आप समर्थक ने जीत के बाद हवा में उड़ाए नोट
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दिल्ली छावनी बोर्ड इलेक्शन के वार्ड नंबर 5 में मिली जीत के बाद सोमवार को आप समर्थकों ने सार्वजनिक रूप से नोट उड़ाकर खुशी मनाई थी।
जब ये खबर सामने आई तो आम आदमी पार्टी ने सख्त कदम उठाते हुए उन सभी कार्यकर्ताओं को पार्टी से निलंबित कर दिया है।
पार्टी प्रवक्ता आतिशी मर्लिना ने जानकारी दी है कि पार्टी इस तरह के किसी भी आचरण की घोर निंदा करती है और इसलिए उन सभी कार्यकर्ताओं को पार्टी ने निलंबित कर दिया है।
5 पर भाजपा, 2 पर कांग्रेस और 1 सीट पर जीती 'आप'
दिल्ली कैंटोनमेंट बोर्ड के कल हुए चुनाव के नतीजे आ चुके हैं। खबर है कि कुल 8 वार्डों में हुए चुनाव में से 5 सीट पर बीजेपी, 2 सीट पर कांग्रेस और 1 पर आम आदमी पार्टी ने कब्जा किया है।
गौरतलब है कि दिल्ली छावनी बोर्ड चुनावों में रविवार को हल्की नोकझोंक के बीच 46.27 फीसदी मतदान हुआ। इसी के साथ सभी आठ वार्डों से चुनाव लड़ रहे 64 उम्मीदवारों का भविष्य ईवीएम में बंद हो गया।
सबसे अधिक मतदान वार्ड नंबर-7 में हुआ, जबकि वार्ड नंबर-4 में सबसे कम वोट पड़े। किसी भी इलाके में कोई हिंसक झड़प की जानकारी पुलिस को नहीं मिली। अलबत्ता एक-दो जगह हल्की नोकझोंक जरूर हुई। पिछले चुनाव के मुकाबले इस बार मतदान में करीब दो फीसदी की बढ़ोतरी हुई।
मामूली झड़प के बीच हुए मतदान
दिल्ली छावनी बोर्ड के आठ वार्डों के लिए रविवार को भारी सुरक्षा के बीच
सुबह 8 बजे 100 मतदान केंद्रों पर वोटिंग शुरू हुई। शाम 5 बजे तक वार्ड
नंबर-7 में सबसे अधिक 65.45 प्रतिशत मतदान हुआ। वहीं, वार्ड नंबर-4 में महज
25 फीसदी लोगों ने मताधिकार का इस्तेमाल किया।
वार्ड नंबर एक, 3,
5, 7 और 8 के मतदान केंद्रों पर सुबह से ही मतदाताओं की लंबी-लंबी लाइनें
लग गईं और दोपहर तक मतदाताओं के आने का क्रम जारी रहा। शाम को इन वार्डों
में एक बार फिर मतदाताओं की भीड़ जुटी। इन वार्डों के केंद्रों में दोपहर
तक 30 फीसदी से अधिक वोट पड़े। उधर, वार्ड-4 नंबर और 6 मतदान केंद्र पूरे
दिन खाली दिखाई पड़े।
झरेड़ा गांव में मतदान केंद्र के बाहर आम आदमी
पार्टी, कांग्रेस और भाजपा के कार्यकर्ताओं के बीच काफी तनाव दिखा। इस
वार्ड में फर्जी मतदान करने का प्रयास हुआ।
इस दौरान दोनों दलों के
कार्यकर्ता आपस में उलझ गए। वहीं, आर्मी पब्लिक स्कूल में बने मतदान केंद्र
की मतदाता सूची में नाम नहीं मिलने पर बड़ी संख्या में मतदाताओं ने
नारेबाजी की। उनके पास पहचान पत्र थे, लेकिन सूची से नाम गायब था।