अनाधिकृत कॉलोनियों की 20 फीसदी आबादी पीएम उदय के दायरे में, 50 फीसदी की हुई रजिस्ट्री
-केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने जारी किए आंकड़े
-डीडीए को मिले करीब 2.15 लाख आवेदन, 20 फीसदी आबादी योजना में हुई शामिल
-दस्तावेज के सत्यापन समेत दूसरी औपचारिकताएं डीडीए कर रहा पूरी
-प्रक्रिया पूरी कर 151 लोगों को सौंपी गई कन्वेंस डीड, 50 फीसदी की हुई रजिस्ट्री
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विधानसभा चुनाव के बाद केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने अनधिकृत कॉलोनियों के लोगों को मालिकाना हक देने से जुड़ी पीएम उदय योजना के आंकड़े जारी किए हैं। बीते करीब दो माह में अनधिकृत कॉलोनियों के 20 फीसदी लोगों ने डीडीए की वेबसाइट पर ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन करवाए है। वहीं, 150 लोगों को डीडीए ने कन्वेंस डीड भी दे दी हैं। इनमें से पचास फीसदी से ज्यादा लोगों ने अपने मकान की रजिस्ट्री भी करवा ली है। सरकार का दावा है कि अगले छह महीने में पीए उदय योजना पूरी हो जाएगी।
केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने बताया कि 16 दिसंबर को ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया शुरू हुई थी। 14 फरवरी सुबह तक 2.15 लाख लोगों ने रजिस्ट्रेशन करवा लिए हैं। इस हिसाब से रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया में 8-10 लाख की आबादी शामिल हो गई है। जबकि दिल्ली की अनधिकृत कॉलोनियों की आबादी करीब 40 लाख है।
पुरी के मुताबिक, पंजीकृत आवेदकों का दस्तावेज जमा कराने, मौके का मुआयना करने आदि से जुड़ी औपचारिकताओं को डीडीए पूरा कर रहा है। अब तक 151 लोगों को डीडीए ने कन्वेंस डीड भी सौंप दिया है। इसमें से 20 लोगों की रजिस्ट्री 3 जनवरी को ही सौंप दी गई है। जबकि बाकी लोग अपने-अपने स्तर पर मकान की रजिस्ट्री करवा रहे हैं। वहीं, अधिकारियों का कहना है कि 50 फीसदी से ज्यादा लोगों ने मालिकाना हक ले लिया है। पुरी का कहना है कि अगले छह माह में अनधिकृत कॉलोनियों में रहने वाली पूरी आबादी को मालिकाना हक मिल जाएगा।
मंत्री ने 32 लोगों को सौंपी कन्वेंश डीड
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि पीएम उदय योजना का चुनावी नफे-नुकसान से कोई ताल्लुक नहीं था। चुनाव के दौरान भी यह प्रक्रिया चल रही थी। नतीजा 2.15 लाख लोगों के रजिस्ट्रेशन के तौर पर रहा। इनको कन्वेंस डीड देने की प्रक्रिया चल रही है। इसी कड़ी में शुक्रवार को 32 लोगों को भी डीड सौंपी गई है। यह आगे अब अपनी रजिस्ट्री करवा सकेंगे। इससे पहले तीन जनवरी को रोहिणी विधानसभा क्षेत्र के सूरज पार्क व राजा विहार कॉलोनी के 20 लोगों को रजिस्ट्री सौंपी गई थी।
तो इसलिए दिया मालिकाना हक
हरदीप सिंह पुरी ने स्पष्ट किया कि अगर पुराने कानून कायदों के हिसाब से कॉलोनियों को नियमित किया जाता तो उसे पूरा करने में दस साल लग जाते। इससे बचने के लिए सरकार ने नया कानून बनवाया। इस कानून से सरकार लोगों को मालिकाना हक पहले दे देगी। बाद में डीडीए कॉलोनियों के पुनर्विकास की विस्तृत योजना तैयार करेगा। रजिस्ट्री कराने के दौरान जो शुल्क जमा होगा, उससे विशेष विकास कोष का गठन कर कॉलोनियों का विकास होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि डीडीए ने अनधिकृत कॉलोनियों के भू-उपयोग में परिवर्तन किया है। इसके आधार पर मालिकाना हक दिया जा रहा है।
डीडीए तैयार कर रहा उपनियम
डीडीए अधिकारियों का कहना है कि कॉलोनियों को नियमित करने से पहले उप नियमों को तैयार किया जा रहा है। इसमें सड़क, नाली, पार्क समेत दूसरी सार्वजनिक सुविधाओं के विकास के लिए उपलब्ध जमीन के हिसाब के नियमों में छूट दी जा रही है। इसका ड्राफ्ट तैयार है। एक महीने के भीतर इसे फाइनल कर लिया जाएगा। उसके बाद डीडीए कॉलोनियों को ले-आउट प्लान बनाएगा।
आम लोगों से मिलने वाले शुल्क से बनेगी विशेष विकास निधि
केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने बताया कि आम लोगों से लिए जाने वाले शुल्क से विशेष विकास निधि तैयार की जाएगी। इससे इलाके में सामाजिक ढांचे का निर्माण होगा। वहीं, कॉलोनियों के पुनर्विकास के लिए डीडीए नियम आदि बनाकर ले-आउट प्लान तैयार करेगा। इसमें जरूरत के हिसाब से बुनियादी सुविधाओं का विकास होगा।
50 हेल्प डेस्क कर रहे काम
केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने बताया कि दिल्ली के अलग-अलग इलाकों में अभी तक 50 हेल्प डेस्क काम कर रहे हैं। आवेदन करने वाले यहां अपनी हर छोटी-बड़ी आशंकाओं का समाधान ले सकते हैं। यहां तक कि हेल्प डेस्क से ऑनलाइन फार्म भी भरवाए जा रहे हैं। यही नहीं, जरूरत होने पर डीडीए की टीमें भी अलग-अलग इलाकों में भेजी जा रही हैं।