‘भाजपा विधायकों ने भी ओपी शर्मा का बचाव नहीं किया’
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दिल्ली विधानसभा में महिला साथी पर टिप्पणी को लेकर दो सत्र के लिए निलंबित भाजपा विधायक ओमप्रकाश शर्मा के मामले में अध्यक्ष रामनिवास गोयल ने सफाई दी है।
गोयल ने कहा है कि पिछले सत्र में शर्मा को अध्यक्ष पर गलत टिप्पणी के लिए सदस्यों के प्रस्ताव पर निलंबित गया था, अब आचरण समिति की सिफारिश पर दो सत्र के लिए निलंबित किया गया है।
वहीं अध्यक्ष ने यह भी कहा है कि सदन में नेता प्रतिपक्ष समेत दोनों साथी विधायकों ने समिति में आकर ओपी शर्मा का बचाव नहीं किया।
तय समय से अधिक चला बजट सत्र
विधानसभा अध्यक्ष बजट सत्र के समापन के बाद शुक्रवार को मीडिया से रूबरू हुए। उन्होंने बताया कि इस बार बजट सत्र 14 घंटे 20 मिनट के लिए निर्धारित था, जबकि 17 घंटे 5 मिनट तक चला। बजट पर चर्चा के लिए 2 बजे के बजाय बैठक सुबह 11 बजे शुरू कर दी गई जो 4 घंटे 30 मिनट तक चली। इसमें 17 सदस्यों ने हिस्सा लिया।
गोयल ने बताया कि आचरण समिति की सिफारिश पर सात सदस्यों ने चर्चा की और भावना गौड़ ने संशोधन प्रस्ताव पेश किया। इस पर शर्मा की सदस्यता खत्म करने के बजाय उन्हें दो सत्र के लिए निलंबित किया गया।
इसे लेकर पत्रकारों ने सवाल किया कि एक अपराध की दो-तीन सजाएं क्यों? विस अध्यक्ष ने जवाब दिया कि दोनों बार की सजा का अलग-अलग मामला है। वहीं प्रश्नकाल में सदस्यों की तरफ से मंत्री पर यह सवाल उठाना कि गलत जवाब दे रहे हैं, इस पर अध्यक्ष ने कहा है अगर ऐसा है तो संबंधित समिति में शिकायत करनी चाहिए।
दो-तीन बार की सजा संविधान का उल्लंघन
विधायक ओपी शर्मा ने सदन में जो टिप्पणी की, यह सदन के अंदर का विषय है। सदन में विधायकों को भाव प्रकट करने की स्वतंत्रता है। फिर जो घटना हुई, इसकी सजा का प्रावधान नियमों में है।
उसके हिसाब से चेतावनी देना, सदन से बाहर निकालना, निलंबित करना, सदस्यता समाप्त करना शामिल है। लेकिन इस मामले में कई सजा का जिक्र आया है। इससे पहले सदन में 1993-98 के कार्यकाल में एक सदस्य शराब की बोतल लेकर सदन में आए, एक सदस्य ने संविधान की प्रति उछाल दी और एक सदस्य ने सुप्रीम कोर्ट के जज को गाली दी।
तीन में से एक मामले में सदस्यता खत्म करने की सिफारिश आचरण समिति ने दी, लेकिन उस पर सहमति का प्रस्ताव ही सदन में नहीं आया।-एसके शर्मा, दिल्ली विस के पूर्व सचिव