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केजरीवाल ने शुरू किया प्रदूषण के खिलाफ महाअभियान, वॉर रूम और एप से रखी जाएगी निगरानी

Mon, 05 Oct 2020 06:59 PM IST
Harendra Chaudhary अमित शर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली
अमित शर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Harendra Chaudhary Updated Mon, 05 Oct 2020 06:59 PM IST
सार

  • कोरोना से स्वस्थ मरीजों के फेफड़ों की कार्यक्षमता होती है प्रभावित, प्रदूषण बढ़ने से होगी परेशानी
  • विशेषज्ञों ने अभी से प्रदूषण से बचने और इम्यूनिटी बढ़ाने की दी सलाह, दिल के मरीजों के लिए भी सावधानी जरूरी
  • दिल्ली सरकार ने प्रदूषण कम करने का महाअभियान शुरू किया, उठाए जाएंगे महत्वपूर्ण कदम

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Delhi Chief Minister Arvind Kejriwal starts campaign against pollution, will be monitored from war room and app
Arvind Kejriwal, Delhi Chief Minister - फोटो : ANI (File)

विस्तार

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने सोमवार से प्रदूषण के खिलाफ एक महाअभियान की शुरुआत की। दिल्ली सरकार ने इसे प्रदूषण के विरुद्ध युद्ध, (‘वॉर अगेंस्ट पॉल्यूशन’) का नाम दिया है। इसके तहत दिल्ली की सभी एजेंसियों को साथ लेकर राजधानी में प्रदूषण बढ़ने से रोकने पर लगाम लगाई जाएगी। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने बताया है कि इसके तहत एक वार रूम बनाकर प्रदूषण का स्तर सुधारने पर नजर रखी जाएगी। एक एप बनाया जाएगा, जिसके माध्यम से लोग ऐसे लोगों की शिकायत कर सकेंगे जो प्रदूषण फैला रहे हैं। उद्योगों में हानिकारक ईंधनों की जगह पीएनजी गैसों का उपयोग किया जाएगा।
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पेड़ों को काटने की बजाय उनके स्थान परिवर्तन पर ध्यान दिया जाएगा। इसके साथ ही पेड़ों के काटने पर एक पेड़ की जगह 10 पेड़ लगाना अनिवार्य किया जाएगा। दिल्ली के किसानों को पराली जलाने से रोकने के लिए उन्हें रसायनों के जरिए खाद में बदला जाएगा। सड़कों की सफाई में मशीनों का इस्तेमाल बढ़ाकर, एंटी स्मॉगिंग गन का इस्तेमाल कर, सड़कों के गड्ढे भरकर और निर्माण वाली जगहों पर विशेष तरीके का इस्तेमाल कर धूल का प्रदूषण कम करने की कोशिश की जाएगी।
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ठंड के मौसम में प्रदूषण से बढ़ जाती हैं कई समस्याएं

ठंड के महीनों में बढ़ने वाला वायु प्रदूषण कोरोना मरीजों के लिए अतिरिक्त परेशानी का कारण बन सकता है। कोरोना का सबसे गहरा असर लोगों के फेफड़ों पर होता है। इससे कोरोना पीड़ित लोगों को सांस लेने में परेशानी होने लगती है और रक्त में ऑक्सीजन की मात्रा कम होने लगती है। कई बार यह जानलेवा साबित होती है। विशेषज्ञों का कहना है कि जो लोग कोरोना से स्वस्थ भी हो जाते हैं, उनके फेफड़ों की कार्यक्षमता भी कुछ समय के लिए प्रभावित रहती है। ऐसे में ठंड के समय बढ़ने वाला प्रदूषण उनके लिए ज्यादा हानिकारक साबित हो सकता है। इसके लिए अभी से सावधान रहने की जरूरत है।

मैक्स अस्पताल, साकेत के हृदय रोग विभाग के निदेशक डॉ. केवल कृष्ण ने अमर उजाला को बताया कि हवा में प्रदूषण बढ़ने से शरीर को मिलने वाले ऑक्सीजन की मात्रा में गिरावट हो सकती है। इससे जिन लोगों को कोरोना है, या कोरोना से स्वस्थ भी हो चुके हैं, उनके शरीर को मिलने वाली ऑक्सीजन की मात्रा में अन्य लोगों की अपेक्षा ज्यादा गिरावट हो सकती है। यह उनके लिए परेशानी का कारण बन सकता है।

डॉ. केवल कृष्ण ने कहा कि कोरोना के मामलों में लोगों की सांस लेने की क्षमता प्रभावित हो जाती है। प्रदूषण के कारण जब हवा में पीएम 2.5, पीएम 10 और अन्य हानिकारक गैसों का दबाव बढ़ेगा, तो शरीर को मिलने वाली ऑक्सीजन की मात्रा में ज्यादा गिरावट हो सकती है। इसलिए ज्यादा गंभीर रोगियों को ऐसे माहौल में जाने से बचने की कोशिश करनी चाहिए।

किस प्रकार दिख सकता है असर

बीएलके अस्पताल के डॉ. संदीप नायर के मुताबिक प्रदूषण की वजह से शरीर को ऑक्सीजन की मात्रा मिलने में कमी आ सकती है। इससे कोरोना मरीजों को ज्यादा जल्दी थकान महसूस होने लगेगी। घबराहट बढ़ सकती है और थोड़ा भारी सामान उठाने या सीढ़ियों के चढ़ने के दौरान भी पसीना आ सकता है। इससे बचने के लिए ज्यादा भारी काम न करें। लेकिन स्वस्थ रहने के लिए हल्की शारीरिक गतिविधियों को जारी रखें।

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अभी से करें ये काम

अगर आप पूरी तरह स्वस्थ हैं, तो आपको अभी से व्यायाम, दौड़, योगा और शरीर की प्रतिरोधी क्षमता विकसित करने की कोशिशें शुरू कर देनी चाहिए, जिससे आप प्रदूषण के कुप्रभाव से बचे रहें। लेकिन अगर आप कोरोना या अन्य किसी बीमारी से पीड़ित रह चुके हैं, तो सावधानी के साथ आपको थोड़ी-थोड़ी दूर टहलना चाहिए। ज्यादा भारी व्यायाम करने से नकारात्मक असर देखने को मिल सकता है, इसके लिए ऐसे लोगों को हल्का व्यायाम ही करना चाहिए। शरीर की प्रतिरोधी क्षमता बढ़ाने के लिए आयुर्वेदिक काढ़े का उपयोग करना चाहिए। विशेषज्ञों की सलाह है कि अब सिर्फ कोरोना से ही नहीं, प्रदूषण से बचने के लिए भी मास्क जरूर लगाना चाहिए।

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