नवजात को गोद में ले अस्पतालों के चक्कर लगाती रही मां, फिर AIIMS ने बचाई जान
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दिल्ली के सरकारी अस्पतालों की संवेदनहीनता सोमवार रात सामने आई। जब एक महिला नवजात को लेकर कैट्स एंबुलेंस से एक अस्पताल से दूसरे और फिर तीसरे अस्पताल के चक्कर काटने को मजबूर हुई।
आरोप है कि चाच नेहरू बाल चिकित्सालय और कलावती अस्पताल ने शिशु को दाखिल करने से इंकार कर दिया। पीड़ित परिवार ने पुलिस से भी मामले की शिकायत की है।
दरअसल, सोमवार शाम सोनिया विहार के नर्सिंग होम में एक नवजात का जन्म हुआ था। जिसके बाद शिशु की तबीयत बिगड़ने लगी। बच्चे को आईसीयू की जरूरत थी। नर्सिंग होम में आईसीयू सुविधा नहीं होने पर शिशु को चाचा नेहरू बाल चिकित्सालय ले जाने को कहा गया।
नवजात के पिता हेराम झा ने बताया कि जब वह अस्पताल पहुंचे तो शिशु को भर्ती करने से मना कर दिया। जहां से वह लेडी हॉर्डिंग के अंतर्गत आने वाले कलावती अस्पताल पहुंचे। वहां भी उन्हें निराशा हाथ लगी। तंग आकर उन्होंने पुलिस से शिकायत की। वहीं, दोनों अस्पतालों द्वारा मना किए जाने के बाद उन्होंने एम्स जाने का फैसला किया। जहां शिशु को दाखिल कर लिया गया।
तुरंत नर्सरी मुहैया कराना संभव नहीं
उधर, इस मामले में अस्पताल का पक्ष जानने के लिए चाचा नेहरू बाल चिकित्सालय के निदेशक डॉ. अनूप मोहता से बात की गई। उन्होंने बताया कि अस्पताल में कभी भी बच्चे को दाखिल करने से मना नहीं किया जाता। लेकिन, परिजन अस्पताल आते ही नर्सरी की मांग करते हैं जो तत्काल देना संभव नहीं है।
नर्सरी पहले से ही भरी होती है। लोगों की काफी वेटिंग होती है। तुरंत नर्सरी मुहैया कराना संभव नहीं होता है। परिजनों को कहा गया था कि वह बच्चे को सामान्य वार्ड में भर्ती कर लेंगे और जैसे ही नर्सरी में कोई जगह खाली होगी, वहां शिफ्ट कर दिया जाएगा।
परिजन नहीं माने और बच्चे को लेकर चले गए। वहीं, जब कलावती अस्पताल के निदेशक से बात की गई तो उनके ऑफिस कर्मी ने कहा कि अभी बात नहीं हो सकती।