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केजरीवाल बाइज्जत बरी: 598 पेज के आदेश में कोर्ट ने क्या कहा? जज ने CBI अधिकारियों पर ही कर दी कार्रवाई की बात

Fri, 27 Feb 2026 07:41 PM IST
विकास कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: विकास कुमार Updated Fri, 27 Feb 2026 07:41 PM IST
सार

एक दिलचस्प टिप्पणी में जज ने कहा, 'जब आप किसी फाइल को बहुत गहराई से और बार-बार पढ़ते हैं, तो फाइलें आपसे बात करने लगती हैं।' इसका इशारा चार्जशीट की विसंगतियों की ओर था, जहां हजारों पन्नों में कोई ठोस सबूत नहीं मिला।

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Delhi Excise Policy Case What court say in 598-page order judge talked about taking action against CBI
अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया को कोर्ट ने किया बरी - फोटो : PTI

विस्तार

दिल्ली एक्साइज पॉलिसी घोटाले में राउज एवेन्यू कोर्ट ने सीबीआई की हजारों पन्नों की चार्जशीट को पूरी तरह खारिज कर दिया। स्पेशल जज जितेंद्र सिंह ने 598 पेज के अपने विस्तृत आदेश में कहा कि मुख्य चार्जशीट (24 नवंबर 2022) और चार पूरक चार्जशीटों में अपराध का एक भी ठोस सबूत नहीं है। अदालत ने सीबीआई जांच को विरोधाभासी और हेरफेर से भरी बताते हुए जांच अधिकारियों पर कार्रवाई की सिफारिश की। जज ने सीबीआई की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि दस्तावेज गवाहों के बयानों से मेल नहीं खाते, अभियोजन पक्ष आरोप साबित करने में पूरी तरह विफल रहा, और कोई आपराधिक साजिश का साक्ष्य नहीं मिला। इस फैसले ने केंद्रीय एजेंसियों की निष्पक्षता पर गंभीर बहस छेड़ दी है।

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पेश तथ्य गवाहों के बयानों से मेल नहीं खाते
जज सिंह ने सुनवाई के दौरान एजेंसी पर कई बार नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि चार्जशीट में काफी विरोधाभास हैं। हजारों पेजों में पेश तथ्य गवाहों के बयानों से मेल नहीं खाते। फैसले में जेल में बिताए समय पर भी टिप्पणी की गई। अदालत ने नोट किया कि मनीष सिसोदिया करीब 530 दिन जेल में रहे, जबकि अरविंद केजरीवाल दो बार के अंतराल में 156 दिन हिरासत में थे। केजरीवाल को 13 सितंबर 2024 को सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई मामले में जमानत दी थी। जज ने सुनवाई के दौरान सीबीआई की चार्जशीट पर सवाल उठाते हुए कहा कि प्रस्तुत दस्तावेज चार्जशीट से मेल नहीं खाते। आरोप तय करने पर 12 फरवरी 2026 को फैसला सुरक्षित रखा गया था।

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साउथ ग्रुप शब्द के इस्तेमाल पर अदालत नाराज
अदालत ने सीबीआई द्वारा 'साउथ ग्रुप' जैसे शब्दों के इस्तेमाल पर कड़ी नाराजगी जताई। जज ने पूछा, अगर जांच एजेंसी यही चार्जशीट चेन्नई में फाइल करती तो क्या साउथ ग्रुप लिखती? किसने ये शब्द बनाया? एजेंसी के वकील ने सफाई दी कि यह आरोपियों के लिए साझा शब्द था, लेकिन जज ने अमेरिका के एक केस का हवाला देते हुए कहा कि 'डोमिनिक ग्रुप' जैसे शब्द के इस्तेमाल से केस खारिज हो गया था। उन्होंने माना कि 'साउथ ग्रुप' जैसे शब्दों का इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए था, क्योंकि यह पूर्वाग्रहपूर्ण लगता है।

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केजरीवाल का नाम एफआईआर में नहीं राजनीतिक विद्वेष के लिए जोड़ा गया नाम- एन हरिहरन
सुनवाई के दौरान केजरीवाल की ओर से वरिष्ठ वकील एन हरिहरन ने दलील दी कि उनके खिलाफ कोई पुख्ता सबूत नहीं है। हरिहरन ने कहा, केजरीवाल सरकारी काम कर रहे थे। कोई साक्ष्य नहीं कि उन्होंने साउथ लॉबी से पैसे मांगे। उनका नाम पहले तीन चार्जशीट में नहीं था, चौथे पूरक में जोड़ा गया। जज ने सीबीआई की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए 'कन्फेशनल स्टेटमेंट' पर नाराजगी जताई। जब सीबीआई ने कहा कि बयान 'सील कवर' में है, तो जज बिफर पड़े, मुझे अभी तक कॉपी नहीं दी गई। मैं जांच एजेंसी के वकीलों से पूरी ईमानदारी की उम्मीद करता हूं।

हजारों पन्नों में कोई ठोस सबूत नहीं मिला
एक दिलचस्प टिप्पणी में जज ने कहा, 'जब आप किसी फाइल को बहुत गहराई से और बार-बार पढ़ते हैं, तो फाइलें आपसे बात करने लगती हैं।' इसका इशारा चार्जशीट की विसंगतियों की ओर था, जहां हजारों पन्नों में कोई ठोस सबूत नहीं मिला। सीबीआई ने आरोप लगाया था कि एक्साइज पॉलिसी 2021-22 में पब्लिक सर्वेंट्स और प्राइवेट व्यक्तियों ने साजिश रची, लेकिन अदालत ने इसे 'अनुमान-आधारित' बताया।

टाइम लाइन
20.07.2022 एलजी की शिकायत            सीबीआई जांच की सिफारिश।
17.08.2022 एफआईआर दर्ज:             RC0032022A0053, CBI/ACB, दिल्ली।
24.11.2022 (फाइल 25.11.2022) मुख्य चार्जशीट: A-1 से A-7 के खिलाफ।
25.04.2023 पहली सप्लीमेंट्री चार्जशीट:             A-8 से A-11 के खिलाफ।
08.07.2023 (फाइल 10.07.2023) दूसरी सप्लीमेंट्री चार्जशीट: A-12 से A-16 के खिलाफ।
06.06.2024 (फाइल 07.06.2024) तीसरी सप्लीमेंट्री चार्जशीट: A-17 के खिलाफ।
29.07.2024 (फाइल 30.07.2024) चौथी सप्लीमेंट्री चार्जशीट: A-18 से A-23 के खिलाफ।
12.02.2026 ऑर्डर ऑन चार्ज सुरक्षित।
27.02.2026 ऑर्डर ऑन चार्ज में सभी आरोपी बरी।

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