8 कारण, जिन्होंने बदल दी देश की राजनीति की दिशा
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हाल के दो ओपिनियन पोल ने साफ संकेत कर दिया है कि दिल्ली के चुनाव में आम आदमी पार्टी तेजी से मजबूत हो रही है। एबीपी न्यूज नेल्सन सर्वे में आप को 35 सीटें दी गईं हैं।
जबकि इकोनॉमिक्स टाइम्स टीएनएस पोल सर्वे में आप को 36 से 40 के बीच सीट मिलने का अनुमान व्यक्त किया गया है। इन दोनों ही सर्वे में जहां बीजेपी दूसरे नंबर पर है वहीं कांग्रेस अभी से ही लड़ाई से बाहर दिख रही है।
चुनाव में जीत किसकी होगी इसका फैसला तो दस फरवरी को ही होगा लेकिन ताजा सर्वे दिल्ली और देश की राजीति में आने वाले कुछ बदलावों की ओर साफ संकेत कर रहे हैं।
आप बन रही नया राजनीतिक विकल्प
पहला संकेत, लोकसभा चुनाव की तरह ही दिल्ली का चुनाव भी मुद्दों से ज्यादा व्यक्ति केंद्रित है। अभी तक का पूरा चुनावी गणित किरण बेदी अरविंद केजरीवाल नरेंद्र मोदी और अजय माकन के बीच ही सीमट हुआ दिखाई दे रहा है।
दूसरा संकेत, दिल्ली चुनाव में आप के दखल ने भारतीय राजनीति में एक नये दल के उदय का संकेत दे दिया है। यह उदय दो मामलों में खास है। पहला यह कि दिल्ली में अल्पसंख्यक वोटर जो कांग्रेस से असंतुष्ट हैं वो आप की तरफ बढ़ रहे हैं। दूसरा कि कांग्रेस को लगातार मिल रही असफलता के बाद आप धर्मनिरपेक्ष खेमे में आई रिक्तता को भरती दिखाई दे रही है।
आप के साथ अच्छी बात यह है कि यह किसी खास विचारधारा के बजाय जनता की समस्याओं के साथ जुड़ी पार्टी बनने का दावा करती है।
व्यक्तित्व आधारित हुआ चुनाव
तीसरा, अब तक के चुनाव आमतौर पर वामपंथ, दक्षिणपंथ के बीच लड़ाई तक सीमित थे जो अब व्यक्तित्व आधारित लड़ाई में तब्दील होते जा रहे हैं।
यह बात आम चुनाव में ही दिख गई थी कि एक खास विचाराधारा पर आधारित पार्टी होने के बावजूद नरेंद्र मोदी के व्यक्तित्व पर ही पूरा चुनाव लड़ा गया।
खुद केजरीवाल भी यह बात कह चुके हैं कि लेफ्ट-राइट की जगह हमारा ध्यान लोगों की समस्याओं और उनके समाधान पर है।
कांग्रेस हुई दौड़ से बाहर
चौथा संकेत, दिल्ली का चुनाव दो विपरीत व्यक्तित्वों की राजनीति में स्वीकार्यता की भी शुरुआत कर रहा है। एक तरफ नरेंद्र मोदी हैं जो शीर्ष पर हैं और क्षमता तथा करिश्मा का तालमेल रखते हैं जबकि दूसरी ओर अरविंद केजरीवाल अपने पहनावे से लेकर मुद्दों के जरिए लोगों को ऐसा एहसास कराते हैं कि वह उन्हीं के बीच का कोई आम आदमी है।
छठवां संकेत, अब तक के सभी चुनावों के केंद्र में कांग्रेस पार्टी रही जबकि विपक्ष की पूरी राजनीति कांग्रेस के विरोध के आस पास घुमती थी। इस चुनाव में कांग्रेस लड़ाई से बाहर हो चुकी है।
जबकि अब मजबूत संगठन और काडर वाली पार्टी बीजेपी केंद्र में आ गई है और कांग्रेस के विकल्प के तौर पर राज्यों की राजनीति में आप दिल्ली के लोगों को एक नया विकल्प पेश कर रही है।
धर्म, जाति और क्षेत्रियता के मुद्दे हुए गायब
सातवां, अब तक राज्यों में राजनीति मुख्यतः धर्म, जाति और क्षेत्रियता के इर्द गिर्द घुमती थी। युवा वोटरों की बढ़ती संख्या ने इस तरह की राजनीति को खारिज कर दिया है।
लोकसभा चुनाव के बाद राज्यों में हुए चुनावों में भी इस तरह का रूझान देखने में आया है। दिल्ली में आम आदमी पार्टी ने राज्यों में वैकल्पिक राजनीति का एक ऐसा विकल्प पेश किया है जो जाति, धर्म जैसे मुद्दों से हटकर अपनी राजनीतिक साख बना रही है।
अमीर गरीब के बीच हो रही जंग
आठवां, दिल्ली चुनाव ने राजनीति में उभरते एक नए समीकरण का भी संकते किया है। जाति, धर्म की जगह राजनीति अब वर्गों यानि गरीब और अमीर के बीच सिमट गई है।
हाल के सर्वेक्षण इस बात की ओर इशारा हैं कि केजरीवाल को युवा, एससी, ओबीसी, एसटी और मुसलमान सभी का समर्थन मिला है।
चौंकाने वाली बात ये है कि जाति धर्म की जगह वर्गों की राजनीति की शुरुआत होने के बावजूद वामपंथी पार्टियां अभी भी हासिए पर हैं।