'भय' में जी रहे दिल्ली कांग्रेस के नेता, बुधवार के बाद कई छोड़ सकते हैं पार्टी का साथ
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दिल्ली नगर निगम चुनाव के परिणाम बुधवार को आएंगे जिसे लेकर आकलन का दौर मतदान के बाद से ही चल रहा है। टीवी चैनल के एग्जिट पोल परिणाम को लेकर कांग्रेस नेताओं में तीसरे नंबर की पार्टी बनने का डर सताने लगा है।
दो विधानसभा और एक लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को मिली करारी हार के बाद फिर अब निगम में आम आदमी पार्टी से कम वोट व सीट मिलने की दशा में भविष्य की चिंता को लेकर अरविंद सिंह लवली, बरखा शुक्ला सिंह और अमित मलिक के ट्रैक पर कुछ और नेता दौड़ सकते हैं।
कांग्रेस सूत्रों का कहना है कि एमसीडी चुनाव में प्रदेश के दिग्गज नेताओं ने सक्रियता से भाग नहीं लिया क्योंकि उन्हें तवज्जो नहीं मिली। दो विधानसभा चुनाव के साथ-साथ एक लोकसभा चुनाव में जिस तरह से आम आदमी पार्टी के आगे कांग्रेस पिछड़ी है उसे देखकर कांग्रेस के हालात क्षेत्रीय दल की तरह हो गए हैं।
बेशक 2015 में 9 फीसदी मिले वोट एमसीडी के 13 सीट पर उपचुनाव और राजौरी गार्डन उपचुव में 30-33 फीसदी वोट मिले लेकिन अब तीसरे नंबर पर खिसके तो मुकाबले भाजपा और आप के बीच बनेगा।
कई पूर्व मंत्रियों का भविष्य अधर में
कांग्रेस के कुछ वरिष्ठ नेताओं ने कहा कि दिल्ली सरकार के कई पूर्व मंत्रियों का भविष्य अधर में दिख रहा है। एमसीडी चुनाव परिणाम में अगर तीसरे नंबर पर पहुंचते हैं तो अगले विधानसभा बहुत कुछ मिलने की संभावना नेताओं को नहीं दिख रही है।
यही वजह है कि एमसीडी में खराब परिणाम मिलने की दशा में कांग्रेस के कई नेता भाजपा का रुख आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए कर सकते हैं। भाजपा का दामन थामने वाले नेता अरविंद सिंह और युवा कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष अमित मलिक भी ऐसा दावा कर चुके हैं।
हालांकि कांग्रेस नेता यह भी कह रहे हैं कि जितनी सीटें (75) अभी तक एमसीडी में थी, अगर उतनी बचा लेते हैं तो प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय माकन का रुतबा बढ़ेगा और कांग्रेस में नेता रुके भी रहेंगे।