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Delhi: ग्रीन बजट सर्वसम्मति से पास होने के साथ ही विधानसभा सत्र का समापन, विपक्ष की गैर हाजिरी पर चिंता

Sat, 28 Mar 2026 01:41 AM IST
दुष्यंत शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Sat, 28 Mar 2026 01:41 AM IST
सार

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और कैबिनेट मंत्रियों ने बजट पर चर्चा के दौरान इसकी खूबियां गिनाईं। इस दौरान मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने विपक्ष पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि लगता है कि आम आदमी पार्टी ने सड़क पर ही रहने का फैसला कर लिया है। दिल्ली की जनता इन्हें अगली बार स्थायी सड़क पर ही कर देगी।

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Delhi: Assembly Session Concludes with Unanimous Passage of Green Budget
दिल्ली विधानसभा (फाइल फोटो) - फोटो : पीटीआई

विस्तार

विधानसभा के बजट सत्र के आखिरी दिन वर्ष 2026-27 का ग्रीन बजट सर्वसम्मति से पास हो गया। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और कैबिनेट मंत्रियों ने बजट पर चर्चा के दौरान इसकी खूबियां गिनाईं। इस दौरान मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने विपक्ष पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि लगता है कि आम आदमी पार्टी ने सड़क पर ही रहने का फैसला कर लिया है। दिल्ली की जनता इन्हें अगली बार स्थायी सड़क पर ही कर देगी।

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विधानसभा में शुक्रवार को बजट सत्र के अंतिम दिन ग्रीन बजट को सर्वसम्मति से मंजूरी दे दी गई। हालांकि बजट में कोई बड़ा बदलाव नहीं किया गया, लेकिन चर्चा के दौरान राजनीतिक माहौल काफी गरम रहा। मुख्यमंत्री ने कहा कि दिल्ली अब नई दिशा में आगे बढ़ेगी, जहां हर रुपये का हिसाब होगा और अधूरे काम पूरे किए जाएंगे। सत्र के दौरान साइकिल वितरण योजना को लेकर हुई बयानबाजी पर मुख्यमंत्री नाराज दिखीं। उन्होंने कहा कि दिल्ली की बेटियों को लेकर किसी भी तरह की आपत्तिजनक टिप्पणी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
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विपक्ष की गैरहाजिरी सत्र में बड़ा मुद्दा बनी
आम आदमी पार्टी के विधायक लगातार सदन से दूर रहे, जिस पर सत्तापक्ष ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। मुख्यमंत्री ने कहा कि जिन्हें जनता ने अपनी आवाज उठाने के लिए चुना, वे ही सदन में नहीं आ रहे हैं। ऐसा लगता है कि विपक्ष ने अब सड़क की राजनीति करने का फैसला कर लिया है। जनता इसका जवाब चुनाव में देगी।
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पिछली सरकार 47,000 करोड़ कर्ज छोड़ गई
वित्तीय स्थिति पर बोलते हुए मुख्यमंत्री ने पिछली सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि पूर्व सरकार दिल्ली पर करीब 47,000 करोड़ रुपये का कर्ज छोड़कर गई, जिसमें 27,547 करोड़ रुपये अभी भी बकाया है। इसके अलावा कई बड़ी परियोजनाएं अधूरी छोड़ी गईं, जिनकी जिम्मेदारी अब वर्तमान सरकार को उठानी पड़ रही है। एक्सप्रेसवे परियोजनाओं में करीब 3,700 करोड़ रुपये, मेट्रो से जुड़ी परियोजनाओं में 9,087 करोड़ रुपये, अस्पताल निर्माण में 2,000 करोड़ रुपये से ज्यादा और डीएमआरसी-पीडब्ल्यूडी इंटीग्रेटेड प्रोजेक्ट्स में 1,031 करोड़ रुपये की देनदारी मिली। कई स्कूल और अस्पताल वर्षों से अधूरे पड़े थे, जिससे उनकी लागत लगातार बढ़ती रही।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार ने इन लंबित देनदारियों को चुकाने का काम शुरू कर दिया है। खिलाड़ियों, स्कॉलरशिप, ईडब्ल्यूएस योजनाओं और किशोरी योजना से जुड़े भुगतान किए गए हैं। इसके अलावा एससी, एसटी और ओबीसी छात्रों की 114 करोड़ रुपये की ट्यूशन फीस और दिल्ली सरकार के कॉलेजों की 538 करोड़ रुपये की देनदारी भी निपटाई गई है। उन्होंने पीडब्ल्यूडी की एक परियोजना का जिक्र करते हुए कहा कि बिना काम किए 250 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया था, जो गंभीर अनियमितता को दर्शाता है।

सरकारी संस्थानों की स्थिति पर जताई चिंता
सीएम ने कहा कि डीटीसी करीब 99,000 करोड़ रुपये के घाटे में है, जबकि दिल्ली जल बोर्ड 91,000 करोड़ रुपये के नुकसान में चल रहा है। जल बोर्ड की बिलिंग प्रणाली को उन्होंने पूरी तरह विफल बताया, जिसके कारण लोगों को गलत और ज्यादा बिल मिले। अब सीएम प्रगति पोर्टल शुरू किया गया है, जिसके जरिए सभी परियोजनाओं की निगरानी होगी और उन्हें तय समय में पूरा किया जाएगा।

इंफ्रास्ट्रक्चर और पर्यावरण पर दे रहें जोर
सीएम ने कहा, मुनक नहर पर 5000 करोड़ रुपये की लागत से एलिवेटेड रोड, मेट्रो विस्तार, ईवी ट्रांजिशन और चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे कदम उठाए जा रहे हैं। पर्यावरण के क्षेत्र में पहली बार 4200 हेक्टेयर रिज क्षेत्र को वन घोषित किया गया है और अगले चार वर्षों में 35 लाख पेड़ लगाने का लक्ष्य रखा गया है। स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए 4478 पदों को मंजूरी दी गई है और 1194 नर्सिंग व पैरामेडिकल स्टाफ की नियुक्ति की गई है।


सत्रावसान की घोषणा, रिपोर्ट एलजी को भेजेंगे
विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने सत्र के अंत में सत्रावसान की घोषणा की और कहा कि इसकी रिपोर्ट उपराज्यपाल को भेजी जाएगी। यह बजट सत्र कुल चार दिन चला। इस सत्र में विपक्ष की गैरमौजूदगी को लेकर लगातार सवाल उठे। करीब 11 साल तक सत्ता में रही आम आदमी पार्टी के विधायक इस अहम सत्र से दूर रहे, जिसकी सत्तापक्ष ने कड़ी आलोचना की।

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