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Delhi: सफदरजंग में हीट स्ट्रोक के मरीजों के लिए 62 बेड आरक्षित, डॉक्टर-नर्सों और पैरामेडिकल स्टाफ का प्रशिक्षण

Sun, 04 May 2025 02:03 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Sun, 04 May 2025 02:03 AM IST
सार

इसके लिए डॉक्टरों से लेकर नर्सिंग स्टाफ सहित पैरामेडिकल कर्मियों को प्रशिक्षित किया गया है। मरीजों के उपचार के लिए 62 बेड आरक्षित किए गए है।

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Delhi : 62 beds reserved for heat stroke patients in Safdarjung hospital
सफदरजंग अस्पताल - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

सफदरजंग अस्पताल ने लू (हीट स्ट्रोक) की चपेट में आने वाले मरीजों के उपचार के लिए तैयारियां पूरी कर ली है। इसके लिए डॉक्टरों से लेकर नर्सिंग स्टाफ सहित पैरामेडिकल कर्मियों को प्रशिक्षित किया गया है। मरीजों के उपचार के लिए 62 बेड आरक्षित किए गए है।
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अस्पताल के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार मई-जून में हीट स्ट्रोक की चपेट में आने वाले मरीजों के उपचार के लिए अस्पताल पूरी तरह से तैयार है। मार्च 2025 में सभी डॉक्टरों, नर्सों और पैरामेडिकल स्टाफ के लिए रिफ्रेशर कोर्स आयोजित किया। इसमें गर्मी संबंधित बीमारी के उपचार और प्रबंधन का प्रशिक्षण दिया। साथ ही हीटवेव को लेकर सभी स्वास्थ्यकर्मियों को जागरूक किया गया।
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डिजास्टर वार्ड भी किया आरक्षित
अस्पताल के एक अधिकारी ने बताया कि अभी फिलहाल हीट स्ट्रोक के मरीजों के लिए छह बेड पूरी तरह से तैयार है। बेड को आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित किया गया है। सभी बेड पर वेंटिलेटर की व्यवस्था की गई है। मरीज के रक्तचाप, दिल की धड़कन, श्वसन दर सहित दूसरी चीजों की मॉनिटर से निगरानी होगी। मरीजों की संख्या बढ़ने पर वार्ड ए के छह बेड और डिजास्टर वार्ड के 50 बेड भी उपचार के लिए आरक्षित किए गए है। मरीज की देखरेख के लिए वार्ड में तीन बड़े कूलर और पंखों की व्यवस्था की गई।
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मरीज बढ़ने पर अतिरिक्त स्टाफ होगा तैनात
उन्होंने कहा कि मरीज के उपचार के दौरान बर्फ संबंधी दिक्कत से न जूझना पड़े उसके लिए तीन आइस लाइन्ड रेफ्रिजरेटर की व्यवस्था की गई है। इसमें पर्याप्त मात्रा में बर्फ का स्टॉक रखा जा सकेगा। साथ ही मरीजों के उपचार के लिए आइस पैक, कूल फ्लूइड, स्प्रे डिवाइस, कूलिंग शीट सहित दूसरे संसाधनों की व्यवस्था की गई है। इसके अलावा अतिरिक्त रेफ्रइजरेटर भी उपलब्ध कराए गए है। मरीजों के उपचार के सक्रिय प्रबंधन प्रोटोकॉल के लिए सामग्री स्पष्ट प्रदर्शित कर दी गई है। अगर मरीजों की संख्या बढ़ेगी तो सभी हितधारकों की बैठक बुलाई जाएगी। साथ ही मरीजों के उपचार के लिए अतिरिक्त कर्मियों को तैनात और संसाधनों को जुटाया जाएगा।


हीट स्ट्रोक के यह हैं लक्षण
  • शरीर का तापमान 105 डिग्री फारेनहाइट से होता है अधिक
  • मरीज बेहोशी की हालत में पहुंच जाता है
  • मानसिक तौर पर सक्रियता कम हो जाती है
  • शरीर में पसीने आने बंद हो जाते है
  • दिल की धड़कन का असमान्य होना
  • रक्तचाप भी हो जाता है कम
हीट स्ट्रोक से बचाव के उपाय
  • पर्याप्त मात्रा में पानी पीएं
  • दोपहर 12 बजे से लेकर शाम चार बजे तक बाहर न निकले
  • सिर को टोपी और गमछे से ढककर रखे
  • बाहर का तला-भुना खाने से परहेज करें
हीट स्ट्रोक का खतरा इनको अधिक
हीट स्ट्रोक का सबसे अधिक खतरा सुरक्षाकर्मी, रेहड़ी-पटरी लगाने वाले, निर्माण मजदूर, घर की सबसे ऊपरी मंजिल पर रहने वाले वृद्ध लोग और तंदूर पर खाना बनाने वालों को है। साथ ही दिनभर डिलीवरी का काम करने वाले भी हीट स्ट्रोक की चपेट में आ सकते है।
 
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