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यहां जापानी तकनीक से विक्षिप्त बच्चों का इलाज
ब्यूरो/अमर उजाला, गुड़गांव
Updated Fri, 29 Aug 2014 02:07 AM IST
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गुड़गांव सेक्टर-10 सिविल अस्पताल में बन रहे डिस्ट्रिक्ट अर्ली इंटरवेंशन सेंटर (डीईआईसी) जापानी तकनीक से बच्चों का इलाज किया जाएगा। इसके लिए सैंसुई गार्डन बनाया जाएगा। इस बाबत केंद्रीय स्वास्थ्य निदेशालय की टीम भी दौरा कर चुकी है। हाल ही में इसके लिए 22 लाख रुपये की मंजूरी भी दी गई है।
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दरअसल, अभी तक शहर में जन्म से शारीरिक विक्षिप्त बच्चे के इलाज के लिए माकूल बंदोबस्त नहीं है। कई बार जन्म से ही बच्चे में कान या होठ या फिर किसी अन्य अंग में कटने का निशान होता है। जो उम्र के साथ ही बढ़ने पर बच्चे को हीनभावना का शिकार बना देता है। इसे देखते हुए स्वास्थ्य निदेशालय द्वारा सिविल अस्पताल में यह सुविधा शुरू की गई थी।
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अब इसे सेक्टर-10 सिविल अस्पताल में विस्तार दिया जाने का निर्णय लिया गया है। डीईआईसी में बच्चों की सर्जरी कर सामान्य बच्चों की तरह बनाया जाएगा। इसमें में मनोचिकित्सक, फिजिशियन, फिजियोथैरेपिस्ट, सर्जन मौजूद रहेगे।
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थैरेपी के जरिए मिलेगी इलाज
कमजोर आंख, कलर नहीं पहचानने की क्षमता वाले बच्चों को सैंसुई गार्डन में कलर थैरेपी दी जाएगी। सिविल अस्पताल की ओपीडी में बहुत से ऐसे बच्चे आते है जिनकी सुनने की क्षमता बहुत कम होती है। इसके लिए ऑडियो थैरेपी की व्यवस्था यहां होगी। बच्चों के शरीर के अन्य हिस्से में थैरेपी देने के लिए चिकने पत्थर, समुद्री पत्थर भी रखे जाएगे।
डॉ. पुष्पा बिश्नोई, सिविल सर्जन: राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत डीईआईसी सेंटर सेक्टर-10 अस्पताल में शुरू किया जाएगा। विक्षिप्त बच्चों को बेहतर सुविधा मिले, इसके लिए विभाग ने बजट मंजूर कर लिया है। यहीं पर राष्ट्रीय स्तर का ट्रेनिंग सेंटर भी बनने का प्रस्ताव है।