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Delhi : जिंदगी खोकर भी आठ लोगों को नया जीवन दे गए सौरभ और वह महिला, एम्स में पहली बार एक साथ हुए दो अंगदान

Wed, 22 May 2024 05:55 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Wed, 22 May 2024 05:55 AM IST
सार

डॉ. फारूक ने बताया कि अंगदान करने वाली महिला के परिवारीजनों ने मृतका का नाम पता उजागर करने से इंकार कर दिया है।

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Delhi: Despite losing their lives, Saurabh and a woman gave new life to eight people
Delhi AIIMS - फोटो : ANI

विस्तार

सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल हुए सौरभ और 42 साल की महिला ने जिंदगी खोकर भी आठ लोगों को नया जीवन दे दिया। दोनों मरीजों को 15 मई को एम्स के ट्रामा सेंटर में इलाज के लिए लाया गया था। दोनों के सिर में गंभीर रूप से चोट लगी थी। 18 मई को दोनों मरीजों ने उपचार के दौरान दम तोड़ दिया। ब्रेन डेड घोषित होने के बाद परिवार की सहमति से एम्स ट्रामा सेंटर में पहली बार एक साथ दो मरीजों ने अंगदान किया। इस अंगदान के लिए एम्स ट्रामा सेंटर में दो नियमित ऑपरेशन थियेटर को बंद करना पड़ा।

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एम्स ट्रामा सेंटर के प्रमुख डॉ कामरान फारूक ने बताया कि राजस्थान निवासी 42 साल की महिला और पलवल के 27 साल के सौरभ को 15 मई को एम्स ट्रामा सेंटर लाया गया। सड़क दुर्घटना में दोनों के सिर में गंभीर चोट लगी। दोनों का उपचार चला, लेकिन उनकी जान नहीं बच सकी और डॉक्टरों ने उन्हें ब्रेन डेड घोषित कर दिया। डॉक्टरों ने परिवार से बात कर अंगदान करने के लिए प्रोत्साहित किया। परिवार की सहमति से उनका अंगदान किया गया। अंगदान से दोनों मरीजों से मिले अंगों से 8 मरीजों को नया जीवन मिला। साथ ही चार मरीजों की आंखों को नई रोशनी मिलेगी।
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डॉ. फारूक ने कहा कि अंगदान के बाद एम्स में भर्ती एक मरीज को दिल, एक को लीवर, तीन मरीज को किडनी और कॉर्निया मिला। इंस्टीट्यूट ऑफ लिवर एंड बिलियरी साइंसेज में भर्ती एक मरीज को लीवर और एक को किडनी आवंटित हुआ। आर्मी आरआर अस्पताल में भर्ती मरीज को दिल मिला। केआईएमएस हैदराबाद और सीआईएमएस अहमदाबाद में भर्ती मरीज को फेफड़े आवंटित किए गए, लेकिन फेफड़ों को प्रत्यारोपण के लिए उपयुक्त नहीं माना गया।
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डॉ. फारूक ने बताया कि अंगदान करने वाली महिला के परिवारीजनों ने मृतका का नाम पता उजागर करने से इंकार कर दिया है जबकि सौरभ तीन दिनों तक अस्पताल में लावारिस की तरह थे। उनके परिवार का कोई पता नहीं था। एम्स ट्रामा सेंटर प्रशासनिक अनुभाग ने उनके भाइयों का पता लगाया। सौरभ अविवाहित हैं और उसके माता-पिता कई साल पहले ही देहांत हो गया।

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