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गैस चैंबर बनती दिल्ली में जीना हुआ मुहाल, लोग बोले- अब दिल्ली रहने लायक नहीं
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Fri, 15 Jun 2018 01:01 PM IST
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दिल्ली के प्रदूषण से परेशान लोग
- फोटो : अमर उजाला
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दिल्ली गैस चैंबर बनती जा रही है और अब यह रहने लायक नहीं है। धूल के इस गुब्बार से बाहर निकलना मुश्किल हो गया है। यदि दिन-प्रतिदिन स्थिति खराब होती रही तो आने वाली पीढ़ी बीमार पैदा होगी।
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यह कहना है आम लोगों का, जो इस धूल से लगातार परेशान हो रहे हैं। हर कोई धूल के कणों से जूझ रहा है ऐसे में बारिश से राहत की उम्मीदें लगा रहे हैं।
सुमित दीक्षित का कहना है कि हिमाचल से दिल्ली आया हूं। बीते दो दिनों से सांस लेने में तकलीफ हो रही है। ऐसी आबोहवा रास नहीं आ रही है। जल्द ही यहां से वापस जा रहा हूं। ऐसी हालत दिल्ली की पहले देखी नहीं।
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लक्ष्मीनगर निवासी एक निजी कंपनी में कार्यरत बलवंत त्रिपाठी का कहना है कि बीते दो दिनों से उन्हें कार्यालय आने-जाने में सांस लेने में दिक्कत हो रही है। धूल से बचने के लिए जो मॉस्क वह इस्तेमाल कर रहे हैं, उससे उन्हें कोई फायदा नहीं हो रहा है।
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आनंद विहार स्थित एक कार्यालय में कार्यरत उमा जैन का कहती हैं कि धूल के इस गुब्बार से बड़ों का हाल बुरा है तो बच्चों का ना जाने क्या होगा। अच्छा है कि बच्चों के स्कूल बंद हैं, वरना वे तो बीमार ही हो जाते। अब तो लगता है कि दिल्ली रहने लायक नहीं रही।
पूर्वी दिल्ली निवासी भारती ठाकुर भी धूल के गुब्बार से परेशान हैं। वह कहती हैं कि सुबह ऑफिस जाना होता है लेकिन घर से बाहर निकलते ही सांस सी उखड़ने लगती हैं। लगता है जैसे गले में कुछ अटक रहा हो।
यदि ऐसा ही रहा तो आने वाले दिनों में घर से बाहर निकलना मुश्किल हो जाएगा। दिल्ली को धूल का गुब्बार बनाने में हम लोग भी जिम्मेदार हैं। यदि पर्यावरण को बचाने के लिए अब नहीं चेते तो आने वाली पीढ़ियां प्रभावित होंगी।
पूर्वी दिल्ली निवासी भारती ठाकुर भी धूल के गुब्बार से परेशान हैं। वह कहती हैं कि सुबह ऑफिस जाना होता है लेकिन घर से बाहर निकलते ही सांस सी उखड़ने लगती हैं। लगता है जैसे गले में कुछ अटक रहा हो।
यदि ऐसा ही रहा तो आने वाले दिनों में घर से बाहर निकलना मुश्किल हो जाएगा। दिल्ली को धूल का गुब्बार बनाने में हम लोग भी जिम्मेदार हैं। यदि पर्यावरण को बचाने के लिए अब नहीं चेते तो आने वाली पीढ़ियां प्रभावित होंगी।