Delhi Budget: अभी रामराज्य की अवधारणा से दूर है दिल्ली, मुफ्त योजनाएं विकास में बाधक, जानें एक्सपर्ट्स की राय
दिल्ली सरकार ने वित्तीय वर्ष 2024-25 के लिए 76,000 करोड़ रुपये का बजट पास किया है। राजनीतिक विश्लेषक और डीयू के प्रोफेसर डॉ. चंद्रचूड़ सिंह ने कहा कि दिल्ली अभी रामराज्य की अवधारणा से दूर है।
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दिल्ली सरकार ने वित्तीय वर्ष 2024-25 के लिए 76,000 करोड़ रुपये के बजट का प्रावधान किया है। सरकार ने चुनावी वर्ष में जो बजट पेश किया है, वह देखने में ठीक लग रहा है, लेकिन मुफ्त योजनाएं समग्र आर्थिक विकास के लिए अच्छी नहीं होती हैं। दिल्ली सरकार ने चुनावी वर्ष में मुख्यमंत्री महिला सम्मान योजना की घोषणा की है, जबकि मुख्यमंत्री तीर्थ यात्रा योजना को आगे बढ़ाया है।
अभी रामराज्य की अवधारणा से दूर है दिल्ली
रामराज्य की संकल्पना एक शासक के लिए आदर्श है। यह ऐसी व्यवस्था है, जिसमें स्व और पर में दूरी नहीं रहती। यह तात्विक न्याय का प्रतीक है। शायद इसी को ध्यान में रखकर विधानसभा में वित्त मंत्री आतिशी ने इसका कई बार जिक्र किया। अगर इसका गहराई से विवेचन करें तो सरकार के मकसद, बजटीय आवंटन व और पिछले वित्तीय वर्ष में आवंटित राशि और मुद्रास्फीति की तुलना करें तो बात भाषण से आगे जाती नहीं दिखती। दिल्ली अभी राम राज्य से बहुत दूर है।
पिछले साल के बजट की तुलना में 2024-25 के प्रस्तावित बजट में करीब 2,800 करोड़ रुपये की कमी की गई है। चुनावी साल में कई लोकलुभावन वादे भी हैं। हर साल की तरह इस बार भी शिक्षा और स्वास्थ्य पर फोकस तो है, लेकिन दोनों मदों पर प्रस्तावित राशि में कटौती हुई है। 2023-24 में शिक्षा बजट में 16,575 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया था, जो इस बार घटा कर 16396 करोड़ कर दिया गया है। हकीकत यह भी है कि 12 कॉलेजों में महीनों से शिक्षकों को वेतन भुगतान नहीं हुआ है।
इसी तरह स्वास्थ्य के क्षेत्र में 2023-24 के दौरान 9,742 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया था। जबकि 2024-25 के बजट में यह राशि घटा कर 8,685 करोड़ कर दी गई है। लिहाजा स्वास्थ्य और शिक्षा दिल्ली सरकार का मुख्य फोकस होने के बावजूद चिंता का विषय है। दिल्ली के मध्यवर्गीय कॉलोनियों में इंफ्रास्ट्रक्चर के रखरखाव का कोई प्रावधान नजर नहीं आ रहा है। सड़कों का मरम्मतीकरण, कारपेटिंग पिछले 12 साल से नहीं हो पाया है। बजट में महिला सम्मान योजना तहत 18 साल से अधिक आयु की महिलाओं के लिए 1,000 रुपये प्रतिमाह भुगतान करने का प्रावधान सराहनीय कदम है। इससे गरीबी रेखा के नीचे रहने वाली महिलाओं के लाभान्वित होने की उम्मीद है। - डॉ. चंद्रचूड़ सिंह, राजनीतिक विश्लेषक व डीयू के प्रोफेसर
मुफ्त योजनाएं विकास में बाधक
दिल्ली सरकार ने वित्तीय वर्ष 2024-25 के लिए 76,000 करोड़ रुपये के बजट का प्रावधान किया है। सरकार ने चुनावी वर्ष में जो बजट पेश किया है, वह देखने में ठीक लग रहा है, लेकिन मुफ्त योजनाएं समग्र आर्थिक विकास के लिए अच्छी नहीं होती हैं। दिल्ली सरकार ने चुनावी वर्ष में मुख्यमंत्री महिला सम्मान योजना की घोषणा की है, जबकि मुख्यमंत्री तीर्थ यात्रा योजना को आगे बढ़ाया है। आर्थिक परिपेक्ष्य में इसे सही नहीं ठहराया जा सकता।
केजरीवाल सरकार की मुख्य खासियत हमेशा मुफ्त चीजें देना रही है और यह संसदीय चुनाव का साल है, इसलिए वह मुख्यमंत्री महिला सम्मान योजना की घोषणा करके एक कदम आगे बढ़ गई है। मुख्यमंत्री तीर्थ यात्रा योजना का परिव्यय बढ़ाना भी इसी तर्ज पर है। लोगों को इस तरह की मुफ्त चीजें देना न तो मानव विकास के लिए अच्छा है, न ही समग्र आर्थिक विकास के लिए। ऐसी नीतियों का दीर्घकालिक प्रभाव सकारात्मक नहीं होगा।
आर्थिक रूप से सुदृढ़ बजट वह होता है जो बुनियादी ढांचे के विकास और सार्वजनिक संपत्तियों और निवेश वस्तुओं के निर्माण पर ध्यान केंद्रित करता है। बुनियादी ढांचे पर दिल्ली सरकार के बजट का आवंटन केवल परिवहन क्षेत्र तक ही सीमित रहा है। दिल्ली सरकार ने शिक्षा को प्राथमिकता बना रखा है, लेकिन इस वर्ष उसमें बढ़ोतरी की आवश्यकता थी। कुल मिलाकर यह विकासात्मक बजट के बजाय चुनावी वर्ष का बजट है। - प्रो. दीप्ति तनेजा, डीयू अर्थशास्त्र प्रोफेसर