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दिल्ली: बेटे के सिख दंगों में मारे जाने की घोषणा से अदालत ने किया इनकार
Sat, 20 Nov 2021 04:22 PM IST
विक्रांत चतुर्वेदी
एजेंसी, नई दिल्ली
एजेंसी, नई दिल्ली
Published by: विक्रांत चतुर्वेदी
Updated Sat, 20 Nov 2021 04:22 PM IST
सार
80 वर्षीय पिता ने अर्जी दायर कर लगाई थी गुहार। वादी के पास कोई गुमशुदगी रिपोर्ट भी नहीं है क्योंकि पुलिस ने दर्ज करने से इनकार कर दिया था।
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1984 में इंदिरा गांधी की हत्या के बाद दिल्ली में दंगे भड़क गए थे
- फोटो : Social Media
विस्तार
अदालत ने एक शख्स के 1984 सिख दंगों में मारे जाने की घोषणा करने का आग्रह उचित साक्ष्यों के अभाव में खारिज कर दिया। इस शख्स के पिता ने अर्जी दायर कर उसके दंगों में मारे जाने की घोषणा और मृत्यु प्रमाण जारी करने की गुहार लगाई थी। दरअसल ये शख्स दंगों के दौरान गायब हो गया था। 80 वर्षीय शख्स ने अदालत में अर्जी दायर कर कहा कि उसका बेटा अजीत सिंह अक्तूबर 1984 के आखरी सप्ताह में मोटर पार्ट खरीदने कश्मीरी गेट आया था। नवंबर में सिख दंगे शुरू होने के बाद वह गायब हो गया।
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जम्मू-कश्मीर निवासी मियां सिंह ने दीवानी वाद दायर अपने बेटे को मृत घोषित करने के साथ उत्तरी दिल्ली नगर निगम के जन्म एवं मृत्यु पंजीयक को उसका मृत्यु प्रमाणपत्र जारी करने का निर्देश देने का आग्रह किया था। सिविल जज हैली फुर कौर ने वाद खारिज करते हुए गौर किया कि रिकार्ड पर ऐसा कुछ नहीं है जिससे साबित हो कि अजीत सिंह अक्तूबर 1984 के अंतिम सप्ताह में दिल्ली आया था।
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अदालत ने 18 नवंबर के अपने फैसले में कहा कि मांगने के बाद भी वादी अपने बेटे अजीत सिंह की पहचान का कोई दस्तावेज या कोई साक्ष्य जो होने की पुष्टि करे, पेश नहीं कर पाया। अदालत ने अपने फैसले में ये भी कहा कि मियां सिंह ने जिन दस्तावेज पर भरोसा किया उनमें गुरुद्वारा गुरु नानक सत्संग कमेटी की ओर से जारी अस्पष्ट प्रमाणपत्र की कॉपी, पुनर्वास के लिए पीएम को लिखे गए पत्र की कॉपी, याचिकाएं, दिल्ली पुलिस आयोग और जम्मू-कश्मीर के बीच हुए पत्राचार की प्रतियां पेश कीं।
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अदालत ने इस बात पर भी गौर किया कि वादी के पास कोई गुमशुदगी रिपोर्ट भी नहीं है क्योंकि पुलिस ने दर्ज करने से इनकार कर दिया था। वहीं जो दिल्ली प्रशासन के साथ दर्ज थी, उसे मियां सिंह ने खो दिया।