'प्रधानमंत्री ने अर्थव्यवस्था की जो तस्वीर दिखाई उसमें जुमले ज्यादा, सच्चाई कम'
- प्रधानमंत्री ने अर्थव्यवस्था की जो तस्वीर दिखाई उसमें जुमले ज्यादा, सच्चाई कम: मनीष सिसोदिया
- प्रधानमंत्री ने अर्थव्यवस्था की जो तस्वीर दिखाई उसमें जुमले ज्यादा, सच्चाई कम: मनीष सिसोदिया
- सिसोदिया ने कहा की पीएम के मुताबिक अर्थव्यवस्था को लेकर उनका ऑपरेशन तो सफल है लेकिन मरीज की मौत
- आप नेता ने कहा पीएम का बिगड़ी अर्थव्यस्था को सुधारने के रास्ते, रोजगार को लेकर बात नहीं करना समझ से परे
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देश की अर्थव्यवस्था को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाषण पर आम आदमी पार्टी ने उनपर हमला बोला है। मंगलवार को पार्टी के वरिष्ठ नेता और दिल्ली के उपमुख्यमंत्री ने कहा मनीष सिसोदिया ने कहा कि प्रधानमंत्री ने अर्थव्यवस्था की जो तस्वीर पेश की है उसमें जुमलेबाजी ज्यादा हकीकत कम है।
मनीष सिसोदिया ने कहा कि प्रधानमंत्री ने अर्थव्यवस्था सड़क निर्माण, वाहन बिक्री की बात की लेकिन रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य के साथ बिगड़ती अर्थव्यवस्था को रास्ते पर लाने के लिए उन्होंने क्या किया उसपर कोई बात नहीं की।
पार्टी कार्यालय में मीडिया से बात करते हुए मनीष सिसोदिया ने कहा कि पीएम ने अर्थव्यस्था को लेकर जनता से झूठ बोला है। उन्होंने ये तो बताया कि देश की जीडीपी पहले भी कम हुई लेकिन ये नहीं बताया कि इसबार ऐसा क्यों हो रहा है।
उन्होंने ये नहीं बताया कि अगर रोजगार सृजन हुआ है तो लोगों की नौकरियां क्यों छूट रही हैं। देश में स्वास्थ्य और शिक्षा पर उनकी सरकार ने क्या काम किया है। महत्वपूर्ण मुद्दों पर प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में जिक्र तक नहीं किया।
'उबरने के रास्ते बताने के बजाए अपनी पीठ थपथपा रहे है'
उपमुख्यमंत्री ने कहा कि देश की अर्थव्यवस्था का बुरा हाल है। काम-धंधे बंद हो रहे है। फैक्ट्रियां बंद है। रियल स्टेट में तेजी से गिरावट आई है। रोजगार पैदा होने के बजाए नौकरियां छूट रही है। व्यापार खत्म हो रहा है तो किसान और खेती नाजुक दौर में पहुंच चुके हैं।
उसके बाद भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इससे उबरने के रास्ते बताने के बजाए अपनी पीठ थपथपा रहे है। वह देश की जनता से लगातार झूठ बोल रहे है। प्रधानमंत्री ने कहा कि जीडीपी विकास दर केवल एक तिमाही में ही घटी है, जबकि सब जानते है कि जीडीपी विकास दर पिछली 6 तिमाहियों नीचे गिर रहा है।
जनवरी-मार्च 2016 में 9.1 फीसदी से, अप्रैल-जून 2017 में यह 5.7 फीसदी के निचले स्तर पर पहुंच चुका है। यह मामूली गिरावट नहीं है। क्योंकि उन्हें पता है कि 1 प्रतिशत जीडीपी विकास दर घटने का मतलब है 1.5 लाख करोड़ रुपये की राष्ट्रीय आय का नुकसान व बेरोजगारी बढना।
मनीष सिसोदिया ने कहा कि प्रधानमंत्री 55 मिनट के अपने भाषण में सिर्फ अपनी पीठ थपथपाने का ही काम किया। मगर सच्चाई यह है कि देश की अर्थव्यवस्था बर्बादी हो रही है। नोटबंदी और जीएसटी के चलते व्यापारी परेशान है। बहुत से लोगों की नौकरियां जा रही है।
प्रधानमंत्री ने यह भी नहीं बताया कि देश में इस वक्त निजी निवेश पिछले 25 वर्षों की तुलना में निम्नतम स्तर पर है। प्रधानमंत्री की बातों को सुनें तो लगता है कि उनका ऑपरेशन तो सफल है लेकिन उसके उलट सच्चाई यह है कि मरीज मर चुका है।