषण स्तर मापने के लिए 6 रीयल टाइम मॉनिटरिंग स्टेशन थे। वहीं 74 स्थानों पर हाइटेक मोबाइल वैन भेजकर  प्रदूषण स्तर के आंकड़े रिकॉर्ड किए गए। 

डीपीसीसी के मुताबिक, पीएम 2.5 में 37 से 225 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर तक उतार-चढ़ाव दर्ज किया गया। वहीं, यह भी स्वीकार किया है कि हवाओं के चलते व आसपास के राज्यों में फसल अवशेष जलाने के साथ लैंडफिल साइट में आग लगने की घटनाओं से राजधानी की हवा प्रदूषित हुई।

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