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Delhi : एआई से होगी आंखों के रोग की पहचान और स्टेम सेल से सटीक इलाज, स्वास्थ्य कर्मी भी कर सकेंगे जांच
Sat, 08 Mar 2025 04:43 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Sat, 08 Mar 2025 04:43 AM IST
सार
अब कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) की मदद से रोगों का इलाज आसान होगा। वहीं स्टेम सेल की मदद से गंभीर रोग सहित खोती रोशनी भी वापस आ सकेगी।
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जांच के लिए एआई एल्गोरिदम विकसित किया।
- फोटो : freepik.com
विस्तार
खराब होती जीवन शैली सहित अन्य कारणों से आंखों में बढ़ते रोगों के इलाज के लिए एम्स नई तकनीक विकसित कर रहा है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) की मदद से रोगों का इलाज आसान होगा। वहीं स्टेम सेल की मदद से गंभीर रोग सहित खोती रोशनी भी वापस आ सकेगी।
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शुक्रवार को एम्स के डॉ. राजेंद्र प्रसाद नेत्र विज्ञान केंद्र ने 58वां स्थापना दिवस मनाया। इस मौके पर सेंटर की प्रमुख डॉ.राधिका टंडन ने बताया कि मधुमेह रेटिनोपैथी की जल्द पहचान और जांच के लिए एआई एल्गोरिदम विकसित किया। इसे वाधवानी एआई और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के सहयोग से विकसित किया गया है। इस एल्गोरिदम को मान्य कर दिया गया है। साथ ही एम्स के सामुदायिक आउटरीच केंद्रों में परीक्षण के लिए तैनाती की जा रही है।
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वहीं प्रोफेसर राजपाल ने बताया कि देश में पहली बार स्वदेशी रूप से विकसित रेटिना पिगमेंट एपिथेलियम स्टेम कोशिकाओं को इंजेक्ट किया है। अभी तक एम्स में चार सहित नौ मरीजों पर इसका परीक्षण किया गया। यह अध्ययन पहले चरण में है। इसका परिणाम बेहतर मिल रहा है।
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स्वास्थ्य कर्मी भी कर सकेंगे जांच
एम्स के विशेषज्ञों ने कॉर्नियल अपारदर्शिता की सामुदायिक जांच, कॉर्नियल प्रत्यारोपण सर्जरी के लिए रेफरल को बेहतर बनाने के लिए नया स्मार्ट फोन छवि-आधारित एआई सिस्टम विकसित किया है। इसका उपयोग सामुदायिक स्तर पर स्वास्थ्य सेवा कर्मी कर सकेंगे। इसका इस्तेमाल वंचित आबादी को दृष्टि-पुनर्स्थापन हस्तक्षेपों से जोड़ने के लिए किया जा सकता है। इसके परिणाम बेहतर मिले हैं। इसके अलावा सेंटर कॉर्नेट के नए केराटोप्रोस्थेसिस की खोज कर रहा है, जो अंतिम चरण के कॉर्नियल रोग के उपचार में मददगार होगा।
खराब जीवन शैली दे सकती है ग्लूकोमा
ग्लूकोमा के लिए खराब जीवन शैली, तनाव सहित दूसरे कारण भी पाए गए हैं। इसके अलावा नेत्र जैव रसायन विभाग ने ग्लूकोमा के प्रबंधन में औषधीय पौधे आधारित फॉर्मूलेशन के महत्वपूर्ण परिणाम पाए हैं। ओकुलर ऑन्कोलॉजी सेवा ने नेत्र कैंसर के इलाज के लिए सेवा दी। यह केंद्र देश में कोरोइडल मेलेनोमा के लिए गामा नाइफ रेडियोसर्जरी शुरू करने वाला पहला केंद्र था। केंद्र ने बच्चों में पाए जाने वाले नेत्र कैंसर रेटिनोब्लास्टोमा के उपचार के लिए एक स्वदेशी बाल चिकित्सा रूथेनियम पट्टिका शुरू की है।
ड्रोन चालित परिवहन की संभावनाओं की खोज
एम्स का आरपी सेंटर भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद के साथ मिलकर दूरदराज के क्षेत्रों में ड्रोन की मदद से इलाज देने की तलाश कर रहा है। ड्रोन की मदद से चिकित्सा रसद को बढ़ाकर, आपातकालीन प्रतिक्रिया में सुधार करके, टेलीमेडिसिन का विस्तार करके और सार्वजनिक स्वास्थ्य पहल को बेहतर बनाने की दिशा में काम कर रहा है। रसद संबंधी बाधाओं को पार करके, ड्रोन जीवन बचाने और स्वास्थ्य सेवा के भविष्य को आकार देने में मदद कर रहे हैं।