Delhi : दिल्ली विश्वविद्यालय के पूर्व प्रोफेसर साईबाबा का निधन, पुलिस का संदेह जीवन पर पड़ा भारी
इस साल मार्च में बॉम्बे हाईकोर्ट ने साईबाबा को माओवादी संबंधों को लेकर यूएपीए मामले में आरोप मुक्त कर दिया था। इसके पहले उन्होंने 10 वर्षों तक मुकदमे का सामना किया था। साईबाबा कई बीमारियों से जूझ रहे थे।
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दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू)के पूर्व प्रो. जीएन साईबाबा (57) का हैदराबाद में निधन हो गया। इस साल मार्च में बॉम्बे हाईकोर्ट ने साईबाबा को माओवादी संबंधों को लेकर यूएपीए मामले में आरोप मुक्त कर दिया था। इसके पहले उन्होंने 10 वर्षों तक मुकदमे का सामना किया था। साईबाबा कई बीमारियों से जूझ रहे थे। साईबाबा डीयू के राम लाल आनंद कॉलेज में अंग्रेजी के प्रोफेसर थे। महाराष्ट्र पुलिस ने संदिग्ध माओवादी संबंधों में गिरफ्तार किया था। इसके बाद उन्हें 2014 में कॉलेज ने निलंबित कर दिया था।
जेल अधिकारियों पर लगाए थे गंभीर आरोप
प्रोफेसर साईबाबा पिछले काफी समय से किडनी, ह्रदय व पेट संबंधी विभिन्न बीमारियों से जूझ रहे थे। उन्होंने नागपुर सेंट्रल जेल अधिकारियों पर इलाज न कराने के गंभीर आरोप भी लगाए थे।
साईबाबा ने बीते अगस्त में आरोप लगाया था कि शरीर का बायां हिस्सा लकवाग्रस्त हो जाने के बावजूद जेल अधिकारी उन्हें नौ महीने तक अस्पताल नहीं ले गए और उन्हें नागपुर सेंट्रल जेल में सिर्फ दर्द निवारक दवाएं दी गईं, जहां वह गिरफ्तारी के बाद से बंद थे। इसके चलते उनकी स्थिति और बिगड़ गई।
साईबाबा पिछले 20 दिनों से हैदराबाद के निजाम इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (निम्स) में भर्ती थे। 2014 में पूर्व अंग्रेजी प्रोफेसर ने दावा किया था कि उनकी आवाज को दबाने के लिए पुलिस ने पहले तो उनका अपहरण किया और फिर उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। आंध्र प्रदेश के मूल निवासी साईबाबा ने कहा था कि उन्हें अधिकारियों ने चेतावनी दी थी कि अगर उन्होंने माओवादियों से संपर्क खत्म नहीं किया तो उन्हें किसी झूठे मामले में गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
#WATCH | Hyderabad, Telangana: Former Delhi University professor G N Saibaba's brother Dr Ramdev says, "So NIMS doctors declared his death at 8:36 pm today because of many ailments. He had his gallbladder surgery in NIMS. The surgery was successful and he was able to talk to us… pic.twitter.com/JJux6xdI4P
— ANI (@ANI) October 12, 2024
उन्होंने दावा किया था कि महाराष्ट्र पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी एक जांच अधिकारी के साथ उनके घर गए थे और उन्हें और उनके परिवार को धमकी दी थी। साईबाबा ने यह भी आरोप लगाया था कि गिरफ्तारी के दौरान महाराष्ट्र पुलिस ने उन्हें व्हीलचेयर से खींच लिया, जिसके परिणामस्वरूप, उनके हाथ में गंभीर चोट लगी और इसका उनके तंत्रिका तंत्र पर गंभीर प्रभाव पड़ा। साईबाबा जेल से रिहा होने के बाद व्हीलचेयर पर जब बाहर आए थे तभी से उनके गंभीर रूप से बीमार होने की बात कही जा रही थी।