Delhi: बीएचयू के रिटायर्ड प्रोफेसर से 90 लाख ठगने वाला गिरफ्तार, बुजुर्गों को ही बनाता था निशाना
आरोपी सीनियर सिटीजंस को कहता था कि आरबीआई ने पॉलिसी को जल्द ही मेच्योर करने, मेच्योर होने पर मोटा मुनाफा देने और पॉलिसी की रकम को डबल करने के नए नियम जारी किए हैं। इसके बाद ये बुजुर्गों से विभिन्न चार्ज के नाम पर मोटी रकम ठग लेता था।
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ग्रेटर कैलाश-1 थाना पुलिस ने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) से रिटायर्ड प्रोफेसर भारत भूषण से 90 लाख रुपये से ज्यादा ठगने वाले आरोपी को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपी वीरेंद्र साहनी बुजुर्ग लोगों के साथ ही ठगी करता था।
आरोपी सीनियर सिटीजंस को कहता था कि आरबीआई ने पॉलिसी को जल्द ही मेच्योर करने, मेच्योर होने पर मोटा मुनाफा देने और पॉलिसी की रकम को डबल करने के नए नियम जारी किए हैं। इसके बाद ये बुजुर्गों से विभिन्न चार्ज के नाम पर मोटी रकम ठग लेता था। तीन बुजुर्गों से करोड़ों रुपये ठगने की बात सामने आ चुकी है।
बीएचयू से रिटायर प्रोफेसर भारत भूषण (82) पंपोज एक्लेव, ग्रेटर कैलाश-1 में रहते हैं। उन्होंने 26 जून को शिकायत दी थी कि आरोपी ने आरबीआई, लखनऊ का डीजीएम संदीप त्यागी बनकर साल 2019 में फोन किया। उसने कहा कि आरबीआई ने इंश्योरेंस पॉलिसी को मेच्योर (परिपक्व) करने के लिए, मेच्योर करने पर उन पर बोनस देने और पॉलिसी की रकम दोगुनी मिलने का प्लान जारी किया है। उन्हें उनकी पॉलिसी पर 90 लाख रुपये मिलेंगे। रिटायर प्रोफसर आरोपी के झांसे में आ गए और उनसे 1.5 लाख रुपये जमा कराने के लिए कहा। इसके बाद विभिन्न चार्ज के नाम पर आरोपी ने बुजुर्ग से 90 लाख रुपये ठग लिए।
मामला दर्जकर ग्रेटर कैलाश-1 थानाध्यक्ष अजीत कुमार की देखरेख में एसआई अनिल व हवलदार ललित की टीम ने जांच शुरू की। पता लगा कि आरोपी ने मोबाइल नंबर फर्जी नंबर से ले रखा था। उसने बुजुर्ग से जिस बैंक में पैसे मंगवाए थे वह भी फर्जी आईडी से खुलवाया हुआ था। आखिरकार पुलिस टीम ने आरोपी वीरेंद्र साहनी को 18 जुलाई को दिल्ली से गिरफ्तार कर लिया।
उसके बाद से एक लग्जरी कार, 15 लाख की डायमंड ज्वेलरी, 25 लाख की कीमत के शेयर, चार एटीएम, एक मैकबुक व आईफोन बरामद किया गया है। आरोपी के बैंक खाते में 2.5 लाख रुपये है। बैंक खाते को फ्रीज कर दिया गया है।
आरोपी को नेट बैंकिंग की अच्छी जानकारी है
मूलरूप से गोरखपुर के संग्रामपुर गांव का रहने वाला वीरेंद्र साहनी 12वीं पास है। उसे नेट बैकिंग की अच्छी जानकारी है। वह वर्ष 2008 में दिल्ली आया था और रियालंस मोबाइल के सिम कार्ड डीलर के रूप में काम करने लगा। इसके बाद वह विभिन्न इंश्योरेंस कंपनियों के लिए डाटा एकत्रित करने वाली कंपनी नेट अमबिट में काम करने लगा। यहां इसने कॉल सेंटर शुरू किया।
यहां काम कर ये सीख गया कि लोगों से उनकी व्यक्तिगत जानकारी कैसे ली जाती है। आरोपी सीनियर सिटीजंस से उनके खाते में इंश्योरेंस का बोनस जमा कराने के बहाने उनकी जानकारी ले लेता था। इसके बाद नेट बैकिंग व अन्य तकनीकी माध्यमों से खाते का पासवर्ड, रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर आदि बदलकर बैंक खाते पर कब्जा कर लेता था। आरोपी बैंगलुरु के देसी राजू सुंद्रा (72) से 50 लाख व गुजरात के इंद्रबदन जावेद भाई पटेल से 20 लाख रुपये की ठगी कर चुका है।