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फेसबुक इंडिया के निदेशक को दिल्ली विधानसभा की शांति व सद्भाव समिति का नोटिस

Sun, 13 Sep 2020 09:54 AM IST
प्राची प्रियम अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: प्राची प्रियम Updated Sun, 13 Sep 2020 09:54 AM IST
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Delhi assembly peace and harmony committee sends notice to facebook India
Facebook - फोटो : social media

दिल्ली विधानसभा की शांति व सद्भाव समिति ने दिल्ली दंगों में फेसबुक की भूमिका पर सवाल खड़ा किया है। समिति ने 15 सितंबर को होने वाली अपनी अगली कार्यवाही में फेसबुक इंडिया के उपाध्यक्ष व प्रबंध निदेशक अजीत मोहन को उपस्थित रहने के लिए नोटिस भेजा है।

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कमेटी के चेयरमैन राघव चड्ढा की अध्यक्षता वाली शांति व सद्भाव समिति ने फरवरी 2020 में हुए दिल्ली दंगों के लिए फेसबुक को भी जिम्मेदार ठहराया है। समिति का कहना है कि फेसबुक ने सत्तापक्ष से जुड़े लोगों के तीखे व समाज में वैमनस्य फैलाने वाले बयानों व लिखित टिप्पणियों को नजरअंदाज किया है। 
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समिति ने 15 सितंबर को होने वाली पूरी कार्यवाही की लाइव स्ट्रीमिंग करने का फैसला लिया है। ताकि इसकी पारदर्शिता को सुनिश्चित किया जा सके। समिति ने फेसबुक की तरफ से घृणा फैलाने वाले भाषण नियमों को लागू करने में जानबूझ कर निष्क्रियता बरतने का आरोप लगाने वाली शिकपायतों का हवाला दिया है। 
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समिति का मानना है कि इससे पहले हुई सुनवाई में गवाहों की तरफ से जो साक्ष्य पेश किए गए थे, उसके आधार पर फेसबुक को दिल्ली दंगों की जांच में सह-अभियुक्त के रूप में आरोपित किया जाना चाहिए।

समिति ने चार गवाहों के बयान पिछली सुनवाई में दर्ज किया था। इसमें पत्रकार और लेखक परांजॉय गुहा ठाकुर्ता, डिजिटल अधिकार कार्यकर्ता निखिल पाहवा, पत्रकार अवधेश तिवारी, स्वतंत्र और खोजी पत्रकार कुणाल पुरोहित शामिल हैं।

अन्य बातों के अलावा गुहा ने बयान दिया था कि फेसबुक प्लेटफॉर्म उतना नास्तिक और कंटेंट न्यूट्रल नहीं है, जितना कि वह होने का दावा करता है। साथ ही सत्तारूढ़ व्यवस्था और फेसबुक के बीच एक सांठगांठ का आरोप लगाया था। 


वहीं, अवधेश तिवारी ने बीते 31 अगस्त को फेसबुक के अधिकारी अंखी दास पर एफआईआर दर्ज कराई थी। दूसरे गवाहों के बयान भी फेसबुक को कटघरे मे खड़ा करते हैं।

समिति ने इन आरोपों पर संजीदगी से विचार-विमर्श के बाद इस मसले पर संज्ञान लिया और कार्यवाही शुरू की। इसके अधार पर फेसबुक का पक्ष सुनने के लिए नोटिस जारी किया गया है। पूरी कार्यवाही को पारदर्शी बनाने और जनता के विश्वास को स्थापित करने के लिए कार्यवाही की लाइव-स्ट्रीमिंग होगी।

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