दिल्ली के पहले कोरोना संक्रमित मरीज ने कहा- मैंने कोरोना को हराया, फिर क्यूं घबराना...
मैं रोहित दत्ता दिल्ली का पहला कोरोना पॉजीटिव हूं। मैंने कोरोना को हरा दिया। मैं आज अपने पूरे परिवार के साथ हूं। शुरूआत में मुझे परेशानी हुई थी लेकिन एक से दो दिन बाद मैं और मेरा परिवार कोरोना से जंग लड़ने को मानसिक रुप से तैयार हो चुके थे। अब देखो...सबकुछ ठीक हो गया। मुझे नहीं लगता कि लोगों को कोरोना से घबराने की जरूरत है। हां सतर्कता अगर बरती जाए तो इस संक्रमण से खुद को दूर रखा जा सकता है।
उन्होने कहा कि हम सभी घर पर रहकर नियमों का पालन कर रहे हैं। मैं कोरोना पॉजीटिव था, लेकिन मेरे घर का और कोई सदस्य संक्रमित नहीं हुआ। इसके पीछे एक ही वजह थी नियमों का सख्ती से पालन। ये जरूर है कि आज पूरे देश में कोरोना को लेकर भय का माहौल बना हुआ है लेकिन मुझे ये सब बेवजह लगता है।
सफदरजंग अस्पताल से घर आए मुझे करीब एक महीना होने को आया। वहां मैं हर दिन फोन पर अपने परिवार से वीडियो चैट करता था। पता नहीं क्यूं लोग जांच कराने से घबरा रहे हैं। जबकि मैं जब अपने दो साथी के साथ वापस भारत आया था तो एक डॉक्टर की सलाह पर ही आरएमएल अस्पताल जांच कराने के लिए गया था। उस दौरान कोरोना का काफी पैनिक था लेकिन अस्पताल पहुंचने के बाद मेरे अंदर से पूरा डर चला गया।
मैं लोगों से यही अपील करूंगा कि आप घबराएं नहीं, घर पर रहें। आपस में दूरी बनाएं रखें, सात्विक दिनचर्या का पालन करें। जो लोग संक्रमित हैं उनसे मैं बस यही कहना चाहूंगा कि आप संयम बरतें। आप जितना शांत रहेंगे उतनी ही मजबूती से लड़ सकेंगे।
हिम्मत और डॉक्टरों की मेहनत से मिली नई जिंदगी
मेरे पास बहुत शब्द तो नहीं हैं लेकिन हां इतना जरूर है कि मैंने कोरोना वायरस को अपनी हिम्मत और डॉक्टरों की मेहनत से हरा दिया। इसी की बदौलत मुझे नई जिंदगी मिली है। मैं 73 वर्षीय मनमोहन सिंह दिल्ली का ही पहला कोरोना संक्रमित बुजुर्ग हूं जो अब स्वस्थ्य होकर घर आ चुका है। मैं अब पूरी तरह से ठीक हूं। यह मेरी नई जिंदगी है, इससे ज्यादा मैं और कुछ नहीं कह सकता।
लोगों को एक बात समझने की जरूरत है कोरोना वायरस बुजुर्गों के लिए खतरा बन सकता है लेकिन वो भी स्वस्थ्य हैं। एक ऐसी बीमारी जिसका न इलाज है और न दवा। फिर भी इंसान ठीक हो रहा है तो उसमें सबसे बड़ी वजह है आपका हौसला। आपका अगर हौसला कमजोर होगा तो इस जंग को कैसे जीत पाएंगे। पूरी दुनिया महामारी युद्घ लड़ रही है। मैंने अपने जीवन में पहले कभी ऐसा अदृश्य दुश्मन से युद्ध नहीं देखा।
भगवान ने अब दिखाया है तो मुझे उसे हराने का मौका भी मिल गया। हमारे डॉक्टरों पर पूरा भरोसा रखें, सरकार पर विश्वास रखें। खुद सतर्कता बरतें। मुझे डॉक्टर ने जो भी सलाह दी हैं उनका मैं और मेरा पूरा परिवार ख्याल रख रहा है। हम घर में भी सोशल डिस्टैसिंग के नियमों का पालन कर रहे हैं।