ग्राउंड रिपोर्ट: भाजपा, कांग्रेस, आप के मुख्यालयों में ये क्या चल रहा है ...
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
दिल्ली चुनाव को लेकर राजनीतिक दल अपनी रणनीति के मुताबिक आगे बढ़ रहे हैं। कोई ग्राउंड पर उतरा है तो कोई कमरे में बैठकर अपने लेपटॉप के जरिए चुनाव संचालन कर रहा है। कहीं पर ऐसा भी देखने को मिला कि वहां केवल सेल्फी लेने वाले ही आ जा रहे थे। किसी पार्टी का मैदान बिल्कुल खाली पड़ा था। वहां न कार्यकर्ता और न ही नेता, नजर आए। बुधवार दोपहर को भाजपा, कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के मुख्यालयों का लाइव टेस्ट किया गया। तीनों जगह पर अलग अलग स्थिति नजर आई। 24 अकबर रोड स्थित कांग्रेस पार्टी का मुख्यालय करीब करीब सूना पड़ा था। वहां चुनावी रंग पूरी तरह गायब था। डीडीयू मार्ग पर आम आदमी पार्टी के कार्यालय में न केवल भीड़ थी, बल्कि एक आईटी कंपनी की तरह वहां मौजूद सभी कमरों में वालंटियर की कई टीमें अपने लेपटॉप पर जुटी थी। बाहर कार्यकर्ताओं के लिए लंगर भी चल रहा था। इससे थोड़ा आगे चलकर भाजपा का कई मंजिला मुख्यालय बना है। वहां तो अनूठा नजारा देखने को मिला। पांच सात कार्यकर्ता थे जो सेल्फी लेने में मस्त थे।
कांग्रेस मुख्यालय
अन्य दिनों की भांति 24 अकबर रोड पर गाड़ियां तो ठीक ठाक संख्या में खड़ी थी। बाहर से देखकर लग रहा था कि भीतर खूब गहमागहमी मिलेगी। अंदर ऐसा कुछ नहीं दिखा। घास का मैदान तो पूरी तरह खाली था। दो चार कार्यकर्ता धूप का आनंद ले रहे थे। नेताओं की बात करें तो न कोई स्थानीय चेहरा और न ही कोई राष्ट्रीय स्तर का पदाधिकारी वहां नजर आया। वहां बने कार्यालयों को देखा तो उनमें सन्नाटा पसरा था। कुछ देर ठहकर इधर उधर का माहौल जानने का प्रयास किया। दिल्ली चुनाव को लेकर कहीं कोई चर्चा ही नहीं कर रहा था। ऐसा दिखा कि मानो सब औपचारिकता वश हो रहा है। अंदर की तरफ दो कार्यकर्ता मिल गए। उनसे बातचीत की। बोले, देखिये फोटो नहीं। आप जो पूछेंगे, हम बताएंगे। हो गए शुरु। दिल्ली चुनाव में अध्यक्ष जी की बिटिया जीत जाए, आजाद साहब की पत्नी सीट निकाल जाए, थोड़ी बहुत उम्मीद सरदार जी से है। यानी अरविंद्र लवली। आप ही बताओ, कांग्रेस क्यों अपनी फजीहत करा रही है। अगर चुनाव जीतने की मंशा होती तो कई माह पहले राहुल प्रियंका और दूसरे पदाधिकारी दिल्ली की सड़कों पर निकलते। मगर नहीं, क्योंकि वे जानते हैं कि कांग्रेस कितना भी जोर लगा ले, दो चार सीटों से ज्यादा तो कुछ आएगा नहीं। ऐसे में अब पसीना बहाकर भाजपा की मदद क्यों करें।
भाजपा मुख्यालय
