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Delhi : खतरे का निशान अब नहीं रोकेगा ट्रेन की रफ्तार, जून में बन जाएगा नया पुल; अगले महीने से चलेंगी गाड़ियां

Fri, 01 Mar 2024 05:16 AM IST
दुष्यंत शर्मा धनंजय मिश्रा, नई दिल्ली
धनंजय मिश्रा, नई दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Fri, 01 Mar 2024 05:16 AM IST
सार

पुराने लोहे के पुल के समानांतर बन रहा रेलवे पुल इस वर्ष जून अंत तक बनकर तैयार हो जाएगा। जुलाई में इस पर ट्रेनों की आवाजाही भी शुरू कर दी जाएगी।

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Delhi: Danger mark will no longer stop the speed of the train.
पुराने पुल के साथ यमुना पर बन रहा है नया पुल... - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

अब यमुना का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर जाने पर ट्रेनों का परिचालन प्रभावित नहीं होगा, बल्कि हर मौसम में परिचालन ठीक समय पर होगा। पुराने लोहे के पुल के समानांतर बन रहा रेलवे पुल इस वर्ष जून अंत तक बनकर तैयार हो जाएगा। जुलाई में इस पर ट्रेनों की आवाजाही भी शुरू कर दी जाएगी।

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रेलवे अधिकारियों का कहना है कि पुल का निर्माण कार्य अंतिम चरण में हैं। पुल में चार डिग्री के घुमाव के कारण गर्डर के डिजाइन में बदलाव करने में कुछ समय लगा जिसका समाधान कर दिया गया है। गर्डर के फेब्रिकेशन का कार्य चल रहा है। कुल 28 गर्डर में से 23 लांच कर दिए गए हैं। बाकी मई तक लग जाएंगे। इसके बाद पुल पर ट्रैक बिछाया जाएगा। वर्तमान में पुरानी दिल्ली-गाजियाबाद के बीच चलने वाली ट्रेनें पुराने दो मंजिला लोहे के पुल से गुजरती हैं।
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यह पुल 160 वर्ष से अधिक पुराना है। पुल के ऊपरी तल पर ट्रेनें और निचले तल से वाहन गुजरते हैं। जब भी यमुना में जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर जाता है, तो लोहे के पुल को बंद कर दिया जाता है। इससे ट्रेनों की आवाजाही प्रभावित होती है। पुल के पुराने होने और ट्रेनों के दबाव को देखते हुए वर्ष 1997-98 में पुराने पुल के समानांतर नए पुल निर्माण के प्रस्ताव को मंजूरी मिली थी। अब इसका काम अंतिम चरण में है।
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निमार्ण के दौरान आई कई अड़चनें
निर्माण कार्य शुरू करने से पहले भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की मंजूरी लेनी थी जो नहीं मिली। इससे करीब पांच साल तक काम शुरू नहीं हो सका। इसके बाद निर्माण में कुछ बदलाव किए गए तो वर्ष 2013 में मंजूरी मिली। निर्माण पूरा करने का लक्ष्य वर्ष 2016 में रखा गया था। बाद में इसे 2018 कर दिया गया। फिर दिसंबर 2020 और बाद में सितंबर 2023 लक्ष्य रखा गया।


अब इस वर्ष जून में निर्माण पूरा होने का रेलवे ने दावा किया है। रेलवे अधिकारियों के अनुसार, निर्माण कार्य शुरू होने के बाद कई तरह की जटिलताएं आईं जिससे कार्य धीमा हुआ। इसमें सबसे प्रमुख पुल के पिलर बनाने के दौरान नदी के निचले हिस्से में चट्टानें मिलीं। इससे नींव ढालने में समय लग गया। इसके अलावा हर वर्ष वर्षा के मौसम में चार महीने तक काम भी रोकना पड़ा।

पुल का निर्माण कार्य जून अंत तक पूरा हो जाएगा। गर्डर बिछाने का काम तेजी से किया जा रहा है।
- प्रेम शंकर झा, सलाहकार, डीएमआर दिल्ली मंडल, उत्तर रेलवे

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