दिल्ली: आंदोलन में मोर्चे को मिली जीत के बाद मत्था टेकने किसान पहुंचे गुरुद्वारा बंगला साहिब
किसानों के अगुवाई करते हुए हरमीत सिंह कालका ने संक्षेप समागम में कहा कि गुरु साहिब की अपार बख्शीश व रहमत से ही किसानों को जीत मिली है। मोर्चे में शामिल किसानों के हौसले और नेतृत्व ने इस आंदोलन को कामयाबी तक पहुंचाया। हालांकि मोर्चे को समाप्त करने के लिए कई बार कोशिशें हुईं, मगर किसानों ने डटकर मुकाबला किया।
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किसानों के अगुवाई करते हुए हरमीत सिंह कालका ने संक्षेप समागम में कहा कि गुरु साहिब की अपार बख्शीश व रहमत से ही किसानों को जीत मिली है। मोर्चे में शामिल किसानों के हौसले और नेतृत्व ने इस आंदोलन को कामयाबी तक पहुंचाया। हालांकि मोर्चे को समाप्त करने के लिए कई बार कोशिशें हुईं, मगर किसानों ने डटकर मुकाबला किया। इसका मकसद जीत, हार या किसी को नीचा दिखाना नहीं बल्कि अपने अस्तित्व की लड़ाई थी।
उन्होंने कहा कि इस मोर्च के लिए दिल्ली गुरुद्वारा कमेटी समेत दिल्ली की संगत ने अहम महत्वपूर्ण योगदान दिया, इसके लिए अकाल पुरख का शुक्रिया अदा करते हैं। इस मौके पर संयुक्त किसान मोर्चे के नेता बलबीर सिंह राजेवाल ने कहा कि इस लड़ाई को जीतने में दिल्ली की संगत और दिल्ली गुरुद्वारा कमेटी की अहम भूमिका रही।
तकलीफ के लिए दिल्लीवासियों से किसानों ने मांगी माफी
बलवीर सिंह राजेवाल ने इस मौके पर कहा कि दिल्ली की सीमाओं पर मोर्चे को चलाना हमारा मजबूरी थी। इस कारण दिल्ली के लोगों को जो तकलीफें हुईं उसके लिए संयुक्त किसान मोर्चे की तरफ से हम माफी मांगते हैं। दिल्ली की संगत और आस-पास के ग्रामीणों ने मोर्चे के लिए जितना योगदान किया, उसे दुनिया हमेशा याद रखेगी।
सरकार को भी आना गुरु की शरण में
किसान नेता राकेश टिकैत ने भी दिल्ली की संगत और दिल्ली कमेटी का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि मोर्चे में स्थानीय लोगों सहित दिल्ली गुरुद्वारा कमेटी सहित सभी गुरुधाम का योगदान रंहा। खाप पंचायत, डाक्टरों, अस्पतालों के साथ ही सफाई कर्मचारियों का पूर्ण सहयोग मिला। जो लोग अपने गांव, घर और खेत छोड़कर पहुंचे, उन्हें कभी नहीं भूल सकते। आंदोलन गुरु साहिब की रहमत के कारण सफल हुआ है। सरकार को भी मोर्चा समाप्त करवाने के लिए गुरु की शरण में आना पड़ा और गुरुपर्व वाले दिन काले कानून समाप्त करने का एलान हुआ।
300 साल से टूटी डोर मोर्चे की बदौलत फिर जुड़ी
राकेश टिकैत ने कहा कि मोर्चे की बदौलत 300 वर्ष से टूटी हुई डोर फिर से जुड़ गई है। अंग्रेजों के समय अलग-अलग राज्यों के लोगों के आपसी भाईचारे की डोर टूटती चली गई, मगर अब दोबारा मोर्चे की बदौलत जुड़ गई है। महेंद्र सिंह टिकैत कहते थे कि पंजाब अगुवाई करेगा, हरियाणा साथ होगा और दिल्ली के 300 किलोमीटर के घेरे के लोग एकजुट होंगे। वह समय आया और सफलता भी मिली। गांव में बच्चे भी इस बात को लेकर सुदृढ़ थे कि जीत कर ही वापस लौटेंगे। कई तरह के आरोप लगे मगर हौंसला नहीं छोड़ा।
किसान नेता मनजीत सिंह राय समेत दूसरे किसान नेताओं ने भी इस मौके पर अपने विचार रखे। समागम में बीबी रणजीत कौर व अमरजीत सिंह पप्पू ने बलबीर सिंह राजेवाल को सिरोपा भेंट किया जबकि अमरजीत सिंह पिंकी व भुपिंदर सिंह भुल्लर ने राकेश टिकैत का सम्मानित किया। इस मौके पर रमिंदर सिंह स्वीटा, भुपिंदर सिंह गिन्नी, विक्रम सिंह रोहिणी, रमनजोत सिंह, गुरदेव सिंह, आत्मा सिंह लुबाणा, भुपिंदर सिंह गिन्नी, गुरप्रीत सिंह जस्सा, सुखविंदर सिंह बब्बर, मंजीत सिंह औलख, जुझार सिंह, ओंकार सिंह राजा, जतिंदरपाल सिंह गोल्डी भी उपस्थित रहे।