अब आसानी से मिलेगा 10 लाख का एजुकेशन लोन
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दिल्ली कैबिनेट ने बृहस्पतिवार को नए अहम फैसले किए हैं। दिल्ली में 10वीं-12वीं की शिक्षा ग्रहण करने वाले छात्रों को दिल्ली में ही उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए 10 लाख रुपये तक लोन की हायर एजुकेशन एंड स्किल एजुकेशन गारंटी स्कीम।
इसके साथ ही ताजी बीयर के लिए माइक्रोब्रेवरी का लाइसेंस देने वाली आबकारी नीति, बिजनेस करने के लिए तमाम प्रकार के लाइसेंस की जरूरत खत्म व सीमित करने के लिए प्रधान वित्त सचिव की अध्यक्षता में समिति गठन करने का भी फैसला किया है।
और दिल्ली विधानसभा का बजट सत्र 23-30 जून तक बुलाए जाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। यह घोषणाएं उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने प्रेस कांफ्रेंस में की हैं।
फैसला नंबर-1: छात्रों को 10 लाख तक लोन गारंटी
दिल्ली के छात्रों को उच्च शिक्षा में पैसे की किल्लत आड़े नहीं आएगी। शिक्षा लोन की व्यवस्था करते हुए कैबिनेट ने हायर एजुकेशन एंड स्किल एजुकेशन गारंटी स्कीम की योजना को मंजूरी दी। इसमें डिप्लोमा व डिग्री कोर्स के लिए 10 लाख रुपये तक का लोन देने के लिए सरकार गारंटी लेगी।
आवेदक या उसके परिवार की योग्यता सिर्फ इतनी जरूरी है कि वह दिल्ली के निवासी हों, 10वीं व 12वीं की पढ़ाई दिल्ली से की हो, आधार या पैन नंबर हो और नैक से ए या बी श्रेणी व स्टेट फी रेगुलेटरी कमेटी के ए-प्लस या ए रेटिंग वाले संस्थान, कॉलेज में मेरिट आधार पर दाखिला लिया हो।
लोन गारंटी योजना के मुख्य बिंदु
- ट्यूशन फी, छात्रावास, कंप्यूटर-लैपटॉप खरीदने की राशि भी लोन में शामिल
- मार्जिन मनी या थर्ड पार्टी गारंटर या आय प्रमाण की कोई जरूरत नहीं
- आधे फीसदी कम ब्याज पर देंगे बैंक लोन, अगले सत्र से होगा लागू
- लोन में बीमा का भी प्रावधान, आधार या पैन नंबर जरूरी
- शिक्षा खत्म होने के एक साल बाद 15 साल तक समान मासिक किस्तो में लोन चुकाना होगा।
छात्र व परिवार कितना भी गरीब हो उच्च शिक्षा के लिए पैसे की दिक्कत सरकार नहीं होने देगी। लोन में गारंटी देने वाले की दिक्कत रहती थी, अब सरकार गारंटी लेगी। अधिकारी ने बताया कि अगर कोई परिवार किसी कारण से लोन नहीं चुका पाता है तो सरकार 30 करोड़ रुपये के फंड वाला हायर एजुकेशन क्रेडिट गारंटी ट्रस्ट बना रही है। यह बैंक को राशि चुकाएगी।- मनीष सिसोदिया, शिक्षा मंत्री और उपमुख्यमंत्री
फैसला नंबर-2: लाइसेंस राज खत्म करने को कमेटी गठित
दिल्ली में बिजनेस के लिए अलग-अलग जगह से 50 तरह के लाइसेंस व एनओसी की जरूरत होती है। फिर साल दर साल नवीनीकरण भी कराना होता है। व्यवसाय करना आसान करने की पॉलिसी में लाइसेंस राज आड़े आ रहा है।
यही वजह है कि प्रधान वित्त सचिव एसएन सहाय की अध्यक्षता में लाइसेंस राज खत्म व सीमित करने का अध्ययन करने के लिए कमेटी गठित की गई है। कमेटी में आईटी सेक्रेटरी सदस्य होंगे।
उपमुख्यमंत्री ने बताया कि कमेटी 31 जुलाई तक विभिन्न विभागों की लाइसेंस प्रक्रिया और उसकी जरूरत का अध्ययन करके रिपोर्ट देगी। कमेटी इसका अध्ययन करेगी कि कहां-कहां से लाइसेंस की अनिवार्यता खत्म की जा सकती है। फिर जहां जरूरी भी होगा, वहां हर साल नवीनीकरण की अनिवार्यता खत्म करने की कोशिश है।
दिल्ली में लाइसेंस राज खत्म करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। दिल्ली कैबिनेट ने एक कमेटी गठित की है जो विभिन्न तरह का बिजनेस करने के लिए कहां-कहां से लाइसेंस चाहिए, इसकी सूची बनाएगी। फिर यह भी सुझाव देगी कि कहां से लाइसेंस की अनिवार्यता खत्म की जा सकती है।- अरविंद केजरीवाल, मुख्यमंत्री, ट्वीट
फैसला नंबर-3: 23-30 जून तक बजट सत्र
सरकार ने केंद्र सरकार और उपराज्यपाल से झगड़े के बीच 2015-16 का बजट तैयार कर लिया है। कैबिनेट ने बजट को मंजूरी देकर एलजी के पास मंजूरी और उसके बाद गृहमंत्रालय से मंजूरी के लिए भेज दिया है।
दिल्ली विस का बजट सत्र 23-30 जून तक होगा। इस प्रस्ताव को मंजूरी देकर भी एलजी के पास मंजूरी के लिए भेजा गया है। झगड़े के बीच प्रस्तावित बजट सत्र में छह बैठकें होंगी।
बजट किस दिन पेश किया जाएगा, यह अभी साफ नहीं किया गया। संभावना इस बात की है कि बजट सत्र में दिल्ली सरकार जहां केंद्र पर हमले के लिए कई मसलों पर चर्चा करेगी, वहीं कुछ बिल पर पेश करके उसे पास करेगी।
फैसला नंबर-4: होटल-रेस्तरां में बनाई जा सकेगी बीयर
राजधानी के होटलों व रेस्तरां में अब माइक्रो ब्रेवरीज चलाई जा सकेगी। इससे छोटे पैमाने पर बीयर बनाई जाएगी। हालांकि, इसके लिए संचालकों को सरकार से लाइसेंस भर लेना होगा। इसका फैसला दिल्ली कैबिनेट की बैठक में लिया गया। सरकार का मानना है कि इससे गुड़गांव व बंगलूरू की तरह दिल्लीवासियों को भी अलग-अलग फ्लेवर की ताजी बीयर मिलेगी।
कैबिनेट ने बृहस्पतिवार को 2015-16 की आबकारी की नई नीति को मंजूरी दे दी है। इससे उत्पाद शुल्क की चोरी के मामलों में कमी आएगी। वहीं, होटल, क्लब, रेस्तरां सहित अन्य के नवीकरण प्रणाली में बदलाव किया है। अब निर्धारित वार्षिक शुल्क के भुगतान पर कामकाज जारी रखने की अनुमति मिलेगी।
लेकिन प्रतिकूल रिपोर्ट, फीस न चुकाने या दूसरी शर्तों को तोड़ने पर कड़ी कार्रवाई होगी। वहीं, दिल्ली में कम गुणवत्ता के ब्रांडों की आमद र रोकने के लिए इकोनॉमी ब्रांड की आवक 60 हजार से बढ़ाकर 80 हजार कर दी गई है। साथ ही सरकार ने इस वर्ष एक्साइज ड्यूटी नहीं बढ़ाने का फैसला लिया है।