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दिल्ली: केजरीवाल की चुप्पी पर शशि थरूर ने उठाए सवाल, बताया सियासी चाल

Fri, 10 Jan 2020 08:56 PM IST
Abhishek Singh न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Abhishek Singh Updated Fri, 10 Jan 2020 08:56 PM IST
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Delhi Assembly Eelection 2020: Congress leader Shashi Tharoor targests AAP and Arvind kejriwal
कांग्रेस नेता शशि थरूर - फोटो : अमर उजाला

दिल्ली चुनाव में ताल ठोक रही कांग्रेस ने सत्ताधारी आम आदमी पार्टी व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर बड़ा हमला बोला है। नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के खिलाफ हुए विरोध प्रदर्शनों के दौरान केजरीवाल की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए कांग्रेस ने इसे उनकी सियासी चाल करार दिया है। वहीं, कांग्रेस ने सीएए को देश के संविधान के खिलाफ व देश को बांटने वाला कानून बताया है।

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दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में शुक्रवार को मीडिया से बात करते हुए कांग्रेस के वरिष्ठ नेता व सांसद शशि थरूर ने आरोप लगाया कि सीएए के खिलाफ हुए विरोध प्रदर्शनों से अरविंद केजरीवाल ने खुद को अलग थलग रखा। उन्होंने न तो इस पर कोई सवाल उठाया और न ही विरोध के दौरान घायल छात्रों को देखने गए। दूसरी तरफ बीच-बीच में उन्होंने दिल्ली पुलिस की कार्यशैली पर सवाल भी उठाया। इस दौरान भी उन्होंने पुलिस को शासन से मिलने वाले आदेश का हवाला दिया। सीएए विरोध आंदोलन में अपने इस रूख से केजरीवाल कानून का समर्थन और विरोध करने वाले (दोनों) पक्षों का चुनाव में समर्थन हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं।
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शशि थरूर ने मुख्यमंत्री की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि क्या एक मुख्यमंत्री की जिम्मेदार नहीं होती है कि वह घायलों के बारे में जाने या इतने हंगामे पर कोई कदम उठाएं। दिल्ली में इतनी बड़ी हिंसा के बावजूद जब  मुख्यमंत्री बेफिक्र हैं, तो चुनाव में समर्थन लेकर जनता का क्या साथ देंगे। थरूर ने दोनों पक्षों से इस मामले में शिकायत दर्ज कराने की सलाह दी है। 
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शशि थरूर ने बताया कि 2013 से पहले अरविंद केजरीवाल तत्कालीन मुख्यमंत्री शीला दीक्षित पर दिल्ली पुलिस के आगे मजबूर होने का आरोप लगाते रहते थे। लेकिन अब केजरीवाल खुद इस कदर मजबूर हो गए हैं कि देश के संविधान को बचाने वालों के जख्मी होने पर न तो उनकी सुध ली और न ही इस मामले पर किसी भी तरह का दखल दिया। थरूर ने सवाल किया है कि आज केजरीवाल की मजबूरी क्या है। 

शशि थरूर ने दिल्ली पुलिस पर जेएनयू में मारपीट करने वालों पर कार्रवाई नहीं करने और जामिया परिसर के अंदर बगैर इजाजत की गई कार्रवाई पर भी सवाल उठाए। दिल्ली के मुख्यमंत्री की तरफ इस कानून पर अपना मौन रहना, चुनाव से पहले की शांति है। लेकिन इसका उन्हें फायदा नहीं मिलेगा क्योंकि दोनों पक्ष सीएम के इस रवैये को समझ गई है। सीएम होकर भी जब छात्रों के साथ हुई ज्यादती पर कुछ नहीं बोल रहे हैं तो उनसे क्या उम्मीदें की जा सकती हैं।

दीपिका का जेएनयू पहुंचना नहीं हो सकती है छपाक के बहिष्कार की वजह 
जेएनयू में अभिनेत्री दीपिका पादुकोण के पहुंचने के बाद फिल्म छपाक के बहिष्कार पर शशि थरूर ने कहा कि वह फिल्म विश्लेषक नहीं हैं। लेकिन अगर देश का कोई भी नागरिक किसी मामले का समर्थन या विरोध करने वालों के पास जाता है तो इसे बहिष्कार का कारण नहीं बनाया जाना चाहिए। थरूर ने यह भी कहा कि देश के संविधान के हितों की रक्षा करने वालों के साथ पहले भी कांग्रेस थी और सीएए मामले में कांग्रेस का आगे भी यही रुख रहेगा।  

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