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लो फ्लोर बसों की खरीद मामला: दिल्ली कोर्ट ने विजेंद्र गुप्ता के खिलाफ आपराधिक मामले पर लिया संज्ञान, चलेगा केस

Wed, 01 Sep 2021 04:10 PM IST
पूजा त्रिपाठी अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: पूजा त्रिपाठी Updated Wed, 01 Sep 2021 04:10 PM IST
सार

दिल्ली सरकार के मंत्री एवं याची कैलाश गहलोत ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया है कि गुप्ता ने उन्हें बदनियती से बदनाम करने के लिए उक्त षड्यंत्र रचा है और उनकी प्रतिष्ठा धूमिल की।

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Delhi court takes cognizance in criminal defamation case against bjp mla vijendra gupta filed by minister kailash gehlot in low floor buses purchase case
vijendra gupta

विस्तार

दिल्ली परिवहन निगम द्वारा एक हजार लो-फ्लोर बसों की खरीद से जुड़े एक मामले में भाजपा विधायक विजेंद्र गुप्ता के खिलाफ कैबिनेट मंत्री कैलाश गहलोत द्वारा दायर आपराधिक मानहानि के मुकदमे का संज्ञान अदालत ने लिया है। अदालत अब इस मामले की सुनवाई करेगी।

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पिछली सुनवाई में राउज एवेन्यू अदालत के अतिरिक्त मुख्य महानगर दंडाधिकारी रवींद्र कुमार पांडेय ने याची गहलोत के व्यक्तिगत रूप से पेश न होने के आधार पर मामले की सुनवाई एक सितंबर तक के लिए स्थगित कर दी थी। दिल्ली सरकार के मंत्री एवं याची कैलाश गहलोत ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया है कि गुप्ता ने उन्हें बदनियती से बदनाम करने के लिए उक्त षड्यंत्र रचा है और उनकी प्रतिष्ठा धूमिल की।
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आरोपी ने जानबूझकर दुर्भावनापूर्ण उद्देश्यों के लिए और राजनीतिक लाभ के लिए शिकायतकर्ता पर मौखिक और लिखित रूप में मानहानिकारक, शरारती, झूठे और घिनौने आरोप लगाए। उन्होंने कहा दिल्ली सरकार ने बसों के लिए निविदा जारी की, और उचित प्रक्रिया के बाद टाटा के नाम टेंडर जारी किया गया है। इस तथ्य की पूरी जानकारी होने के बावजूद गुप्ता ने शिकायतकर्ता की प्रतिष्ठा धूमिल करने के लिए ट्विटर, फेसबुक और अन्य सोशल मीडिया पर उनके खिलाफ बेबुनियाद, घृणित और मानहानिकारक बयान और अन्य सामग्री पोस्ट की।
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याची ने कहा था कि गुप्ता ने दिल्ली के निवासियों को बड़ी राहत देने के लिए दिल्ली सरकार की महत्वाकांक्षी परियोजना को रोकने के लिए अपमानजनक आरोप लगाए। एक उच्च स्तरीय समिति से क्लीन चिट मिलने के बावजूद मंत्री की विश्वसनीयता पर संदेह करते हुए ट्वीट पोस्ट किए।

उन्होंने कहा कि विजेंद्र गुप्ता ने इस परियोजना में घोटाले का झूठा आरोप लगाया और भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो और एलजी से संपर्क किया। इसके बाद उपराज्यपाल ने एक समिति गठित करने का आदेश दिया। समिति द्वारा जांच रिपोर्ट में भ्रष्टाचार का कोई मामला सामने नहीं आने पर परिवहन मंत्री को क्लीन चिट दे दी गई थी।


उन्होंने अदालत से आग्रह किया था कि विजेन्द्र गुप्ता के खिलाफ इस तरह की लापरवाह टिप्पणी करने पर उनके खिलाफ धारा 499, 501 के तहत उचित कानूनी कार्रवाई की जाए क्योंकि उनके रवैये से समाज में याची की प्रतिष्ठा खराब हुई है।

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