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उम्मीद: 96 वर्षीय दादी ने घर पर ही दी कोरोना को मात, पूरा परिवार हो गया था संक्रमित पर नहीं मानी हार
Sat, 15 May 2021 09:36 AM IST
पूजा त्रिपाठी
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: पूजा त्रिपाठी
Updated Sat, 15 May 2021 09:36 AM IST
सार
मन में सरकारात्मक सोच हो और अपनों का साथ हो तो किसी भी मुश्किल से पार पाया जा सकता है ऐसा ही कुछ दिल्ली की एक 96 वर्षीय दादी ने कर दिखाया। जो न सिर्फ कोरोना से जंग जीतींं बल्कि होम आईसोलेशन में रहकर ही ठीक हुईं...
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96 वर्षीय दादी ने दी कोरोना को मात
- फोटो : पीटीआई
विस्तार
राजधानी में कोरोना की चौथी लहर के बीच 96 वर्षीय वृद्धा ने कोरोना को मात दी है। खास बात यह है कि वृद्ध महिला ने अस्पताल में नहीं बल्कि घर पर डॉक्टरों की देखरेख में उम्र के इस पड़ाव में कोरोना का हराया है। अब वह पूरी तरह से स्वस्थ हैं।
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जानकारी के मुताबिक, पुष्पा शर्मा परिवार के साथ शाहदरा इलाके में रहती हैं। परिवार में 67 वर्षीय बेटा अरुण, 64 वर्षीय बहू मीणा व पौता और उनकी पत्नी साथ में रहते हैं। वृद्धा के पोते कुणाल ने बताया कि महिला की गत 18 अप्रैल को रिपोर्ट पॉजिटिव आई थी। इसके बाद उनका घर में रहकर ही डॉक्टरों की देखरेख में इलाज किया गया और गत नौ मई को डॉक्टरों ने उन्हें स्वस्थ बताया।
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उन्होंने कहा कि देशभर में कोरोना की दूसरी लहर के बीच दिल्ली में भी बुरे हालात हो चुके थे। अस्पतालों में संसाधनों की कमी की वजह से परिवार में दादी को घर में रखने का ही फैसला लिया। परिवार में परेशानी और भी तब बढ़ गई थी जब महिला के बेटे और बहू दोनों को कोरोना हो गया था।
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कुणाल ने बताया कि कोरोना संक्रमित होने के बाद उनकी दादी कमजोरी और बुखार महसूस करती थी, लेकिन इस बीच पिता ने बीमार होते हुए भी दवाइयों के साथ-साथ घर में सकारात्मक माहौल बनाए रखा। उन्होंने बताया कि वृद्धा का गत 27 अप्रैल को टेस्ट किया गया था तब उसमें कोरोना का सीआरपी स्तर 82 दर्ज किया गया था, जबकि नौ मई को यह चार के आंकड़े पर पहुंच सामान्य हो गया था।
दरअसल, सीआरपी एक तरह का प्रोटीन होता है जोकि लीवर द्वारा बनता है। संक्रमण की दर बढ़ने पर सीआरपी का स्तर भी बढ़ जाता है। शाहदरा निवासी नंदिनी ने बताया कि वह 96 वर्षीय वृद्ध महिला को उनकी दादी की तरह मानती हैं। जब उन्हें महिला के संक्रमित होने की जानकारी मिली तो तब वह पूरी तरह उम्मीद खो चुकी थी। लेकिन, 96 वर्षीय महिला ने कोरोना को हरा दिया। उनके साहस ने पूरी कॉलोनी को आशा की किरण दी है।