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कोरोना से नया खतरा: अब मल के रास्ते हो रहा रक्तस्राव, कोविड से ठीक हो चुके पांच लोग हुए शिकार

Tue, 29 Jun 2021 05:05 PM IST
पूजा त्रिपाठी अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: पूजा त्रिपाठी Updated Tue, 29 Jun 2021 05:05 PM IST
सार

प्रोफेसर अनिल अरोड़ा, चेयरमैन, इंस्टीट्यूट ऑफ लिवर गैस्ट्रोएंटरोलॉजी एंड पैन्क्रियाटिकोबिलरी साइंसेज, सर गंगा राम अस्पताल के अनुसार, कोविड-19 की इस घातक दूसरी लहर में, पिछले 45 दिनों के भीतर हमने कोविड के मरीजों में सीएमवी इन्फेक्शन के ऐसे पांच मरीज देखे हैं।

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Delhi covid recovered patients First report of five cases of Cytomegalovirus CVM related rectal bleeding in COVID immunocompetent patients
फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

कोविड से ठीक होने के बाद कुछ मरीजों में साइटोमीगलोवायरस (CMV) का पता चला है। पांच मामलों की पहली रिपोर्ट सामने आई है। सर गंगाराम अस्पताल के डॉक्टर अनिल अरोड़ा ने कहा है कि यह मरीज पेट में दर्द और मल में खून आने की शिकायत लेकर आए थे।

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प्रोफेसर अनिल अरोड़ा, चेयरमैन, इंस्टीट्यूट ऑफ लिवर गैस्ट्रोएंटरोलॉजी एंड पैन्क्रियाटिकोबिलरी साइंसेज, सर गंगा राम अस्पताल के अनुसार, कोविड-19 की इस घातक दूसरी लहर में, पिछले 45 दिनों के भीतर हमने कोविड के मरीजों में सीएमवी इन्फेक्शन के ऐसे पांच मरीज देखे हैं। ये सभी मरीज कोविड-19 के उपचार के 20 से 30 दिनों के बाद पेट में दर्द और मल में खून बहने की परेशानियों के साथ सर गंगा राम अस्पताल पहुंचे जो कि कोविड का संकेत नहीं है। उनमें से किसी के पास इस वायरल संक्रमण के लिए जिम्मेदार अन्य प्रतिरक्षात्मक स्थितियां नहीं थीं जैसे कि ट्रांसप्लांट, कैंसर, एड्स आदि के मरीजों में इम्यूनिटी कम होने से होती है।
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स्वयं कोविड संक्रमण और इसके उपचार के लिए उपयोग की जाने वाली दवाएं (स्टेरॉयड) रोगियों की प्रतिरोधक क्षमता को दबा देती हैं और उन्हें असामान्य संक्रमणों के लिए अतिसंवेदनशील बनाती हैं। ऐसा ही एक संक्रमण साइटोमेगालो वायरस है।
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साइटोमेगालो वायरस 80 से 90 प्रतिशत भारतीय आबादी में बिना कोई नुकसान पहुंचाए मौजूद रहते हैं। लेकिन हमारी रोगों से लड़ने की क्षमता इतनी मजबूत होती है कि उस पर इस वायरस का कोई प्रभाव नहीं पड़ता। लेकिन जब हमारी इम्यूनिटी कमजोर पड़ जाती है तो सीएमवी वायरस हमें संक्रमित कर सकता है। बीते दिनों ऐसे ही सभी मरीज ‘लो लिम्फोसाइट काउंट’ (सामान्य रूप से 20 से 40 प्रतिशत के मुकाबले 6-10 प्रतिशत) की रिपोर्ट के साथ सर गंगा राम अस्पताल पहुंचे, जो कि सीएमवी संक्रमण के मौजूद होने का संकेत है।

प्रोफेसर अनिल अरोड़ा ने बताया कि जो पांच मरीज है 30-70 वर्ष के आयु वर्ग के हैं। हमारे पांच मरीजों में से चार मल में खून बहने की परेशानियों और एक रोगी को आंतों में रुकावट के कारण सर गंगा राम अस्पताल आना पड़ा। उनमें से दो को अत्यधिक खून बह रहा था, एक मरीज को दाहिने तरफ कोलन की इमरजेंसी सर्जरी की तुरंत आवश्यकता थी। उनमें से एक मरीज ने कोविड से संबंधित अन्य समस्या के कारण दम तोड़ दिया। प्रो. अनिल अरोड़ा कहते हैं कि अन्य तीन रोगियों का एंटीवायरल थेरेपी से सफलतापूर्वक इलाज किया गया।

डॉ. सुनीला जैन, सीनियर कंसल्टेंट पैथोलॉजिस्ट, सर गंगा राम अस्पताल के अनुसार, साइटोमेगालो वायरस कोलाइटिस की पुष्टि, सीएमवी के लिए पीसीआर टेस्टिंग और बड़ी आंत की टिश्यू बायोप्सी से हुई।


डॉ. प्रवीण शर्मा, सीनियर कंसलटेंट, गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग, सर गंगा राम अस्पताल, के अनुसार, ऐसे मामलों में प्रारंभिक इलाज और प्रभावी एंटीवायरल थेरेपी के रूप में समय से इलाज कई अनमोल जीवन बचा सकता है।

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