हेल्मेट को काटते हुए माथे तक पहुंचा चीनी मांझा, 18 टांकों के बाद अब सर्जरी
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राजधानी दिल्ली में चीनी मांझे का कहर जारी है। लाख प्रयासों के बाद भी चीनी मांझे पर प्रतिबंध नही लग पा रहा है। न्यू उस्मानपुर इलाके में बुधवार शाम बाइक से घर लौट रहा युवक चीनी मांझे की चपेट में आ गया।
किसी तरह युवक ने बाइक रोकी। राहगीर उसे पास की एक क्लीनिक पर ले गए, जहां से उसे जग प्रवेश चंद अस्पताल भेज दिया गया। अस्पताल में पीड़ित विकास गुप्ता (20) के माथे पर 18 टांके लगाए गए।
हालांकि अब सामने आ रहा है कि विकास को सर्जरी करानी पड़ेगी क्योंकि उसके चोटों में अब भी मांझे के कुछ कण मौजूद हैं जो चोट को भरने नहीं दे रहे। अगर इन्हें नहीं निकाला गया तो काफी नुकसान हो सकता है।
वहीं इस बीच ये बात भी सामने आई है कि विकास जिस अस्पताल में प्राथमिक इलाज के लिए गया था वहां उसे करीब एक-डेढ़ घंटे बाद इलाज मिला, जो अस्पताल की लापरवाही दर्शाता है। आगे पढ़िए कैसे हेल्मेट को चीरते हुए चीनी मांझे ने पहुंचाई विकास को चोट...
जानकारी के अनुसार हादसा इतना जबरदस्त था कि युवक का हेल्मेट भी चीनी मांझे से कट गया। पीड़ित की शिकायत पर पुलिस मामले की छानबीन कर रही है।
पुलिस के मुताबिक विकास परिवार के साथ सभापुर गांव, सोनिया विहार में रहता है। वह गांधी नगर की एक सीए फर्म में नौकरी करता है। बुधवार शाम करीब 7.00 बजे वह अपनी बाइक से गांधी नगर से घर लौट रहा था। इस बीच जैसे ही वह शास्त्री पार्क पुश्ता रोड पर पहुंचा, अचानक उसके हेल्मेट पर मांझा आकर फंस गया।
अचानक विकास के माथे में तेज जलन होने लगी। उसने हाथ का इशारा कर पीछेे आ रहे वाहन चालकों को रुकने का इशारा किया। बाइक एक ओर रोककर विकास ने हेल्मेट में उलझे मांझे को निकाला। विकास एक ओर गिर गया।
राहगीरों ने उसे उठाया। उसका माथा बुरी तरह कट चुका था। मांझे की धार इतनी थी कि हेल्मेट तक कट गया था। विकास को इलाज के बाद बुधवार को ही छुट्टी दे दी गई। पुलिस ने विकास की शिकायत पर मामले की छानबीन शुरू कर दी है।
विकास ने बताया कि जब वह अस्पताल पहुंचा तो उसे इमरजेंसी सेक्शन के बाहर इंतजार करने को कहा गया और 145 नंबर की पर्ची थमा दी गई। विकास ने बताया कि वह पुलिसवालों से विनती करते रहे कि उसकी मदद करें क्योंकि खून ज्यादा बहने की वजह से वह बेहोशी जैसा महसूस कर रहा था, लेकिन कोई उसके पास एक से डेढ़ घंटे तक नहीं आया।
दूसरे डॉक्टर को दिखाया तो कहा होगी सर्जरी
इसके बाद जो शख्स विकास को अस्पताल तक लाया था उसने कहा कि हेडगेवार अस्पताल चलते हैं। फिर दोनों हेडगेवार अस्पताल गए लेकिन वहां भी करीब एक घंटे तक उसे किसी ने नहीं देखा। फिर एक डॉक्टर आया और उसकी मलहम पट्टी की। जब विकास ने कहा कि वह उसका सिर बहुत हल्का लग रहा है तो उसने उसे कुछ टैबलेट दिए और 10 दिन बाद आने को कहा।
गुप्ता के साथ अस्पताल आए शख्स ने विकास की बाइक और उसे घर तक छोड़ा जहां जाकर वह बेहोश हो गया। विकास की मां इस बात से राहत में थी कि उसके बेटे की आंख और जान बच गई। इसके बाद विकास ने एक अन्य डॉक्टर को अपनी चोट दिखाई जिसने कहा कि सर्जरी करनी पड़ेगी ताकि मांझे के अवशेष निकाले जा सकें