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Delhi Election 2025: जातीय और सामुदायिक समीकरण साधने की जंग... आप के इस दांव ने दिलचस्प बनाया सियासी माहौल

Tue, 21 Jan 2025 10:10 AM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, दिल्ली Published by: शाहरुख खान Updated Tue, 21 Jan 2025 10:10 AM IST
सार

Delhi Assembly Election 2025: दिल्ली में जातीय और सामुदायिक समीकरण साधने की जंग चल रही है। विधानसभा चुनाव में तीनों दलों ने वोट बैंक को साधने के लिए रणनीति बनाई है। चुनाव परिणाम यह तय करेंगे कि जातीय दांव का यह खेल किस पार्टी के लिए जीत की कुंजी बनेगा। 

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Delhi Election 2025 battle to balance caste and community equations three parties made strategies
Delhi Election 2025 - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

दिल्ली की राजनीतिक बिसात पर इस बार जातीय समीकरणों का खेल अपने चरम पर है। भाजपा, कांग्रेस और आप ने जाति और समुदायों को टिकट बंटवारे की बाजीगरी से न सिर्फ अपने परंपरागत वोट बैंक को साधने की कोशिश की है, बल्कि विरोधी खेमों में सेंध लगाने के लिए नए समीकरण भी बनाए हैं।
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यह चुनाव जातीय समीकरणों, परंपरागत वोट बैंक और नए समुदायों को साधने की सियासत का अखाड़ा बन गया है। भाजपा अपनी गहरी जड़ों और राष्ट्रीय चेहरे पर दांव लगा रही है तो आप काम की राजनीति और बहुजातीय संतुलन के सहारे मैदान में है। 
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कांग्रेस अपने परंपरागत और अल्पसंख्यक वोट बैंक के भरोसे वापसी की उम्मीद कर रही है। लिहाजा चुनाव परिणाम यह तय करेंगे कि जातीय दांव का यह खेल किस पार्टी के लिए जीत की कुंजी बनेगा। इतना तय है कि दिल्ली का यह चुनाव महज सत्ता की जंग नहीं, बल्कि नई राजनीतिक ध्रुवीकरण की कहानी लिखने वाला साबित होगा।
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आप की चाल
बहुजातीय समाज का हर वर्ग साधा

सबका साथ, सबका टिकट की तर्ज पर आम आदमी पार्टी ने अपने वैश्य और पूर्वांचली वोट बैंक को सुरक्षित रखने के लिए सबसे अधिक उम्मीदवार उतारे हैं। साथ ही, पार्टी ने जाट और गुर्जर समुदायों पर भी दांव खेलते उनके कई नेताओं को उम्मीदवार बनाया है। उसकी यह रणनीति भाजपा के परंपरागत वोट बैंक को तोड़ने और बहुजातीय संतुलन बनाने का प्रयास है। इस तरह आप की इस चाल ने सियासी माहौल को और दिलचस्प बना दिया है।
 

भाजपा की बाजीगरी
परंपरागत ताकत और नए समीकरण

भाजपा ने अपने मजबूत गढ़ जाट, ब्राह्मण, पंजाबी समुदायों पर भरोसा जताते हुए इनसे काफी उम्मीदवार उतारे हैं। लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती। पार्टी ने वैश्य, पूर्वांचली और उत्तराखंडी समुदायों में भी सेंध लगाने का प्रयास किया है। खास बात यह है कि भाजपा ने मुस्लिम समुदाय से कोई उम्मीदवार नहीं उतारा।

कांग्रेस का खेल  
अल्पसंख्यक और परंपरागत वोट बैंक पर फोकस

कांग्रेस ने जातीय और सामुदायिक समीकरणों को साधने में अपनी पुरानी पहचान को मजबूत करने की कोशिश की है। जाट और ब्राह्मण समुदायों से अधिक उम्मीदवार उतारकर उसने अपने कोर वोट बैंक को साधा है। मुस्लिम समुदाय से अन्य पार्टियों से अधिक उम्मीदवार उतारकर कांग्रेस ने अल्पसंख्यक वोटों को रिझाने का दांव खेला है। पंजाबी और गुर्जर समुदायों को भी प्रमुखता देकर कांग्रेस ने संकेत दिया है कि वह जातीय राजनीति के खेल में पीछे नहीं रहने वाली।
 

मुस्लिम और अनुसूचित जाति का समीकरण
इस चुनाव में अल्पसंख्यक समुदाय भी प्रमुख मुद्दा बना है। कांग्रेस ने सात और आप ने पांच मुस्लिम उम्मीदवार उतारकर इस वर्ग को साधने की कोशिश की, जबकि भाजपा ने एक भी मुस्लिम उम्मीदवार नहीं उतारा। अनुसूचित जाति की 12 आरक्षित सीटों पर भाजपा ने 15 उम्मीदवार उतारे हैं, जो इस वर्ग पर उसकी आक्रामक पकड़ दर्शाता है। कांग्रेस व आप ने 13-13 उम्मीदवारों को टिकट दे समीकरण साधे हैं।
 

अलग-अलग वर्गों को बांटे गए टिकट का ब्योरा
जाति/पार्टी  आप      भाजपा       कांग्रेस
एससी   13     15     13
जाट    7      11     11
वैश्य  8      10     5
ब्राह्मण     4      9      8
गुर्जर       7      5      7
पूर्वांचली   12    6      3
पंजाबी      2     5      7
मुस्लिम      5      -      7
सिख    4      3      4
राजपूत       5      2      1
यादव   3      2      3
त्यागी      2      -      1
उत्तराखंडी   -      2      -
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