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Delhi Assembly : 30 साल में तीन दलों की बनी सरकार, कांग्रेस ने सबसे अधिक समय तक किया दिल्ली पर राज
Sat, 16 Dec 2023 05:06 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Sat, 16 Dec 2023 05:06 AM IST
सार
विधानसभा की पहली बैठक दिसंबर 1993 में हुई थी। इन 30 साल में विधानसभा नेे कई राजनीतिक उतार चढ़ाव देखे हैं। इस दौरान तीन दलों की सरकार बनी है।
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दिल्ली विधानसभा
विस्तार
दिल्ली विधानसभा का गठन हुए 30 साल हो गए हैं। विधानसभा की पहली बैठक दिसंबर 1993 में हुई थी। इन 30 साल में विधानसभा नेे कई राजनीतिक उतार चढ़ाव देखे हैं। इस दौरान तीन दलों की सरकार बनी है। आप की पहली सरकार कार्यकाल पूरा नहीं करने वाली रही, जबकि कांग्रेस की तीन और भाजपा की एक सरकार ने कार्यकाल पूरा किया। आप की एक सरकार कार्यकाल पूरा कर चुकी है, जबकि उसकी वर्तमान सरकार दूसरा कार्यकाल पूरा करने के करीब पहुंच चुकी है। आप की पहली सरकार के 49 दिन बाद त्याग पत्र देने पर राष्ट्रपति शासन लागू होने के कारण करीब एक साल तक विधानसभा वीरान भी रही। इसके अलावा 30 वर्ष के दौरान विधानसभा से दिल्ली सरकार के सचिवालय की भी विदाई हुई।
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दिल्ली विधानसभा का गठन वर्ष 1993 में हुआ था और विधानसभा में ही दिल्ली सरकार का सचिवालय बनाया गया था। इसके बाद इस वर्ष ही विधानसभा के चुनाव हुए थे। इन चुनाव में भाजपा ने बहुमत हासिल किया था। दिसंबर में मदनलाल खुराना के नेतृत्व में सरकार बनी थी। सरकार के गठन के बाद इस माह ही विधानसभा की पहली बैठक हुई थी, जिसमें नवनिर्वाचित विधायकों को शपथ दिलाई गई थी। करीब सवा दो साल बाद मदनलाल खुराना के हवाला कांड में फंसने पर भाजपा ने उनका त्याग पत्र लेकर साहिब सिंह वर्मा को मुख्यमंत्री बनाया था, लेकिन विधानसभा चुनाव से करीब दाे माह पहले महंगाई पर काबू न पाने पर भाजपा ने उनको हटाकर अपनी तेजतर्रार नेता सुषमा स्वराज को सरकार की कमान सौंपी।
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वर्ष 1998 में कांग्रेस ने सत्ता हासिल की और 15 वर्ष तक उसकी शीला सरकार रही। इस दौरान वर्ष 2001 में विधानसभा से दिल्ली सरकार का सचिवालय यमुना किनारे वर्ष 1982 में एशियाड खेलों के लिए बनाई गई प्लेयर्स बिल्डिंग में शिफ्ट किया गया। इसके बाद विधानसभा में राजनीतिक गतिविधियों के साथ-साथ नेताओं व आम जनता की चहल पहल कम हो गई। उधर वर्ष 2013 में शीला दीक्षित समेत कांग्रेस के 62 उम्मीदवारों की हार के साथ ही कांग्रेस सत्ता सेे बाहर हो गई और इस चुनाव में किसी भी दल को बहुमत नहीं मिला।
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पहली बार कोई चुनाव लड़ी आम आदमी पार्टी ने कांग्रेस के समर्थन से सरकार बनाई, लेकिन 49 दिन बाद ही आप सरकार ने त्याग पत्र दे दिया। इसके बाद कांग्रेस व भाजपा नेे सरकार बनाने का दावा पेेश नहीं किया। इस कारण दिल्ली में राष्ट्रपति शासन लागू हो गया और फरवरी 2015 में विधानसभा चुनाव कराए गए। इस दौरान करीब एक वर्ष तक राष्ट्रपति शासन लागू होेने से विधानसभा राजनीतिक गतिविधियों से दूर रही।
वर्ष 1952 में भी विधानसभा गठित हुई थी
वर्ष 1952 में भी दिल्ली विधानसभा का गठन किया गया था। हालांकि पांच साल बाद विधानसभा को खत्म कर दिया था। इन पांच साल के दौरान कांग्रेस का शासन रहा था। इसके बाद वर्ष 1967 में महानगर परिषद बनाई, मगर वर्ष 1990 में महानगर परिषद खत्म कर दी गई। परिषद के चार बार हुए चुनाव में बारी-बारी से कांग्रेस व भाजपा (पहले जनसंघ व जनता पार्टी) नेे बाजी मारी थी।