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बस एक पार्टी पर भरोसा करते हैं दिल्ली वाले!

Tue, 11 Mar 2014 02:12 AM IST
Updated Tue, 11 Mar 2014 02:12 AM IST
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Delhi gives majority to any one party

अब तक हुए 15 लोकसभा चुनावों के दौरान अधिकांश बार दिल्ली के मतदाताओं ने बंटने के बजाए एक ही दल को अपना समर्थन दिया है। सात चुनावों में तो अलग-अलग दलों ने क्लीन स्वीप किया है, जबकि पांच बार विभिन्न दल महज एक सीट से क्लीन स्वीप करने से रह गए। तीन मौकों पर स्कोर 5-2 का रहा।

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पिछली बार जनता ने कांग्रेस में विश्वास जताया था जबकि भारतीय जनसंघ, भारतीय लोकदल व भाजपा के सिर भी जीत का सेहरा बंध चुका है। इस बार का चुनाव रोचक होगा। देखना होगा कि क्या इस बार भी यह परंपरा कायम रहेगी।
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दिल्ली में लोकसभा चुनाव में क्लीन स्वीप करने का सिलसिला वर्ष 1957 में शुरू हुआ था, तब कांग्रेस ने सभी सीटों पर जीत हासिल की थी। कांग्रेस ने 1962 में फिर यही सफलता दोहराई। वर्ष 1962 में पांचों सीटों पर कांग्रेस उम्मीदवार जीते थे। कांग्रेस ने वर्ष 1971, 1984 व 2009 के चुनाव में भी विपक्षी दलों का पूरी तरह से सफाया किया था।
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गजब के हैं ये आंकड़े

Delhi gives majority to any one party

1977 में भारतीय लोकदल (जनता पार्टी) ने कांग्रेस विरोधी लहर के दौरान क्लीन स्वीप किया। उस चुनाव में सभी सीटों पर कांग्रेस को करारी हार का सामना करना पड़ा था। इसी तरह वर्ष 1999 में एक बार फिर कांग्रेस का सफाया हुआ, तब भाजपा ने सभी सातों सीटों पर जीत हासिल की थी। कांग्रेस तीन बार विरोधियों का सफाया करने से रह गई।

वर्ष 1952 में चार में से तीन सांसद कांग्रेस के थे, जबकि 1980 व 2004 में कांग्रेस ने 6-6 सीटें जीती थीं। भारतीय जनसंघ व भाजपा भी दो बार क्लीन स्वीप करने से वंचित रह चुकी हैं। भारतीय जनसंघ ने वर्ष 1967 में छह सीटों पर जीत हासिल करके कांग्रेस के होश उड़ा दिए थे, क्योंकि पहली बार कांग्रेस को इतनी बड़ी हार का सामना करना पड़ा था।

वहीं, भाजपा ने वर्ष 1998 में छह सीटें जीती थी। भाजपा तीन अन्य चुनाव में भी सफाया करने के करीब रही। वर्ष 1989 में भाजपा ने जनता दल के साथ मिलकर लड़े चुनाव में पांच सीटों पर जीत हासिल की थी जबकि वर्ष 1991 व 1996 में भाजपा पांच-पांच सीटें जीतने में कामयाब रही थी।

हैरत में डाल देंगे ये स्कोर

Delhi gives majority to any one party

वर्ष 1957 में कांग्रेस ने 5-0 से, 1962 में फिर कांग्रेस 5-0 से, 1971 एक फिर से कांग्रेस ने ही 7-0 से क्लीन श्वीप किया। उसके बाद 1977 में भालोद ने पहली बार कांग्रेस को जबर्दस्त झटका दिया और 7-0 से मात दी।


इसके बाद 1984 में कांग्रेस फिर से कांग्रेस ने खोया हुआ जनाधार वापस पाया और 7-0 से जीत दर्ज की। 1999 में भाजपा ने 7-0 से जोरदार दस्तक दी। लेकिन 2009 में फिर कांग्रेस ने 7-0 वापसी कर ली।

वहीं 1952 में    कांग्रेस-3 और किसान मजदूर प्रजातांत्रिक पार्टी ने 1 सीट जीती थी। 1967 में भारतीय जनसंघ ने 6 कांग्रेस ने 1 सीट जीती थी। 1980 में कांग्रेस-6, भाजपा-1, 1998 में भाजपा-6 कांग्रेस-1, 2004 में कांग्रेस-6 और भाजपा ने 1 सीट जीती थी।

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