सीलमपुर: दिल्ली की वो सीट जहां अबतक एक बार भी भाजपा को नहीं मिली है जीत
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दिल्ली की सीलमपुर विधानसभा सीट राजनीतिक दृष्टि से तो महत्वपूर्व है ही, लेकिन नागरिकता कानून को लेकर जिस तरह यहां का माहौल बिगड़ा, उसके बाद सभी की नजर यहां टिकी हुई है। सीलमपुर दिल्ली की वो सीट है जहां 1993 से लेकर अबतक भारतीय जनता पार्टी अपना खाता भी नहीं खोल पाई है। इस बार नागरिकता कानून, एनआरसी और एनपीआर को लेकर जैसा माहौल बना है, उससे भी यह साफ नजर आ रहा है कि भाजपा इस बार भी सीलमपुर की रेस में बहुत आगे नहीं निकल पाएगी।
वर्तमान में यहां से आम आदमी पार्टी के हाजी इशराक खान विधायक हैं। इस बार आप ने हाजी अशराक का टिकट काट कर अब्दुल रहमान पर दांव लगाया है। उनका मुकाबला भाजपा के कौशल मिश्रा और कांग्रेस के चौधरी मतीन अहमद के साथ है। चौधरी मतीन सीलमपुर से पांच बार विधायक रह चुके हैं।
इनके बीच होगी टक्कर-
| पार्टी | उम्मीदवार 2020 | उम्मीदवार 2015 |
| आप | अब्दुल रहमान | हाजी इशराक खान |
| भाजपा | कौशल मिश्रा | संजय जैन |
| कांग्रेस | चौधरी मतीन | चौधरी मतीन |
इस सीट पर 60 प्रतिशत मुस्लिम और लगभग 40 प्रतिशत हिंदू मतदाता हैं। यानी सीलमपुर में मुस्लिम मतदाता निर्णायक भूमिका में हैं, लेकिन इसबार उनके लिए यह तय कर पाना मुश्किल है कि वे 'आप' के नए प्रत्याशी पर भरोसा जताएं या अपने पुराने विधायक रहे चौधरी मतीन को फिर से वोट करें। ऐसे में इसकी बहुत उम्मीद जताई जा रही है कि इस बार सीलमपुर के मुस्लिम वोट दोनों तरफ बंट जाएंगे।
वहीं भाजपा मुस्लिम वोटों पर ध्यान देने के बजाय हिंदू मतदाताओं को एकजुट करने में लगी हुई है, ताकी वोट बंटवारे का फायदा मिल सके।
2015 में पहली बार बदली सीलमपुर की सत्ता
2015 के नतीजे-
| पार्टी | उम्मीदवार | वोट |
| आप | हाजी इशराक खान | 57,302 |
| भाजपा | संजय जैन | 29,415 |
| कांग्रेस | चौधरी मतीन | 23,791 |
1993 से लेकर 2013 तक सीलमपुर से लगातार चौधरी मतीन ही विधायक रहे। उन्होंने एक बार जनता दल से, एक बार निर्दलीय और दो बार कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ा और जीत दर्ज की। 2015 में पहली बार यहां सत्ता बदली और आम आदमी पार्टी के हाजी इशराक खान विधायक बने। भाजपा के संजय जैन दूसरे नंबर पर रहे, जबकि कांग्रेस खिसक कर तीसरे स्थान पर चली गई। यह नतीजे सभी के लिए चौंकाने वाले थे।
यहां के लोगों का मानना है कि सीलमपुर में काम से ज्यादा दुआ-सलाम का असर होता है, इसलिए इस बार हाजी इशराक का टिकट कटने के कारण आप के समर्थकों में नाराजगी है, जिसका फायदा कांग्रेस के चौधरी मतीन को मिल सकता है। अगर ऐसा हुआ तो मतीन का वोट प्रतिशत बढ़ेगा और आप के लिए इस सीट को बचा पाना बड़ी चुनौती हो जाएगी।