अनाज मंडी अग्निकांडः दिल्ली और केंद्र सरकार आमने-सामने
- दिल्ली सरकार का दावा, केंद्र को भेजा था प्रोजेक्ट, लेकिन नहीं मिली थी मंजूरी
- स्पेशल एरिया पुनर्विकास को शाहजहांनाबाद प्रोजेक्ट से जोड़ने की थी योजना
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अनाज मंडी हादसे के बाद दिल्ली और केंद्र सरकार एक बार फिर आमने-सामने हैं। केंद्रीय शहरी विकास मंत्री हरदीप सिंह पुरी के स्पेशल एरिया पुनर्विकास योजना को नोटिफाई करने में नाकाम रहने के आरोप पर दिल्ली सरकार ने मंगलवार को केंद्र पर ही आरोप मढ़ दिया।
दिल्ली सरकार के शहरी विकास विभाग ने कहा कि मंत्री सत्येंद्र जैन की मेज पर इस साल 26 अगस्त को इससेे जुड़ी फाइल आई थी। उन्होंने 24 घंटे के अंदर ही इस फाइल पर जरूरी मंजूरियां दे दी थीं।
विभाग ने कहा कि 17 अगस्त 2017 को शाहजहांनाबाद रिडेवलपमेंट कॉरपोरेशन (एसआरडीसी) की बोर्ड बैठक सत्येंद्र जैन की अध्यक्षता में हुई थी। बोर्ड ने फैसला किया था कि पूरी पुरानी दिल्ली के पुनुरुद्धार के लिए प्राथमिक प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार की जाए।
इसे हृदय स्कीम में शामिल करने के लिए केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय को भेजा जाए। इसके बाद एसआरडीसी ने योजना बनाई। इसमें बुनियादी ढांचे के साथ इलाके के सामाजिक-आर्थिक विकास की कार्ययोजना भी शामिल थी। इस पर करीब 1468 करोड़ रुपये खर्च होने थे। इसमें पुरानी दिल्ली के 6 वार्ड में बिजली केबल को अंडरग्राउंड किया जाना था।
दिल्ली सरकार के अधिकारियों का कहना है कि इसके बाद पूरा प्रोजेक्ट केंद्रीय आवास व शहरी कार्य मंत्रालय के पास 1 सितंबर 2017 को भेजा गया। इसके बाद अगले साल 16 मार्च को इसका रिमाइंडर भी भेजा था, लेकिन मंत्रालय से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली।
10 मई को एक बार फिर दिल्ली सरकार ने रिमाइंडर भेजा, लेकिन इस मामले में अब तक केंद्र सरकार ने कोई जवाब नहीं दिया है।
दिल्ली सरकार का कहना है कि इस बीच दिसंबर 2018 में दिल्ली सरकार ने चांदनी चौक के पुनुरुद्धार पर काम शुरू किया। इसे मार्च 2020 तक पूरा कर लिया जाएगा। दिल्ली सरकार का कहना है कि इससे साफ है कि केंद्रीय मंत्रालय का इस मामले में दावा झूठा है।
मंत्रालय यह जवाब नहीं दे रहा है कि अनाज मंडी इलाके के विशेष क्षेत्र पुनर्विकास के प्रोजेक्ट को शाहजहांनाबाद पुनुरुद्धार प्रोजेक्ट के साथ क्यों नहीं जोड़ा गया।
हरदीप सिंह पुरी बोले, तथ्य झूठ नहीं बोलते
केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी लगातार तीसरे दिन दिल्ली सरकार पर हमलावर रहे। उन्होंने उत्तरी दिल्ली नगर निगम की तरफ से दिल्ली सरकार को भेजे गए पत्रों की कॉपी सोशल मीडिया पर शेयर करते हुए कहा है कि तथ्य झूठ नहीं बोलते।
सत्य को दबाया नहीं जा सकता। यह कुछ और तथ्य हैं, जिनसे पता चलता है कि किस तरह दिल्ली के शहरी विकास विभाग ने पुनर्विकास प्रस्ताव की अधिसूचना को लटकाए रखा और उसको बार-बार वापस भेजते रहे।
पुरी ने कहा कि उनके पत्राचार से जाहिर होता है कि उन्होंने इस प्रक्रिया को दो साल तक लटकाए रखा। अब वह कह रहे हैं कि यह फाइल उनके पास अभी नहीं भेजी गई है, जबकि पत्राचार साफ बताता है कि यह सच नहीं है। अब उपराज्यपाल साहब के पास फाइल भेजकर एक तरह से मान लिया है कि यह इनकी ही जिम्मेदारी थी।