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दिल्ली: टाउनशिप में आवासीय भूखंड आवंटन का झांसा देकर करोड़ों की ठगी
Mon, 07 Feb 2022 06:56 PM IST
पूजा त्रिपाठी
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: पूजा त्रिपाठी
Updated Mon, 07 Feb 2022 06:56 PM IST
सार
शाखा को जांच में पता चला कि आरोपी विजय चौधरी ने कंपनी के एक अन्य निदेशक कमल सिंह के साथ प्रस्तावित आवासीय परियोजना में भूखंड आवंटित करने के बहाने शिकायतकर्ताओं से राशि एकत्र की।
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- फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
राजस्थान के जयपुर स्थित नीमराना में प्रस्तावित टाउनशिप में आवासीय भूखंड के आवंटन करने का झांसा देकर करोड़ों की ठगी करने वाले एक बिल्डर को आर्थिक अपराध शाखा ने गिरफ्तार किया है। आरोपी के खिलाफ राजस्थान में 11 मामले दर्ज हैं और इन मामलों में वह न्यायिक हिरासत में था। पुलिस उससे पूछताछ कर ठगी में शामिल अन्य आरोपियों की धर पकड़ करने में जुटी है।
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शाखा की संयुक्त आयुक्त छाया शर्मा ने बताया कि गिरफ्तार बिल्डर की पहचान पश्चिमपुरी निवासी विजय चौधरी(49) के रूप में हुई है। बिल्डर के खिलाफ वर्ष 2019 में मेहर सिंह राणा सहित 51 लोगों ने शाखा में शिकायत की। शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया कि कथित कंपनी मेसर्स हैबीटेक इन्फ्रावेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड के निदेशकों ने नीमराना स्थित परियोजना में भूखंडों की बुकिंग के लिए प्रेरित किया। बाद में पता चला कि कंपनी ने भूखंडों की बुकिंग संबंधित एजेंसियों की आवश्यक अनुमोदन के बिना की थी। आरोपियों ने शिकायतकर्ताओं से धोखाधड़ी कर तीन करोड़ रुपये ठग लिए।
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शाखा को जांच में पता चला कि आरोपी विजय चौधरी ने कंपनी के एक अन्य निदेशक कमल सिंह के साथ प्रस्तावित आवासीय परियोजना में भूखंड आवंटित करने के बहाने शिकायतकर्ताओं से राशि एकत्र की। आरोपियों ने परियोजना के सुविधाओं के बारे में लोगों को झूठी जानकारी दी। पुलिस ने आरोपी कंपनी के बैंक खातों जांच की। जिसमें पता चला कि आरोपियों ने शिकायतकर्ताओं से पैस लिए हैं।
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पुलिस ने तहसीलदार, कोटपूतली, राजस्थान के कार्यालय से दस्तावेज लिए। जिसमें पता चला कि कंपनी के पास पर्याप्त भूमि नहीं थी। आरोपियों ने भूखंड के छोटे-छोटे टुकड़ों से एक टाउनशिप विकसित करना का केवल दिखावा किया था।
जांच में पता चला कि आरोपी राजस्थान में दर्ज अन्य मामलों में न्यायिक हिरासत में चल रहा है। पुलिस ने दिल्ली की संबंधित अदालत से आवश्यक अनुमति के बाद आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। जांच में पता चला कि विजय चौधरी का जन्म रंगून(बर्मा) में हुआ था। जब वह एक साल का था तभी उसके परिजन बर्मा छोड़कर तमिलनाडु आ गए। वहां वह शरणार्थी के रूप में रहे।
बाद में हावड़ा, पश्चिम बंगाल चले गए। बचपन में ही उसके पिता का देहांत हो गया। उनकी मां कल्पना चौधरी दिल्ली आ गई। उसकी मां ने दैनिक मजदूरी की। दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक करने के बाद आरोपी कुछ छोटे बिल्डरों के साथ काम किया और उसके बाद अपनी खुद की कंपनी शुरू कर परियोजना पर काम करना शुरू कर दिया।