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Delhi : 17 साल बाद बीएसएफ सिपाही को मिली दोबारा ज्वाइनिंग, हाईकोर्ट ने पशु तस्करी के मामले में दी राहत
Fri, 07 Mar 2025 06:58 AM IST
दुष्यंत शर्मा
गौरव बाजपेई, नई दिल्ली
गौरव बाजपेई, नई दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Fri, 07 Mar 2025 06:58 AM IST
सार
अदालत ने कहा कि समरी सिक्योरिटी फोर्स कोर्ट ने सिपाही को अपना पक्ष रखने का उचित अवसर नहीं दिया।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : एएनआई (फाइल)
विस्तार
दिल्ली हाईकोर्ट ने बीएसएफ के एक सिपाही को सेवामुक्त किए जाने के 17 साल बाद दोबारा नियुक्ति दिए जाने का आदेश दिया है। अदालत ने कहा कि समरी सिक्योरिटी फोर्स कोर्ट ने सिपाही को अपना पक्ष रखने का उचित अवसर नहीं दिया।
ऐसे में उसे दोबारा नियुक्ति दी जानी चाहिए। अदालत ने पाया कि सिपाही के 17 साल के पुराने सेवाकाल में कोई शिकायत नहीं मिली है। इसके अलावा नियुक्ति से हटाए जाने के बाद भी उसके खिलाफ कोई शिकायत नहीं पाई गई है।
न्यायमूर्ति शलिंदर कौर और न्यायमूर्ति नवीन चावला की पीठ ने तीन मार्च को दिए अपने आदेश में सिपाही को बीते 17 सालों का 50 फीसदी एरियर भुगतान किए जाने का निर्देश दिया है। कोर्ट में दाखिल जानकारी के अनुसार आरोपी सिपाही प्रेमा राम 1990 में सिपाही के तौर पर सीमा सुरक्षा बल में शामिल हुआ था।
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वह जून 2008 में 105 बटालियन में तैनात था। जीसीओवाई के कंपनी कमांडर ने सिपाही को कोयला और ताजी सब्जियां लेने के लिए जिम्मेदारी दी थी। आरोप है कि सिपाही ने अपने साथी को छोड़कर अकेले ही काम किया जिसे उल्लंघन माना गया। इस दौरान सिपाही को विभाग की विजिलेंस टीम ने 27 हजार रुपये की भुगतान पर्ची के साथ गिरफ्तार किया।
जहां से उसे सेक्टर हेडक्वार्टर में पेश किया जहां उसने स्वीकार किया कि यह रकम उसे पशु तस्करों द्वारा मदद के एवज में दी गई है। 2008 में कमाडेंट द्वारा और बाद में याचिका के आधार पर डायरेक्टर जनरल द्वारा आदेश जारी कर सिपाही को तत्काल सेवामुक्त कर दिया गया। अपीलों और उनकी सुनवाइयों को ध्यान में रखते हुए याचिकाकर्ता को दोबारा सेवा में लिए जाने का आदेश देते हुए याचिका को निस्तारित किया।
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ऐसे में उसे दोबारा नियुक्ति दी जानी चाहिए। अदालत ने पाया कि सिपाही के 17 साल के पुराने सेवाकाल में कोई शिकायत नहीं मिली है। इसके अलावा नियुक्ति से हटाए जाने के बाद भी उसके खिलाफ कोई शिकायत नहीं पाई गई है।
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न्यायमूर्ति शलिंदर कौर और न्यायमूर्ति नवीन चावला की पीठ ने तीन मार्च को दिए अपने आदेश में सिपाही को बीते 17 सालों का 50 फीसदी एरियर भुगतान किए जाने का निर्देश दिया है। कोर्ट में दाखिल जानकारी के अनुसार आरोपी सिपाही प्रेमा राम 1990 में सिपाही के तौर पर सीमा सुरक्षा बल में शामिल हुआ था।
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वह जून 2008 में 105 बटालियन में तैनात था। जीसीओवाई के कंपनी कमांडर ने सिपाही को कोयला और ताजी सब्जियां लेने के लिए जिम्मेदारी दी थी। आरोप है कि सिपाही ने अपने साथी को छोड़कर अकेले ही काम किया जिसे उल्लंघन माना गया। इस दौरान सिपाही को विभाग की विजिलेंस टीम ने 27 हजार रुपये की भुगतान पर्ची के साथ गिरफ्तार किया।
जहां से उसे सेक्टर हेडक्वार्टर में पेश किया जहां उसने स्वीकार किया कि यह रकम उसे पशु तस्करों द्वारा मदद के एवज में दी गई है। 2008 में कमाडेंट द्वारा और बाद में याचिका के आधार पर डायरेक्टर जनरल द्वारा आदेश जारी कर सिपाही को तत्काल सेवामुक्त कर दिया गया। अपीलों और उनकी सुनवाइयों को ध्यान में रखते हुए याचिकाकर्ता को दोबारा सेवा में लिए जाने का आदेश देते हुए याचिका को निस्तारित किया।