दिल्ली: एयर फिल्टर मशीनें घटाएंगी प्रदूषण, बसों के साइलेंसर में भी लगाया जाएगा फिल्टर
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राष्ट्रीय राजधानी में बढ़ रहे वायु प्रदूषण का बोझ कम करने के लिए लगातार कदम उठाए जा रहे हैं। अब केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) शहर के पांच सबसे व्यस्ततम इलाकों में एयर फिल्टर मशीन लगवाएगा। इस तकनीक को वायु सिस्टम नाम दिया गया है। वहीं, बसों के साइलेंसर में फिल्टर लेयर किट लगाकर प्रदूषण को नियंत्रित करने की पहल की गई है। ऐसी तकनीक का इस्तेमाल देश की राजधानी में पहली बार होगा।
सोमवार को सीपीसीबी के सदस्य सचिव प्रशांत गार्गव ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश अनुरूप 2 हजार सीसी क्षमता से अधिक एसयूवी वाहनों से ली जाने वाली एक फीसदी लेवी का इस्तेमाल ऐसी तकनीक को लगाने के लिए किया जाएगा। इसके लिए पर्यावरण संरक्षण कोष (ईपीसी) के तहत 17 परियोजनाएं मंजूर की गई हैं।
इन पांच जगहों पर लगेगा वायु सिस्टम
नेशनल एनवॉयरमेंटल इंजीनियरिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट (नीरी) की मदद से इस वायु सिस्टम को आईटीओ, आनंद विहार, शादीपुर, भीकाजी कामा प्लेस इलाके में लगाया जाएगा। सीपीसीबी पर्यावरण संरक्षण कोष से 2 करोड़ 65 लाख रुपए से कुल 54 यूनिट वायु सिस्टम खरीदेगी। इस वायु सिस्टम का काम हवा को साफ करना और प्रदूषण रहित बनाना है।
शुरुआत में 30 बसों में लगेगा फिल्टर
मानव रचना इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ रिसर्च की ओर से इस फिल्टर को ईजाद किया गया है। इस फिल्टर के जरिए बसों से निकलने वाले जहरीले धुएं को प्रदूषण रहित बनाया जाएगा। फिलहाल सीपीसीबी ने यूनिवर्सिटी के इस प्रयोग को इस्तेमाल करने की हामी भरी है। शुरुआत में दिल्ली की तीस बसों में इसे लगाया जाएगा। इसके लिए 20 लाख रुपए खर्च किए जाएंगे।
प्रदूषण घटाने का आइडिया है तो पहुंचिए सीपीसीबी
सीपीसीबी सदस्य सचिव का कहना है कि इन दोनों प्रयोगों की सफलता ही इन उत्पादों का भविष्य तय करेगी। यदि ये कारगर हुए तो इन्हें बढ़ाया जाएगा। वहीं, उन्होंने कहा कि सामान्य लोगों के पास प्रदूषण कम करने का कोई अच्छा आइडिया है तो वह भी सीपीसीबी को भेज सकते हैं।
प्रदूषण घटाने के लिए 102 शहरों पर काम
विश्व स्वास्थ्य संगठन की ओर से 2014-18 में चिन्हित 102 शहरों में वायु प्रदूषण से निपटने की कार्ययोजना तैयार की जानी है। इसके लिए अभी 73 शहरों से कार्ययोजना सीपीसीबी को भेजी जा चुकी है। इनमें 36 शहरों की कार्ययोजना को अस्वीकार कर दिया गया। इसका कारण है कि उनकी ओर से कोई टाइमलाइन नहीं दी गई थी या संबंधित एजेंसियों के बीच काम का बंटवारा गलत तरीके से किया गया था। वहीं, 7 शहरों के प्रस्तावों पर विचार हो रहा है। साथ ही 30 शहरों की कार्ययोजना पर काम शुरू हो चुका है। दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हिमाचल, पंजाब समेत उत्तर भारत के मैदानी भागों के राज्यों के शहर ज्यादा हैं।