दिल्ली के घमासान पर पूर्व मुख्यमंत्री ने सुझाया हल
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दिल्ली में केंद्र सरकार, उपराज्यपाल और दिल्ली सरकार के बीच चल रही खींचतान पर कांग्रेस की वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि इस पूरे मामले से ऐसा लगता है कि सरकार चलाने की जगह विवाद को बढ़ाने पर ज्यादा ध्यान दिया जा रहा है।
दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने कहा कि एलजी और सरकार के बीच जो भी विवाद फिलहाल चल रहा है असल में वह एक संवैधानिक मामला है जिसे कानूनी ढंग से सुलझाया जा सकता है। इस पर विवाद पैदा करने से कोई समाधान नहीं निकलने वाला है।
उन्होंने कहा कि हमने भी 15 साल दिल्ली में सरकार चलाई और इस दौरान ऐसा कोई विवाद या परेशानी पैदा नहीं हुई। हालांकि उन्होंने माना कि दिल्ली में पुलिस और भूमि से लेकर कई ऐसे क्षेत्र हैं जहां दिल्ली सरकार का नियंत्रण नहीं है। लेकिन इन मामलों को भी एलजी या गृहमंत्रालय से बातचीत करके सुलझाया जा सकता है।
गृहमंत्रालय के नोटिफिकेशन पर शीला दीक्षित ने कहा कि इस पर जो लांक्षन लगाया जा रहा है वह पूरी तरह से बेबुनियाद है। केंद्र सरकार की ओर से जो भी निर्देश आए हैं उनका कानूनी आधार होता है जिसे गलत कह कर खारिज नहीं किया जा सकता।
क्या है समाधान
दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि दिल्ली में फिलहाल जो विवाद है उससे ऐसा लगता है कि मामले को सुलझाने की जगह विवाद को बढ़ाने की कोशिश ज्यादा की जा रही है। जबकि जनता ने आम आदमी पार्टी को इतना बड़ा बहुमत दिया है और यह बहुमत काम करने के लिए दिया गया है।
उन्होंने कहा कि यह समझने की जरूरत है कि दिल्ली कोई पूर्ण राज्य नहीं है और यहां की सरकार के पास कुछ मामलों में सीमित शक्ति है। असल में यह संवैधानिक मामला है जिसे संविधान में संशोधन करके सुलझाया जा सकता है।
सरकार को विवाद करने की जगह उसे इस ढंग से सुलझाने की कोशिश करनी चाहिए क्योंकि विवाद पैदा करने से संवैधानिक स्थिती में कोई परिवर्तन नहीं होने वाला है। शीला दीक्षित ने कहा कि दिल्ली में सरकार चलाने में कई बार उन्हें भी इन परेशानियों से गुजरना पड़ा लेकिन इसके समाधान के लिए उन्होंने कोई विवाद पैदा नहीं किया बल्कि एलजी या केंद्र सरकार से मिल कर और बातचीत करके उसे सुलझाने की कोशिश की।
उन्होंने कहा कि जनता अपनी परेशानियों के लिए आखिर में सरकार और उसके मंत्रियों के पास ही आती है। वह एलजी या केंद्र सरकार के पास नहीं जाएगी। इसलिए उन्हें जो अधिकार प्राप्त हैं उनका इस्तेमाल करते हुए जनता की सेवा करने की कोशिश करनी चाहिए।