बाहर मुख्य सड़क पर चार पांच गाड़ियां खड़ी थी। लेफट साइड वाले गेट से पुलिस जांच के बाद अंदर जाने की अनुमति मिली। अंदर जाकर देखा तो माहौल कुछ अलग ही मिला। न नेताओं की भीड़ और न कार्यकर्ताओं की धक्कामुक्की। बिल्कुल शांत सा माहौल। कुछ कार्यकर्ता दिखे। वे सेल्फी लेने में मस्त थे। ऐसा लग रहा था कि वे भाजपा के राष्ट्रीय मुख्यालय से बहुत प्रभावित हो रहे थे। खैर जो भी हो, उनसे बातचीत की। पहले तो वे बोले, हम तो बाहर से आए हैं, लेकिन बात करने के लिए तैयार हो गए। उन्होंने कहा, हमारी चुनाव में ड्यूटी लगी है। दिल्ली के अलग अलग वार्डों में दूसरे राज्यों के पदाधिकारियों को भेजा गया है। सवाल पूछा कि क्या लग रहा है। वे बोले, लगना क्या है मोदी जी है ना। बस इतना कहते ही वे दोबारा से सेल्फी लेने में व्यस्त हो गए। अंदर पहुंचे तो मीडिया लॉंज भी खाली था। और अंदर पहुंचे तो कमरों में एक दुक्का पदाधिकारी नजर आए। उनसे बात करने का प्रयास किया तो वे बोले, चिंता नहीं है। चुनाव जीत रहे हैं। मोदी जी और अमित शाह की रणनीति से लोग अभी वाकिफ नहीं हैं। क्या आप जानते हैं कि केजरीवाल दिल्ली के विकास मॉडल पर चुनाव लड़ रहे हैं। इस सवाल पर वे थोड़ा सा नाराज हो गए। बोले, नतीजे आने दो। शाहीन बाग में लोगों को बैठाकर वो चुनाव नहीं जीत सकता। भाजपा ही कुछ करेगी।
आप मुख्यालय
यहां पर मुख्य गेट से लेकर अंदर के कमरों तक खूब गहमागहमी थी। लंगर भी चल रहा था। पहले केजरीवाल की प्रेसवार्ता हुई और उसके बाद राज्यसभा सांसद संजय सिंह मीडिया से बात करने वहां पहुंचे। यहां जो देखने को मिला, वह पहले दोनों मुख्यालयों में कहीं नहीं दिखा। कार्यकर्ता और वालंटिर पूरी तन्मयता के साथ चुनाव प्रबंधन में जुटे थे। कार्यालय के भीतर जो वॉर रूम बने थे, उनका नजारा तो देखते ही बनता था। युवक युवतियों की अंगुलियां लेपटॉप पर टक टक चल रही थी। अरे, फलां विधानसभा की रिपोर्ट आ गई। हां अभी आई है। जल्दी जल्दी भेजो। अरे तुमने 15 हजार वालंटियर को मैसेज भेज दिया है ना कि उन्हें घर घर जाकर क्या बोलना है। परिवार के किस सदस्य से कैसे लहजे में बात करनी है। इसके बाद दूसरे कमरे का हाल देखा। वहां इससे भी ज्यादा तेजी देखने को मिली। किसी के पास बात करने की फुर्सत नहीं थी। कुछ देर वहां खड़े रह कर उनका काम जानने का प्रयास किया। वॉर रूम में हर सीट का और एक एक वोटर का डॉटा था। कौन सा वोटर किस ओर जा सकता है, पिछली बार उसने किसे वोट दी थी, यह रिकॉर्ड भी आप ने जुटा रखा है। शाम को कौन सी टीम किस विधानसभा क्षेत्र की प्रचार रिपोर्ट तैयार करेगी। समीक्षा कौन करेगा और चुनाव प्रचार खत्म होने के बाद डोर टू डोर कैंपेन में कौन कहां रहेगा, ये सब तैयारी पहले ही हो चुकी है। जिन लोगों को जहां जहां भेजना है, उनके मोबाइल पर मैसेज चला जाएगा। राज्यसभा सांसद संजय सिंह बोले, देखिये शाहीन बाग पर चुनाव नहीं जीता जाता। भाजपा बुरी तरह भयभीत है कि एक मुख्यमंत्री उनके काबू में नहीं आ रहा। दिल्ली की जनता पांच साल के विकास पर वोट करेगी, न कि शाहीन बाग पर। आप नतीजों का इंतजार करें।