रेहड़ी-पटरी और फेरीवालों को मिली रोजगार की अनुमति, सुबह 10 से रात 8 बजे तक कर सकते हैं काम
दिल्ली सरकार ने राजधानी में रेहड़ी-पटरी व फेरीवालों को अपने काम शुरू करने की इजाजत दे दी है। रोजाना सुबह 10 से रात 8 बजे तक यह लोग कोविड-19 के फैलाव से बचने के लिए सोशल डिस्टेंसिंग और दूसरे सभी एहतियाती कदम उठाकर अपना काम कर सकते हैं।
सोमवार को मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने बताया कि कोरोना महामारी और इसके क्रमिक लॉकडाउन ने बड़े पैमाने पर छोटे स्तर और व्यक्तिगत व्यावसाय को प्रभावित किया है। रेहड़ी पटरी विक्रेता सबसे अधिक प्रभावित समूहों में से एक थे। दिल्ली सरकार ने इनके काम का रास्ता खोल दिया है।
दिल्ली में रेहड़ी-पटरी वालों को लेकर कुछ असमंजस की स्थिति थी और उन्हें काम करने की अनुमति नहीं दी जा रही थी। इस संबंध में दिल्ली सरकार ने रेहड़ी-पटरी वालों के लिए विशेष आदेश जारी कर दिया है कि रेहड़ी पटरी वालों और हॉकर को भी अपना काम शुरू करने दिया जाएगा।
देश-दुनिया में हो रही दिल्ली मॉडल की चर्चा : केजरीवाल
मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल का दावा है कि दिल्ली के दो करोड़ लोगों की मेहनत, सूझबूझ और सावधानी की वजह से पिछले कुछ हफ्तों से कोरोना की स्थिति में कुछ सुधार हुआ है। आज दिल्ली मॉडल की चर्चा पूरे देश-दुनिया में हो रही है कि दिल्ली के लोगों ने मिलकर किस तरह से कोरोना को नियंत्रित किया है। एक तरफ जहां देश और दुनियाभर में कोरोना के केस लगातार बढ़ते जा रहे हैं। वहीं, दिल्ली में लगातार गिरावट आ रही है। दिल्ली में रिकवरी दर 88 प्रतिशत है। साथ ही अब केवल 9 प्रतिशत लोग बीमार हैं। मौतों का आंकड़ा 2 से 3 फीसदी के बीच है।
अरविंद केजरीवाल ने कहा कि सबसे बड़ी बात यह है कि दिल्ली में कोरोना से मरने वालों की संख्या में भारी गिरावट आई है। मसलन, कल केवल 21 लोगों की मौत हुई, जबकि जून में प्रतिदिन 100 से अधिक लोगों की मौत हो रही थी। अब प्रतिदिन 20 से 25 मौत हो रही हैं। पहले 100 लोगों का टेस्ट करते थे तो 35 लोग संक्रमित निकलते थे, लेकिन अब 100 लोगों का टेस्ट करते हैं तो केवल 5 लोग पॉजिटिव मिलते हैं। इस तरह पॉजिविटी औसत में भी काफी कमी आई है। इस समय दिल्ली के कोविड अस्पतालों में 15500 बेड का इंतजाम हैं, जिसमें से केवल 2800 मरीज अस्पतालों में हैं। अभी भी 12500 बेड खाली हैं।