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Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   Definition in the Safety Code for Construction Workers Challenged in High Court

Delhi NCR News: निर्माण श्रमिकों की सुरक्षा संहिता की परिभाषा को हाईकोर्ट में चुनौती

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 23 Jul 2026 08:11 PM IST
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पीआईएल में कहा- फैक्ट्री, खदान व छोटे साइटों पर कामगार होंगे वंचित
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कोर्ट ने केंद्र को जारी किया नोटिस

अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। निर्माण श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा के लिए दायर एक जनहित याचिका (पीआईएल) में दिल्ली उच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है। याचिका में सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 की धारा 2(6) के तहत भवन या अन्य निर्माण कार्य की संकुचित परिभाषा को चुनौती दी गई है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि इस परिभाषा के कारण फैक्टरियों, खदानों, आवासीय परियोजनाओं और 10 से कम कामगारों वाले स्थलों पर कार्यरत लाखों निर्माण मजदूर सामाजिक सुरक्षा लाभों से वंचित हो जाएंगे।
नेशनल कैंपेन कमिटी फॉर सेंट्रल लेजिस्लेशन ऑन कंस्ट्रक्शन लेबर व निर्माण मजदूर पंचायत संघम की ओर से दायर याचिका में संविधान के अनुच्छेद 14, 19(1)(ग) व 21 के तहत इन प्रावधानों को असंवैधानिक घोषित करने की मांग की गई है। याचिकाकर्ताओं के वरिष्ठ अधिवक्ता श्येल त्रेहान ने तर्क दिया कि इससे कामगारों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन हो रहा है।
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गौरतलब है कि 1996 के अधिनियम के तहत सभी निर्माण कामगारों को साइट के आकार की परवाह किए बिना पंजीकरण का अधिकार था, लेकिन 25 नवंबर 2025 को लागू सामाजिक सुरक्षा संहिता ने इस दायरे को संकुचित कर दिया है। मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय व न्यायमूर्ति तेजस कारिया की पीठ ने केंद्र को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
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