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Delhi Assembly Elections 2025 : दिलचस्प राजनीतिक संघर्ष की गवाह बनी ओखला विस सीट, अरिबा की अमानत को चुनौती

Fri, 31 Jan 2025 05:10 AM IST
दुष्यंत शर्मा विनोद डबास, नई दिल्ली
विनोद डबास, नई दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Fri, 31 Jan 2025 05:10 AM IST
सार

कांग्रेस की पार्षद अरिबा खान अपने पिता आसिफ मोहम्मद खान की हार का बदला लेने के लिए चुनावी मैदान में उतरी हैं। उनके सामने हैं ओखला के मौजूदा विधायक अमानतुल्ला खान जो इस चुनावी समर में अपनी राजनीतिक पकड़ बरकरार रखने के लिए पूरी ताकत झोंक रहे हैं।

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Delhi Assembly Elections 2025: Okhla Vis seat witnesses interesting political struggle
दिल्ली विधानसभा चुनाव 2025 - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

विधानसभा चुनाव में ओखला सीट इस बार दिलचस्प राजनीतिक संघर्ष की गवाह बनी हुई है। यहां का मुकाबला एक पारिवारिक बदले की लड़ाई का भी प्रतीक है। यह स्थिति इतिहास के कलिंग युद्ध की याद दिलाती है, जिसमें सम्राट अशोक से चार साल तक लड़े राजा अनंत पद्मनाभ की मृत्यु के बाद उनकी बेटी राजकुमारी पद्मा ने मोर्चा संभाला था। 

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कुछ ऐसा ही ओखला में देखने को मिल रहा है। कांग्रेस की पार्षद अरिबा खान अपने पिता आसिफ मोहम्मद खान की हार का बदला लेने के लिए चुनावी मैदान में उतरी हैं। उनके सामने हैं ओखला के मौजूदा विधायक अमानतुल्ला खान जो इस चुनावी समर में अपनी राजनीतिक पकड़ बरकरार रखने के लिए पूरी ताकत झोंक रहे हैं।
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अरिबा खान की राजनीतिक यात्रा उनके पिता आसिफ मोहम्मद खान से जुड़ी हुई है, जो दो बार ओखला के विधायक रह चुके हैं। वर्ष 2015 में वह आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार अमानतुल्ला खान से हार गए थे, जिसने उनकी राजनीतिक सक्रियता को कम कर दिया था। अब, दस साल बाद उनकी बेटी अरिबा खान ने कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ने का फैसला किया है।
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यह उनके लिए सिर्फ एक चुनाव नहीं, बल्कि अपने पिता की हार का बदला लेने का एक मौका भी है। अरिबा ने अपने पार्षद कार्यकाल में जो लोकप्रियता हासिल की है, वह अब उन्हें विधायक बनने में कितनी मदद कर सकती है, यह चुनाव के नतीजों पर निर्भर करेगा। दूसरी ओर, अमानतुल्ला खान ने पिछले दस वर्षों में ओखला में खुद को एक मजबूत और प्रभावी नेता के रूप में स्थापित किया है। उनकी जमीनी पकड़, जनता से सीधा संवाद और क्षेत्र में किए गए कार्य उनकी सबसे बड़ी ताकत है।


अरिबा खान अपने पिता के राजनीतिक प्रभाव और पार्षद के रूप में अपनी लोकप्रियता के दम पर मैदान में उतरी हैं, जबकि अमानतुल्ला खान अपने दस साल के कामकाज और जनता से गहरे संबंधों के सहारे अपनी जीत पक्की करना चाहेंगे। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस बार का चुनाव न केवल उम्मीदवारों के व्यक्तित्व पर बल्कि उनके किए गए कार्यों और भविष्य की योजनाओं पर भी आधारित होगा।

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